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पराली पर Smart निगरानी! 34 जिलों में CAQM का Powerful Action, किसानों के लिए क्या बदलेगा?

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धान की कटाई का मौसम शुरू होते ही पंजाब और हरियाणा में खेतों पर निगरानी बढ़ गई है। इस बार प्रशासन केवल सैटेलाइट से तस्वीरें देखने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि जमीन पर पहुंचकर स्थिति समझने और मौके पर संबंधित अधिकारियों से समन्वय करने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग यानी CAQM (Commission for Air Quality Management) ने पंजाब और हरियाणा के कुल 34 जिलों में फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात किए हैं। कृषि से जुड़ी ऐसी ही नई जानकारी के लिए किसान भाइयों Bihar Agro को विजिट करें।

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CAQM की यह नई व्यवस्था 1 अक्टूबर 2026 से 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगी। आयोग के मुताबिक इसका मकसद धान की कटाई के दौरान पराली जलाने की घटनाओं को रोकना, जमीनी स्थिति की लगातार जानकारी लेना और जरूरत पड़ने पर स्थानीय स्तर पर तुरंत रोकथाम की कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

पराली जलाने पर कार्रवाई पंजाब हरियाणा में अब खेतों तक पहुंचेगी CAQM की निगरानी

इस बार CAQM Stubble Burning Action Punjab Haryana का सबसे अहम हिस्सा उसका फील्ड-लेवल मॉनिटरिंग सिस्टम है। फ्लाइंग स्क्वॉड अपने तय जिलों में जाकर खेतों और आसपास के इलाकों की स्थिति देखेंगे। यानी अगर कहीं फसल अवशेष जलाने की स्थिति बनती है, तो उसकी जानकारी केवल किसी डिजिटल अलर्ट तक सीमित नहीं रहेगी।

टीमें स्थानीय प्रशासन, जिला स्तर के अधिकारियों और दूसरे संबंधित विभागों के साथ संपर्क में रहेंगी। CAQM के अनुसार इस व्यवस्था से खेतों में मौजूद वास्तविक स्थिति की समय पर जानकारी मिलेगी और किसी घटना के बाद आगे की कार्रवाई में देरी कम करने की कोशिश की जाएगी।

यह बात किसानों के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि निगरानी का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि पराली प्रबंधन के उपलब्ध विकल्पों और स्थानीय व्यवस्था के बीच तालमेल को मजबूत करना भी है।

34 जिलों का चयन क्यों है इतना अहम?

CAQM Stubble Burning Action Punjab Haryana के तहत पंजाब के 18 और हरियाणा के 16 जिलों को शामिल किया गया है। ये ऐसे इलाके हैं जहां धान की खेती बड़े पैमाने पर होती है और फसल कटाई के दौरान फसल अवशेष प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

पंजाब के 18 जिले

संगरूर, तरनतारन, फिरोजपुर, मुक्तसर, बठिंडा, अमृतसर, मोगा, मानसा, फाजिल्का, पटियाला, लुधियाना, कपूरथला, फरीदकोट, बरनाला, मालेरकोटला, गुरदासपुर, जालंधर और फतेहगढ़ साहिब।

हरियाणा के 16 जिले

जींद, फतेहाबाद, हिसार, कैथल, सोनीपत, रोहतक, सिरसा, करनाल, पलवल, झज्जर, कुरुक्षेत्र, अंबाला, यमुनानगर, फरीदाबाद, पानीपत और हांसी।

CAQM ने इन सभी जिलों में फ्लाइंग स्क्वॉड की तैनाती की है, जिससे धान कटाई के महत्वपूर्ण दौर में फील्ड मॉनिटरिंग को मजबूत किया जा सके।

CAQM Stubble Burning Action Punjab Haryana में किसानों से भी रहेगा सीधा संपर्क

CAQM Stubble Burning Action Punjab Haryana को केवल अधिकारियों की टीम तक सीमित नहीं रखा गया है। फ्लाइंग स्क्वॉड किसानों, पराली प्रोटेक्शन फोर्स, जिला प्रशासन, राज्य सरकार के नोडल अधिकारियों और संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के साथ समन्वय करेंगे।

इसका सीधा मतलब है कि जिस गांव या इलाके में फसल कटाई चल रही है, वहां की स्थिति को समझने के लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जानकारी का भी इस्तेमाल किया जाएगा। हरियाणा सरकार ने भी अलग से पराली प्रोटेक्शन फोर्स, ड्रोन निगरानी और देर शाम या रात में गश्त जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने की जानकारी दी है।

इस तरह CAQM Stubble Burning Action Punjab Haryana केंद्र और राज्य स्तर की निगरानी को एक साथ जोड़ने की कोशिश कर रहा है।

रोज की रिपोर्ट में क्या जाएगा?

