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फसल बीमा योजना में अब तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है। राज्यसभा में कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने जानकारी दी कि सरकार WINDS नेटवर्क, YES-TECH, DigiClaim और कई डिजिटल सिस्टम के जरिए फसल नुकसान का सटीक आकलन और बीमा दावों का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रही है। कृषि से जुड़ी ऐसी ही नई जानकारी के लिए किसान भाइयों Bihar Agro को विजिट करें।

फसल बीमा योजना (Fasal Bima Yojana 2026) हुई हाईटेक, किसानों को मिलेगा तेज और सटीक लाभ
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) में अब आधुनिक तकनीकों का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। केंद्र सरकार ऐसी व्यवस्था तैयार कर रही है, जिससे फसल नुकसान का आकलन पहले से कहीं ज्यादा सटीक और कम समय में किया जा सके। इसके लिए अब सिर्फ पारंपरिक सर्वे पर निर्भर रहने के बजाय सैटेलाइट इमेज, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन (AWS), रिमोट सेंसिंग और मोबाइल आधारित डिजिटल ऐप का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे किसानों के बीमा दावों का निपटारा भी पहले की तुलना में अधिक तेज और पारदर्शी होने की उम्मीद है।
राज्यसभा में सरकार ने दी नई व्यवस्था की जानकारी
कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने राज्यसभा में लिखित जवाब देते हुए बताया कि फसल बीमा योजना को तकनीक आधारित बनाने पर तेजी से काम चल रहा है। सरकार का उद्देश्य नुकसान का सही आकलन कर किसानों तक बीमा राशि समय पर पहुंचाना है, ताकि उन्हें लंबा इंतजार न करना पड़े और पूरी प्रक्रिया अधिक भरोसेमंद बन सके।
WINDS नेटवर्क से बदलेगी मौसम की जानकारी, किसानों को मिलेगा ज्यादा सटीक पूर्वानुमान
केंद्र सरकार मौसम सूचना नेटवर्क एवं डेटा प्रणाली (WINDS) के जरिए देशभर में मौसम संबंधी डेटा को और मजबूत बनाने में जुटी है। इस पहल के तहत अलग-अलग इलाकों में ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन (AWS) और ऑटोमैटिक रेन गेज (ARG) लगाए जा रहे हैं। इन उपकरणों से स्थानीय स्तर (हाइपरलोकल) का लंबे समय तक मौसम का रिकॉर्ड तैयार होगा, जिससे खेती से जुड़े फैसले लेना पहले से आसान हो जाएगा।
फसल बीमा से लेकर खेती की सलाह तक मिलेगा फायदा
WINDS से मिलने वाला सटीक मौसम डेटा सिर्फ फसल बीमा के लिए ही नहीं, बल्कि किसानों को समय पर कृषि सलाह देने और बाढ़, सूखा जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारी में भी अहम भूमिका निभाएगा। इससे जोखिम का बेहतर आकलन किया जा सकेगा और नुकसान कम करने में मदद मिलेगी।
7 राज्यों में शुरू हुआ काम, हजारों स्थानों पर तैयार हो रहा नेटवर्क
सरकार के अनुसार, इस व्यवस्था को फिलहाल असम, हिमाचल प्रदेश, केरल, ओडिशा, पुडुचेरी, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सहित 7 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों ने अपनाया है। अब तक 16,843 स्थानों पर AWS और ARG लगाने की मंजूरी मिल चुकी है। इनमें 1,188 स्थानों पर सिविल कार्य पूरा हो चुका है, जबकि 892 मौसम और वर्षामापी उपकरण सफलतापूर्वक स्थापित किए जा चुके हैं।
अब सैटेलाइट से होगी फसल की पैदावार की जांच, YES-TECH का बढ़ा दायरा
फसल की वास्तविक उपज का सही अनुमान लगाने के लिए केंद्र सरकार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) में YES-TECH (Yield Estimation System based on Technology) का दायरा लगातार बढ़ा रही है। इस तकनीक के जरिए रिमोट सेंसिंग और अन्य आधुनिक साधनों की मदद से पैदावार का आकलन किया जाता है, जिससे सर्वे पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बन सके।
