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बिहार का मखाना अब दुनिया की थाली तक: दरभंगा से पहली बार समुद्री रास्ते कनाडा पहुंची बड़ी खेप

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किसानों के लिए आई खुशखबरी, विदेश रवाना हुआ 7 टन फ्लेवर मखाना

Bihar Makhana Export Canada 2026: बिहार के किसानों के लिए एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। राज्य के प्रसिद्ध मखाने ने अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक और मजबूत कदम रख दिया है। दरभंगा से पहली बार समुद्री मार्ग के जरिए फ्लेवर मखाने की बड़ी खेप कनाडा भेजी गई है। इससे न केवल बिहार के मखाने की पहचान दुनिया में और मजबूत होगी, बल्कि किसानों की आमदनी बढ़ने की भी उम्मीद है। कृषि से जुड़ी ऐसी ही नई जानकारी के लिए किसान भाइयों Bihar Agro को विजिट करें।

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दो कंटेनरों में भेजा गया 7 मीट्रिक टन मखाना

कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के सहयोग से इस निर्यात अभियान को सफल बनाया। कुल 7 मीट्रिक टन फ्लेवर मखाना दो विशेष कंटेनरों में भरकर गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह के रास्ते कनाडा के लिए रवाना किया गया।

यह पहली बार है जब दरभंगा से इतनी बड़ी मात्रा में मखाना समुद्री मार्ग से विदेश भेजा गया है।

किसानों को मिल रही है पहले से 50% ज्यादा कीमत

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस उपलब्धि को बिहार के किसानों के लिए ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि APEDA की पहल से किसानों को वैश्विक बाजार तक सीधी पहुंच मिल रही है, जिससे उन्हें पहले की तुलना में 50 प्रतिशत से अधिक बेहतर कीमत प्राप्त हो रही है।

उनके अनुसार, बिहार का प्रीमियम गुणवत्ता वाला मखाना अब विदेशी उपभोक्ताओं के बीच भी तेजी से अपनी पहचान बना रहा है।

अब बिचौलियों की भूमिका होगी कम

APEDA के अध्यक्ष अभिषेक देव ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि पटना क्षेत्रीय कार्यालय के प्रयासों से सीधे निर्यात का रास्ता खुला है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि किसानों और विदेशी खरीदारों के बीच बिचौलियों की भूमिका कम होगी।

सीधे निर्यात होने से किसानों को अपने उत्पाद का उचित मूल्य मिलेगा और उनकी आय में सुधार आएगा।

मिथिला के किसानों को मिलेगा बेहतर दाम

अधिकारियों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सीधे निर्यात होने के कारण मिथिला क्षेत्र के किसानों को मखाने का मूल्य लगभग 1,050 रुपये से 1,300 रुपये प्रति किलोग्राम तक मिलने की संभावना है। यह स्थानीय बाजार की तुलना में काफी बेहतर माना जा रहा है।

मखाना विशेषज्ञ बोले- दुनिया में बढ़ेगी बिहार के मखाने की पहचान

राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र, दरभंगा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार का कहना है कि यह निर्यात केवल एक व्यापारिक उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे मिथिला क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है।

उन्होंने बताया कि बिहार का मखाना अपने बेहतरीन स्वाद, गुणवत्ता और पौष्टिकता के कारण पहले से ही खास पहचान रखता है। अब कनाडा तक इसकी पहुंच बनने से भविष्य में अन्य देशों के लिए भी निर्यात के नए अवसर खुलेंगे।

दरभंगा में हुआ भव्य फ्लैग-ऑफ कार्यक्रम

दरभंगा औद्योगिक क्षेत्र में आयोजित फ्लैग-ऑफ समारोह के दौरान जिला कृषि विपणन पदाधिकारी लोकनाथ ठाकुर, राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों, APEDA के अधिकारियों और अन्य गणमान्य लोगों ने इस ऐतिहासिक निर्यात को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

बिहार के कृषि निर्यात को मिलेगा नया मुकाम

विशेषज्ञों का मानना है कि मखाने की यह पहली समुद्री खेप बिहार के कृषि निर्यात के लिए नई शुरुआत साबित हो सकती है। यदि इसी तरह अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग बढ़ती रही तो आने वाले समय में राज्य के हजारों किसानों को इसका सीधा लाभ मिलेगा और बिहार का मखाना दुनिया के प्रमुख सुपरफूड्स में अपनी मजबूत पहचान बना सकेगा।

FAQ- Bihar Makhana Export Canada 2026 पर अक्सर पूछे जाने वाले सवाल।

बिहार से पहली बार मखाना किस देश भेजा गया?

दरभंगा, बिहार से पहली बार 7 मीट्रिक टन फ्लेवर मखाना समुद्री मार्ग के जरिए कनाडा निर्यात किया गया।

मखाने का निर्यात किस संस्था की पहल पर हुआ?

यह निर्यात APEDA (कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण) ने केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के सहयोग से कराया।

इस निर्यात से किसानों को क्या फायदा होगा?

सीधे विदेशी बाजार तक पहुंच मिलने से किसानों को पहले की तुलना में 50% से अधिक बेहतर कीमत मिलने की संभावना है और बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी।

मखाने की खेप किस रास्ते कनाडा भेजी गई?

दो विशेष कंटेनरों में मखाना गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह से समुद्री मार्ग के जरिए कनाडा भेजा गया।

किसानों को मखाने का कितना मूल्य मिलने की उम्मीद है?

अधिकारियों के अनुसार, किसानों को लगभग ₹1,050 से ₹1,300 प्रति किलोग्राम तक कीमत मिल सकती है।

बिहार के मखाने की वैश्विक पहचान क्यों बढ़ रही है?

बेहतरीन गुणवत्ता, स्वाद और पोषण के कारण बिहार का मखाना अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

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