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नई दिल्ली, 01 अगस्त 2026। Weed Management in Paddy: खरीफ सीजन में धान की सीधी बुवाई (Direct Seeded Rice) तेजी से लोकप्रिय हो रही है, क्योंकि इससे मजदूरी की लागत कम होती है और रोपाई की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन इस तकनीक की सबसे बड़ी चुनौती है खरपतवार (Weeds)। यदि शुरुआती दिनों में खरपतवार पर नियंत्रण नहीं किया गया तो यह पौधों से पानी, पोषक तत्व और धूप छीन लेते हैं, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है।

इसी को ध्यान में रखते हुए ICAR-CRRI (भारतीय धान अनुसंधान संस्थान) ने निचली भूमि (Low-land) में सीधी बुवाई वाले धान के लिए नई सलाह जारी की है। संस्थान का कहना है कि खेत की नमी, जलभराव और खरपतवार की अवस्था को देखकर सही समय पर शाकनाशी या अन्य प्रबंधन तकनीक अपनाने से फसल मजबूत होती है और पैदावार भी बेहतर मिलती है। कृषि से जुड़ी ऐसी ही नई जानकारी के लिए किसान भाइयों Bihar Agro को विजिट करें।
धान की शुरुआती बढ़वार में क्यों बन जाता है खरपतवार सबसे बड़ा दुश्मन?
Weed Management in Paddy: धान की सीधी बुवाई के बाद शुरुआती 15 से 25 दिन बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इसी दौरान खरपतवार तेजी से बढ़ते हैं और धान के छोटे पौधों से पहले पोषक तत्वों पर कब्जा कर लेते हैं।
यदि इस समय नियंत्रण नहीं किया गया तो—
- पौधों की बढ़वार धीमी पड़ जाती है।
- जड़ों का विकास कमजोर हो जाता है।
- पौधों की संख्या कम हो सकती है।
- अंत में उपज में 30 से 70 प्रतिशत तक नुकसान होने की संभावना रहती है।
यही कारण है कि विशेषज्ञ शुरुआत से ही Weed Management in Paddy पर विशेष ध्यान देने की सलाह देते हैं।
ICAR-CRRI ने बताया कौन-सा शाकनाशी कब करें इस्तेमाल
Weed Management in Paddy: संस्थान ने किसानों को सलाह दी है कि खरपतवार की स्थिति देखकर उचित शाकनाशी का चयन करें।
पहला विकल्प
यदि खेत में खरपतवार 2 से 3 पत्ती की अवस्था में हों तो
- बिसपायरीबैक सोडियम 10% SC
- मात्रा – 120 मिली प्रति एकड़
का छिड़काव करना प्रभावी माना गया है।
इसका समय पर उपयोग करने से खरपतवार की शुरुआती बढ़वार रुक जाती है और धान के पौधों को पर्याप्त पोषण मिलता है।
15 से 20 दिन बाद अपनाया जा सकता है यह दूसरा विकल्प
यदि खेत की स्थिति अनुकूल हो और मिट्टी में पर्याप्त नमी मौजूद हो तो किसान
- फेनॉक्साप्रॉप-पी-एथिल
- एथॉक्सीसल्फ्यूरॉन
का टैंक मिक्स तैयार करके बुवाई के लगभग 15 से 20 दिन बाद प्रयोग कर सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार यह मिश्रण कई प्रकार के घास एवं चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों को नियंत्रित करने में मदद करता है।
जहां शाकनाशी नहीं डाला गया, वहां अपनाएं ब्यूशेनिंग तकनीक
हर किसान खरपतवारनाशी का उपयोग नहीं करता। ऐसे खेतों के लिए भी ICAR-CRRI ने विकल्प सुझाया है।
यदि खेत में 7 से 10 सेंटीमीटर तक पानी जमा हो गया हो और पहले किसी प्रकार का शाकनाशी नहीं डाला गया हो, तो ब्यूशेनिंग (Bushening) करना लाभदायक रहेगा।
इस प्रक्रिया से खरपतवार कमजोर पड़ते हैं और धान के पौधों को बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है।
ब्यूशेनिंग के बाद यूरिया की सही मात्रा जानना भी जरूरी