धीरे-धीरे बढ़ रहा है YES-TECH का इस्तेमाल
सरकार ने खरीफ 2023 से धान और गेहूं की फसलों के लिए YES-TECH को लागू करना शुरू किया था। इसके बाद खरीफ 2024 से सोयाबीन को भी इसमें शामिल किया गया। इन फसलों के उपज आकलन में इस तकनीक को 30 प्रतिशत वेटेज अनिवार्य रूप से दिया गया, ताकि पारंपरिक सर्वे के साथ तकनीकी आंकड़ों का भी उपयोग किया जा सके।
12 राज्यों के 344 जिलों तक पहुंची नई व्यवस्था
वित्त वर्ष 2025-26 में YES-TECH का विस्तार करते हुए इसे 12 राज्यों के 344 जिलों में लागू किया गया। कई राज्य सरकारों ने अपनी जरूरत के अनुसार इस तकनीक को अलग-अलग स्तर पर अपनाया है।
राज्यों ने तय किया अलग-अलग वेटेज
YES-TECH से मिलने वाले उपज आंकड़ों को लेकर राज्यों ने अलग-अलग वेटेज निर्धारित किया है। मध्य प्रदेश ने तकनीक आधारित उपज आकलन को 100% वेटेज दिया है। वहीं महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश ने इसे 50%, जबकि ओडिशा और कर्नाटक ने वर्ष 2025-26 के लिए 40% वेटेज के साथ लागू किया है। इससे स्पष्ट है कि फसल उपज के आकलन में तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है।
फसल बीमा का पैसा अब नहीं अटकेगा, सरकार ने लागू किए कई नए नियम
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को बीमा दावा समय पर मिले, इसके लिए केंद्र सरकार ने वित्तीय और तकनीकी स्तर पर कई बड़े बदलाव किए हैं। अब पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तेज बनाने के लिए राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल (NCIP) को मुख्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया गया है। इसके साथ ही भुगतान में देरी रोकने के लिए सख्त नियम भी लागू किए गए हैं।
DigiClaim से सीधे खाते में पहुंचेगी बीमा राशि
खरीफ 2022 से शुरू किए गए DigiClaim मॉड्यूल के जरिए राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल (NCIP), पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) और बीमा कंपनियों की भुगतान प्रणाली को आपस में जोड़ा गया है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि बीमा दावा मंजूर होते ही राशि सीधे किसान के बैंक खाते में भेजी जा सकती है, जिससे भुगतान में अनावश्यक देरी की संभावना कम हो जाती है।
देर करने वाली बीमा कंपनियों पर लगेगा 12% जुर्माना
सरकार ने खरीफ 2024 से नया प्रावधान लागू किया है। यदि कोई बीमा कंपनी तय समय के भीतर किसानों का दावा नहीं चुकाती है, तो उस पर 12 प्रतिशत की पेनल्टी अपने आप लागू हो जाएगी। इस कदम का उद्देश्य किसानों को समय पर उनका हक दिलाना है।
राज्य सरकारों के लिए भी बने सख्त नियम
अब सिर्फ बीमा कंपनियां ही नहीं, बल्कि राज्य सरकारों को भी समयसीमा का पालन करना होगा। खरीफ 2025 से यदि कोई राज्य सरकार अपने हिस्से की प्रीमियम सब्सिडी जारी करने में देरी करती है, तो उस पर भी 12 प्रतिशत जुर्माना लगाया जाएगा।
एस्क्रो खाते की व्यवस्था हुई अनिवार्य
बीमा योजना के लिए धन की उपलब्धता समय पर सुनिश्चित करने के उद्देश्य से खरीफ 2025 से सभी राज्य सरकारों के लिए एस्क्रो (ESCROW) खाता खोलना अनिवार्य कर दिया गया है। इस खाते में राज्य सरकारों को अपने प्रीमियम हिस्से की राशि पहले से जमा करनी होगी, ताकि भुगतान प्रक्रिया बीच में न रुके।
केंद्र और राज्य की सब्सिडी होगी अलग-अलग ट्रैक