फ्लाइंग स्क्वॉड को अपने-अपने जिलों की जमीनी स्थिति की रोजाना रिपोर्ट CAQM सेल को भेजनी होगी। रिपोर्ट में केवल यह नहीं बताया जाएगा कि पराली जलाने की घटना हुई या नहीं, बल्कि उसे रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर क्या कदम उठाए गए, इसकी जानकारी भी दी जाएगी।

यही दैनिक रिपोर्टिंग CAQM Stubble Burning Action Punjab Haryana को एक लगातार चलने वाली समीक्षा प्रणाली बनाती है। अगर किसी क्षेत्र में समस्या बढ़ती है, तो आयोग संबंधित प्रशासन और अधिकारियों के साथ आगे की कार्रवाई पर चर्चा कर सकता है। यानी इस बार निगरानी का मॉडल कुछ ऐसा है—घटना की पहचान, जमीन पर सत्यापन, संबंधित अधिकारियों से संपर्क, रोकथाम और फिर रिपोर्ट।

एक ही समय नहीं, चरणों में काम करेंगी टीमें

CAQM Stubble Burning Action Punjab Haryana में फ्लाइंग स्क्वॉड की तैनाती भी चरणबद्ध तरीके से की गई है। अलग-अलग जिलों में अलग अवधि के लिए टीमें जिम्मेदारी संभालेंगी। इससे पूरे धान कटाई सीजन के दौरान निगरानी को लगातार बनाए रखने में मदद मिलेगी।

CAQM का तर्क साफ है कि धान की कटाई सभी इलाकों में एक जैसी रफ्तार से नहीं होती। इसलिए पूरे सीजन को कवर करने के लिए चरणबद्ध तैनाती ज्यादा व्यावहारिक व्यवस्था हो सकती है। आयोग ने इस व्यवस्था को समय पर जमीनी आकलन और बेहतर अंतर-विभागीय तालमेल से जोड़ा है।

सैटेलाइट के साथ जमीन पर भी नजर

पराली जलाने की निगरानी के लिए सरकार पहले से ही सैटेलाइट आधारित सिस्टम का इस्तेमाल करती रही है। ISRO, राज्य रिमोट सेंसिंग केंद्र और IARI के सहयोग से तैयार प्रोटोकॉल के जरिए सक्रिय आग की घटनाओं का पता लगाया जाता है और संबंधित फील्ड कर्मचारियों तक सूचना पहुंचाई जाती है।

अब CAQM Stubble Burning Action Punjab Haryana में फ्लाइंग स्क्वॉड इस व्यवस्था की जमीन पर पुष्टि और फॉलो-अप में अहम भूमिका निभा सकते हैं। यानी डिजिटल अलर्ट और फील्ड रिपोर्टिंग को एक-दूसरे से जोड़कर काम करने पर जोर दिखाई दे रहा है।

किसानों के लिए इसका मतलब सिर्फ सख्ती नहीं है

पराली को लेकर जब कार्रवाई की बात होती है तो किसानों के मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि प्रशासन का अगला कदम क्या होगा? लेकिन CAQM Stubble Burning Action Punjab Haryana को सिर्फ दंडात्मक व्यवस्था के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी।

CAQM ने 2026 की तैयारियों में फसल अवशेष प्रबंधन की मशीनरी, इन-सिटू और एक्स-सिटू प्रबंधन, जागरूकता और फील्ड स्तर पर रोकथाम को भी महत्व दिया है।

यानी किसानों के लिए बेहतर रास्ता यही है कि पराली को खेत में जलाने के बजाय उपलब्ध मशीनरी, अवशेष प्रबंधन और स्थानीय सरकारी व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाए। इससे खेत की मिट्टी, आसपास की हवा और अगली फसल की तैयारी—तीनों पर बेहतर असर पड़ सकता है।

