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किसान भाइयों, आज के समय में आम की जैविक खेती (Organic Mango Farming) न सिर्फ सेहत के लिए फायदेमंद है, बल्कि बाजार में इसकी मांग और कीमत दोनों तेजी से बढ़ रही हैं। इस खेती में रासायनिक खादों और कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया जाता, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और फल का स्वाद बेहतर होता है। अगर आप कम लागत में लंबे समय तक मुनाफा चाहते हैं, तो यह खेती आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प बन सकती है। जैविक आम को अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी प्रीमियम रेट पर बेचा जा सकता है।
इस लेख उद्देश्य किसानों को अच्छी पैदावार और ज्यादा मुनाफा देना है। अगर ये लेख आपको पसंद आया तो इस लेख को ज्यादा से ज्यादा किसान भाइयों को शेयर करें जिससे ज्यादा से ज्यादा किसान भाई लाभ ले सकें।
आम की जैविक खेती क्या है? (What is Organic Mango Farming)

आम की जैविक खेती (Organic Mango Farming) वह पद्धति है जिसमें आम के बागान में रासायनिक खाद, कीटनाशक और हार्मोन का उपयोग नहीं किया जाता। इसकी जगह गोबर की खाद, वर्मी कम्पोस्ट, जीवामृत, नीम खली और जैविक कीटनाशक इस्तेमाल होते हैं। इससे मिट्टी की सेहत बनी रहती है और फल की गुणवत्ता बेहतर होती है। जैविक आम का स्वाद, सुगंध और शेल्फ लाइफ (storage life) सामान्य आम से अधिक होती है, इसलिए बाजार में इसकी कीमत भी ज्यादा मिलती है।
जलवायु और मिट्टी का चयन (Climate & Soil Selection)
आम की जैविक खेती (Organic Mango Farming) के लिए गर्म और उपोष्ण जलवायु सबसे उपयुक्त मानी जाती है। 24°C से 35°C तापमान आम के विकास के लिए आदर्श होता है। जहां वार्षिक वर्षा लगभग 75–250 सेमी हो, वहाँ आम की पैदावार बहुत अच्छी होती है। अच्छी जल निकास वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सर्वोत्तम रहती है। मिट्टी का pH मान 5.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए। खेत में पानी भराव की स्थिति नहीं होनी चाहिए, क्योंकि इससे जड़ सड़न का खतरा बढ़ जाता है।
पौध रोपण और दूरी (Plantation & Spacing)
जैविक आम की खेती में स्वस्थ और रोगमुक्त ग्राफ्टेड पौधों का चयन जरूरी है। पौध रोपण का सही समय जुलाई–अगस्त या फरवरी–मार्च होता है। पौधों की दूरी 10×10 मीटर रखना बेहतर रहता है, जिससे पेड़ों को भरपूर धूप और हवा मिल सके। रोपण से पहले गड्ढों में गोबर की खाद और नीम खली मिलाने से शुरुआती वृद्धि तेज होती है। यह तरीका आम की जैविक खेती (Organic Mango Farming) को मजबूत आधार देता है।
आम की प्रसिद्ध किस्में (Popular Varieties of Mango)
भारत में आम की कई मशहूर किस्में हैं जो जैविक खेती के लिए उपयुक्त हैं — जैसे दशहरी, अल्फांसो, लंगड़ा, केसर और अमरापली। इन किस्मों की पैदावार अधिक, स्वाद उत्तम और बाजार में मांग सबसे ज्यादा होती है। जैविक खेती में इन किस्मों का चयन जलवायु और क्षेत्र की स्थिति देखकर करें, ताकि गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बेहतर रहें।
सिंचाई और जल प्रबंधन (Irrigation and Water Management)
आम के बगीचे में ड्रिप सिंचाई सबसे उपयुक्त मानी जाती है। शुरुआती 3-5 साल पेड़ों को नियमित जल की जरूरत होती है, लेकिन फल आने के समय अधिक सिंचाई से परहेज करें। सूखे के मौसम में जैविक मल्चिंग (सूखी पत्तियों या गोबर की खाद से) नमी बनाए रखने में मदद करती है। जैविक खेती में पानी की बचत और मिट्टी की संरचना दोनों का ध्यान रखना जरूरी होता है।
जैविक खाद और पोषण प्रबंधन (Organic Manure & Nutrition)