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार केवल खरपतवार हटाना ही पर्याप्त नहीं है। उसके बाद पौधों को आवश्यक पोषण देना भी जरूरी होता है।
अर्ध-गहरे और गहरे जल वाले क्षेत्र
- 18 किलोग्राम यूरिया प्रति एकड़
वर्षा आधारित उथले क्षेत्र
- 36 किलोग्राम यूरिया प्रति एकड़
संतुलित पोषण मिलने से पौधे तेजी से बढ़ते हैं और खरपतवार से मुकाबला करने की क्षमता भी बढ़ जाती है।
समन्वित खरपतवार प्रबंधन से मिलेगा बेहतर उत्पादन
कृषि विशेषज्ञ केवल दवा पर निर्भर रहने की सलाह नहीं देते। बेहतर परिणाम के लिए Integrated Weed Management अपनाना अधिक लाभदायक माना जाता है।
इसके तहत किसान—
- समय पर निराई करें।
- खेत की नमी पर नजर रखें।
- संतुलित उर्वरक दें।
- आवश्यकता अनुसार शाकनाशी का प्रयोग करें।
- खेत में अधिक खरपतवार होने पर यांत्रिक निराई भी करें।
इन सभी उपायों को मिलाकर अपनाने से फसल स्वस्थ रहती है और उत्पादन में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलता है।
किसानों के लिए सबसे जरूरी सलाह
धान की सीधी बुवाई में सफलता केवल अच्छी किस्म या उर्वरक पर निर्भर नहीं करती, बल्कि शुरुआती Weed Management in Paddy पर भी उतनी ही निर्भर करती है।
यदि किसान पहले 20 दिनों के भीतर खरपतवार पर प्रभावी नियंत्रण कर लेते हैं और बाद में संतुलित पोषण उपलब्ध कराते हैं, तो पौधों की बढ़वार मजबूत होती है, खरपतवार का दबाव कम रहता है और बेहतर उत्पादन मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
इसलिए मौसम, खेत की नमी और खरपतवार की स्थिति को देखते हुए सही समय पर उचित तकनीक अपनाना ही सबसे समझदारी भरा कदम होगा।
FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
धान में खरपतवार नियंत्रण का सबसे सही समय कौन-सा है?
धान की सीधी बुवाई के बाद शुरुआती 15–20 दिन खरपतवार नियंत्रण के लिए सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
Bispyribac Sodium का उपयोग कब करना चाहिए?
जब खरपतवार 2–3 पत्ती की अवस्था में हों, तब 120 मिली प्रति एकड़ की अनुशंसित मात्रा में इसका प्रयोग किया जा सकता है।
लो-लैंड डायरेक्ट सीडेड राइस में कौन-सा शाकनाशी बेहतर है?
ICAR-CRRI ने बिसपायरीबैक सोडियम तथा फेनॉक्साप्रॉप-पी-एथिल + एथॉक्सीसल्फ्यूरॉन टैंक मिक्स की सलाह दी है।
ब्यूशेनिंग क्या होती है?
यह एक यांत्रिक खरपतवार नियंत्रण तकनीक है, जिसे जलभराव वाले खेतों में अपनाया जाता है।
ब्यूशेनिंग के बाद कितना यूरिया देना चाहिए?
अर्ध-गहरे एवं गहरे क्षेत्रों में 18 किग्रा तथा वर्षा आधारित उथले क्षेत्रों में 36 किग्रा यूरिया प्रति एकड़ देने की सलाह है।
खरपतवार से धान की उपज कितनी कम हो सकती है?
यदि समय पर नियंत्रण न किया जाए तो उत्पादन में 30–70% तक कमी आ सकती है।
Direct Seeded Rice में खरपतवार की समस्या अधिक क्यों होती है?
क्योंकि रोपाई नहीं होती और शुरुआती अवस्था में खरपतवार धान के पौधों के साथ तेजी से बढ़ते हैं।
Integrated Weed Management क्या है?
यह ऐसी तकनीक है जिसमें शाकनाशी, निराई-गुड़ाई, जल प्रबंधन और संतुलित पोषण को मिलाकर खरपतवार नियंत्रण किया जाता है।
Weed Management in Paddy: लो-लैंड डायरेक्ट सीडेड धान के किसानों के लिए ICAR-CRRI की नई सलाह, शुरुआती 20 दिन सबसे अहम
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