पंजाब-हरियाणा में इस बार निगरानी का संदेश साफ

CAQM Stubble Burning Action Punjab Haryana से एक बात साफ है कि 2026 के धान कटाई सीजन में खेतों पर निगरानी को हल्के में नहीं लिया जा रहा है। 34 जिलों में फ्लाइंग स्क्वॉड, दैनिक रिपोर्टिंग, स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय और पहले से चल रही सैटेलाइट निगरानी—इन सभी को जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

CAQM पहले भी फसल अवशेष जलाने की रोकथाम के लिए राज्य सरकारों और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय करता रहा है। 2025 के दौरान भी पंजाब और हरियाणा में फ्लाइंग स्क्वॉड की तैनाती और दैनिक रिपोर्टिंग की व्यवस्था रही थी। इस बार CAQM Stubble Burning Action Punjab Haryana का असली असर इस बात से तय होगा कि खेत तक पहुंची निगरानी कितनी जल्दी रोकथाम में बदलती है और किसानों को पराली प्रबंधन के व्यावहारिक विकल्प कितने आसानी से मिलते हैं।

किसान भाइयों के लिए जरूरी बात

धान की कटाई के बाद खेत जल्दी खाली करने का दबाव रहता है, लेकिन पराली जलाना समस्या का आसान दिखने वाला समाधान है, स्थायी समाधान नहीं। किसान उपलब्ध सरकारी मशीनरी, कस्टम हायरिंग सुविधा और स्थानीय कृषि अधिकारियों से पराली प्रबंधन के विकल्पों की जानकारी लें।

वहीं प्रशासन के लिए चुनौती भी उतनी ही बड़ी है—निगरानी के साथ मशीनरी की उपलब्धता, समय पर सहायता और किसानों तक सही जानकारी पहुंचाना। अगर इन दोनों पहलुओं पर बराबर ध्यान दिया जाता है, तो CAQM Stubble Burning Action Punjab Haryana सिर्फ निगरानी अभियान न रहकर खेतों में व्यवहारिक बदलाव का माध्यम भी बन सकता है।

एक नजर में पूरी खबर

निगरानी अवधि: 1 अक्टूबर 2026 से 30 नवंबर 2026
कुल जिले: 34
पंजाब: 18 जिले
हरियाणा: 16 जिले
मुख्य जिम्मेदारी: फील्ड मॉनिटरिंग, स्थानीय समन्वय और दैनिक रिपोर्टिंग
मुख्य उद्देश्य: धान की पराली जलाने की घटनाओं की रोकथाम और वायु प्रदूषण नियंत्रण

FAQ: पराली जलाने और CAQM फ्लाइंग स्क्वॉड से जुड़े सवाल

CAQM ने पंजाब और हरियाणा में कितने जिलों में फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात किए हैं?

CAQM ने 2026 के धान कटाई सीजन के लिए पंजाब और हरियाणा के कुल 34 जिलों में फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात किए हैं।

फ्लाइंग स्क्वॉड कब तक काम करेंगे?

इन टीमों की तैनाती 1 अक्टूबर 2026 से 30 नवंबर 2026 तक की गई है।

पंजाब में कितने जिलों की निगरानी होगी?

पंजाब के 18 जिलों को इस निगरानी व्यवस्था में शामिल किया गया है।

हरियाणा के कितने जिले शामिल हैं?

हरियाणा के 16 जिलों में फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात किए गए हैं।

CAQM की टीमें सिर्फ खेतों की निगरानी करेंगी?

नहीं। वे किसानों, जिला प्रशासन, पराली प्रोटेक्शन फोर्स, नोडल अधिकारियों और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ समन्वय भी करेंगी।

क्या पराली जलाने की जानकारी सैटेलाइट से भी मिलती है?

हां। सरकार सैटेलाइट आधारित सिस्टम से खेतों में आग की घटनाओं की पहचान करती है और संबंधित फील्ड अधिकारियों को सूचना भेजी जाती है।

फ्लाइंग स्क्वॉड रोजाना रिपोर्ट क्यों भेजेंगी?

दैनिक रिपोर्ट से CAQM को जिलेवार स्थिति, उठाए गए कदम और आगे की जरूरतों की लगातार समीक्षा करने में मदद मिलेगी।

क्या सरकार पराली प्रबंधन के लिए मशीनरी पर भी जोर दे रही है?

हां। 2026 की तैयारियों में इन-सिटू और एक्स-सिटू फसल अवशेष प्रबंधन तथा उपलब्ध CRM मशीनरी को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।

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