सरकार ने प्रीमियम सब्सिडी की व्यवस्था में भी बदलाव किया है। अब केंद्र सरकार का प्रीमियम हिस्सा राज्य सरकार के हिस्से से अलग रखा जाएगा। इससे यदि किसी राज्य की ओर से देरी होती है, तब भी किसानों के दावों के अनुपातिक भुगतान की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ाई जा सकेगी और उन्हें लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
अब मोबाइल ऐप से होगी फसल नुकसान की जांच, खेत पर ही तैयार होगी पूरी रिपोर्ट
फसल नुकसान का आकलन पहले से ज्यादा तेज और पारदर्शी बनाने के लिए केंद्र सरकार ने क्रॉप लॉस असेसमेंट ऐप (CLAP) तैयार किया है। इस डिजिटल ऐप के जरिए अधिकारी सीधे खेत पर पहुंचकर नुकसान का रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे। इससे सर्वे प्रक्रिया आसान होगी और किसानों के बीमा दावों के निपटान में भी तेजी आने की उम्मीद है।
एक-एक खेत का डिजिटल रिकॉर्ड होगा तैयार
CLAP ऐप की मदद से अब केवल अनुमान के आधार पर नहीं, बल्कि हर खेत का अलग-अलग निरीक्षण किया जाएगा। इस ऐप के जरिए स्थानीय प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान का आकलन, खेत स्तर पर फसल की स्थिति का रिकॉर्ड और कटाई के बाद हुए नुकसान का डिजिटल दस्तावेज तैयार किया जाएगा। इससे नुकसान का प्रमाण जुटाने में आसानी होगी और पूरी प्रक्रिया अधिक भरोसेमंद बनेगी।
देशभर में ऐप का इस्तेमाल हुआ अनिवार्य
सरकार ने इस नई व्यवस्था को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू करने का फैसला किया है। अब फसल नुकसान के आकलन के दौरान CLAP ऐप का उपयोग अनिवार्य होगा, ताकि पूरे देश में एक समान और तकनीक आधारित सर्वे प्रणाली अपनाई जा सके। इससे किसानों को बीमा दावा प्रक्रिया में पारदर्शिता और समय पर भुगतान मिलने में मदद मिलेगी।
CCE Agri App से बदलेगी फसल कटाई की प्रक्रिया, अब पूरा रिकॉर्ड होगा ऑनलाइन
फसल कटाई प्रयोग (Crop Cutting Experiment-CCE) को अधिक सटीक और तेज बनाने के लिए सरकार CCE Agri App का इस्तेमाल बढ़ा रही है। अब खेतों से जुड़े आंकड़े कागजी प्रक्रिया के बजाय सीधे इस मोबाइल ऐप पर दर्ज किए जाएंगे। इससे डेटा जुटाने में लगने वाला समय कम होगा और पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बन सकेगी।
डेटा होगा ज्यादा सटीक, गलतियों की गुंजाइश होगी कम
CCE Agri App के जरिए फसल कटाई से जुड़े आंकड़े तुरंत डिजिटल रूप में दर्ज किए जा सकेंगे। इससे मैनुअल एंट्री के दौरान होने वाली गलतियां कम होंगी और उपज का वैज्ञानिक तरीके से आकलन करना आसान होगा। यही नहीं, सही और समय पर उपलब्ध डेटा की मदद से किसानों के बीमा दावों का निपटारा भी पहले की तुलना में तेज किया जा सकेगा।
तकनीक के भरोसे बदल रही फसल बीमा योजना
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सैटेलाइट मॉनिटरिंग, WINDS, YES-TECH, DigiClaim, राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल (NCIP), CLAP App और CCE Agri App जैसी आधुनिक तकनीकों का लगातार विस्तार किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य फसल नुकसान का निष्पक्ष आकलन करना, किसानों तक मौसम से जुड़ी सटीक जानकारी पहुंचाना और बीमा दावों का भुगतान बिना अनावश्यक देरी के सुनिश्चित करना है।
किसानों को मिल सकती है ज्यादा पारदर्शी और भरोसेमंद व्यवस्था
इन नई डिजिटल व्यवस्थाओं के लागू होने से आने वाले समय में फसल बीमा प्रक्रिया पहले से अधिक तेज, पारदर्शी और विश्वसनीय बनने की उम्मीद है। यदि तकनीकों का प्रभावी तरीके से इस्तेमाल होता है, तो किसानों को नुकसान का सही आकलन मिलने के साथ-साथ बीमा राशि भी समय पर प्राप्त हो सकेगी, जिससे खेती से जुड़े जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) में क्या नए बदलाव किए गए हैं?