आम की जैविक खेती (Organic Mango Farming) में पोषण प्रबंधन सबसे अहम भूमिका निभाता है। गोबर की सड़ी खाद, वर्मी कम्पोस्ट, नीम खली, जीवामृत और घन जीवामृत जैसे प्राकृतिक पोषक तत्वों का इस्तेमाल किया जाता है और इसका नियमित उपयोग पेड़ों की वृद्धि और फलन बढ़ाता है। साल में 2–3 बार (लगभग 20–25 किलो गोबर की खाद) जैविक खाद देने से मिट्टी में सूक्ष्म जीव (beneficial microbes) सक्रिय रहते हैं। जैविक पोषक तत्व मिट्टी की संरचना सुधारते हैं और पेड़ की जड़ों को मजबूती प्रदान करते हैं। इससे आम का आकार, रंग और मिठास बेहतर होती है। national horticulture board
जैविक कीट व रोग नियंत्रण (Organic Pest & Disease Control)
जैविक आम की खेती (Organic Mango Farming) में रोग और कीट नियंत्रण के लिए नीम तेल, दशपर्णी अर्क, ट्राइकोडर्मा गौमूत्र आधारित घोल और छाछ का छिड़काव जैसे जैविक उपाय अपनाए जाते हैं। इससे पर्यावरण सुरक्षित रहता है और फल में कोई रासायनिक अवशेष नहीं होता। समय-समय पर बाग का निरीक्षण करना जरूरी है। पौधों में फफूंद, सूंडी या फल मक्खी जैसी समस्याएं दिखें तो नीम के अर्क का 5% घोल 15 दिन के अंतराल पर छिड़कें। सही जैविक प्रबंधन से आम की जैविक खेती (Organic Mango Farming) लंबे समय तक टिकाऊ रहती है।
निष्कर्ष (Conclusion)
अंत में, आम की जैविक खेती (Organic Mango Farming) केवल पैसे कमाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों को जहरमुक्त भोजन और स्वच्छ पर्यावरण देने की एक मुहीम है। थोड़ी मेहनत और धैर्य के साथ, किसान भाई इस विधि को अपनाकर अपनी तकदीर बदल सकते हैं। जैविक अपनाएं, खुशहाली लाएं।

FAQs: आम की जैविक खेती (Organic Mango Farming) से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
आम की जैविक खेती (Organic Mango Farming) शुरू करने के लिए मिट्टी का चुनाव कैसे करें?
जैविक खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है। मिट्टी का पीएच (pH) मान 6.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए। खेती शुरू करने से पहले मिट्टी की जांच जरूर कराएं और उसमें रसायनों के प्रभाव को कम करने के लिए हरी खाद या ढैंचा का प्रयोग करें।
क्या जैविक आम को पकाने के लिए कार्बाइड का उपयोग किया जा सकता है?
बिल्कुल नहीं। आम की जैविक खेती (Organic Mango Farming) के नियमों के अनुसार कार्बाइड का उपयोग वर्जित और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। जैविक आम को पकाने के लिए आप एथिलीन राइपनिंग चैंबर, सूखी घास/भूसे में दबाकर या लकड़ी के बक्सों में प्राकृतिक तरीके से पका सकते हैं।
आम की जैविक खेती (Organic Mango Farming) के लिए प्रमाणीकरण (Certification) कैसे लें?
भारत में जैविक प्रमाणीकरण के लिए आपको ‘एपीडा’ (APEDA) द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थाओं में पंजीकरण कराना होता है। इसके लिए NPOP (National Programme for Organic Production) के मानकों का पालन करना पड़ता है। लगातार 3 साल तक जैविक मानकों पर खरे उतरने के बाद आपके बाग को पूर्णतः ‘जैविक’ घोषित कर दिया जाता है।
जैविक बागवानी में आम के भुनगा कीट (Mango Hopper) को कैसे रोकें?
जैविक विधि में भुनगा कीट को रोकने के लिए नीम के तेल (10,000 PPM) का छिड़काव सबसे प्रभावी है। इसके अलावा, आप दशपर्णी अर्क या नीम के काढ़े का 15-15 दिनों के अंतराल पर छिड़काव कर सकते हैं। बाग में साफ-सफाई रखना और कीटों के प्राकृतिक शत्रुओं (मित्र कीटों) को बढ़ावा देना भी जरूरी है।
क्या जैविक खेती में आम की पैदावार रासायनिक खेती से कम होती है?
शुरुआती 1-2 वर्षों में पैदावार में थोड़ी कमी आ सकती है क्योंकि मिट्टी रसायनों से मुक्त हो रही होती है। लेकिन 3 साल बाद, आम की जैविक खेती (Organic Mango Farming) में पैदावार स्थिर हो जाती है और फलों की गुणवत्ता, स्वाद व चमक रासायनिक फलों से कहीं बेहतर होती है, जिससे आपको बाजार में अधिक कीमत मिलती है।