सरकार ने योजना में AI, सैटेलाइट इमेजिंग, रिमोट सेंसिंग, WINDS, YES-TECH, DigiClaim, NCIP, CLAP App और CCE Agri App जैसी आधुनिक तकनीकों को शामिल किया है, ताकि फसल नुकसान का आकलन अधिक सटीक और पारदर्शी हो सके।
WINDS (Weather Information Network and Data System) क्या है?
WINDS एक मौसम डेटा नेटवर्क है, जिसके तहत ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन (AWS) और ऑटोमैटिक रेन गेज (ARG) लगाए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य किसानों को स्थानीय स्तर पर सटीक मौसम की जानकारी उपलब्ध कराना है।
YES-TECH का फसल बीमा में क्या उपयोग है?
YES-TECH रिमोट सेंसिंग आधारित तकनीक है, जिसका उपयोग फसल की वास्तविक उपज का वैज्ञानिक आकलन करने के लिए किया जाता है। इससे उपज के आंकड़ों की विश्वसनीयता बढ़ती है।
CLAP App क्या है और इससे किसानों को क्या फायदा होगा?
CLAP (Crop Loss Assessment App) के जरिए खेत स्तर पर फसल नुकसान का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाता है। इससे स्थानीय आपदा और कटाई के बाद हुए नुकसान का सही आकलन कर बीमा दावा प्रक्रिया को तेज बनाया जा सकता है।
CCE Agri App क्या काम करता है?
CCE Agri App के माध्यम से फसल कटाई प्रयोग (Crop Cutting Experiment) का डेटा डिजिटल रूप से एकत्र किया जाता है। इससे डेटा संग्रहण तेज होता है, मानवीय त्रुटियां कम होती हैं और बीमा क्लेम का निपटारा जल्दी हो सकता है।
DigiClaim मॉड्यूल क्या है?
DigiClaim एक डिजिटल भुगतान प्रणाली है, जो NCIP, PFMS और बीमा कंपनियों को आपस में जोड़ती है। इसके माध्यम से बीमा दावा स्वीकृत होने पर राशि सीधे किसान के बैंक खाते में भेजी जाती है।
बीमा कंपनियों के लिए नया जुर्माना नियम क्या है?
खरीफ 2024 से यदि कोई बीमा कंपनी तय समय पर दावा राशि का भुगतान नहीं करती है, तो उस पर 12% की पेनल्टी लागू की जाती है।
राज्य सरकारों पर 12% जुर्माना कब लगाया जाएगा?
खरीफ 2025 से यदि कोई राज्य सरकार अपने हिस्से की प्रीमियम सब्सिडी समय पर जारी नहीं करती है, तो उस पर भी 12% जुर्माना लगाया जाएगा।
NCIP (National Crop Insurance Portal) क्या है?
NCIP प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का केंद्रीय डिजिटल पोर्टल है, जहां बीमा से जुड़ी सभी प्रमुख प्रक्रियाओं और डेटा का प्रबंधन किया जाता है।
10. नई तकनीकों से किसानों को सबसे बड़ा फायदा क्या होगा?
नई तकनीकों के उपयोग से फसल नुकसान का अधिक सटीक आकलन होगा, मौसम की बेहतर जानकारी मिलेगी, बीमा दावों का निपटारा तेजी से होगा और किसानों को समय पर बीमा राशि मिलने की संभावना बढ़ेगी।
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