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देश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बदल रहा है। छत्तीसगढ़ में चक्रवात के संभावित प्रभाव को देखते हुए किसानों के लिए कृषि मौसम संबंधी विशेष एडवाइजरी जारी की गई है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मौसम विज्ञान विभाग ने किसानों को बारिश और तेज हवाओं से फसलों को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए पहले से तैयारी करने की सलाह दी है।

इस एडवाइजरी में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसानों को फिलहाल गेहूं, चना और मसूर जैसी रबी फसलों की बुआई जल्दबाजी में नहीं करने को कहा गया है। मौसम की स्थिति सामान्य होने पर नवंबर के पहले सप्ताह से बुआई शुरू करना बेहतर रहेगा।
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, तेज बारिश के कारण खेतों में पानी भर सकता है। इससे नए लगाए गए बीजों के सड़ने, अंकुरण प्रभावित होने और खड़ी फसलों के गिरने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए किसानों को मौसम साफ होने तक खेती के जरूरी काम सावधानी से करने चाहिए।
आइए जानते हैं कि चक्रवात के संभावित असर को देखते हुए किसानों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और अपनी फसल, अनाज तथा पशुधन को कैसे सुरक्षित रखना है।
Cyclone Alert Advisory Wheat Gram Sowing Crop Safety: किसानों के लिए क्यों जरूरी है यह चेतावनी?
चक्रवात के दौरान केवल तेज हवाएं ही नुकसान नहीं पहुंचातीं, बल्कि लगातार बारिश और खेतों में जलभराव भी किसानों की परेशानी बढ़ा सकता है। खासकर रबी सीजन की शुरुआत में खेत तैयार करने और बुआई करने वाले किसानों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मौसम विज्ञान विभाग ने इसी खतरे को ध्यान में रखते हुए किसानों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए हैं।
इस समय खेतों में नमी का स्तर, जल निकासी और मौसम की स्थिति खेती के फैसलों को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में बिना मौसम का पूर्वानुमान देखे बुआई करना किसानों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। किसानों को सलाह है कि वे स्थानीय मौसम की जानकारी लेते रहें और कृषि विभाग के निर्देशों के अनुसार ही खेती से जुड़े काम करें।

गेहूं, चना और मसूर की बुआई पर लगा ब्रेक, नवंबर में करें शुरुआत
रबी सीजन की तैयारियों में जुटे किसानों के लिए सबसे जरूरी सलाह बुआई को लेकर है। कृषि विश्वविद्यालय ने फिलहाल गेहूं, चना और मसूर की बुआई टालने की सलाह दी है।
दरअसल, बारिश होने पर खेतों में जरूरत से ज्यादा नमी जमा हो सकती है। ऐसी स्थिति में बीजों का अंकुरण प्रभावित हो सकता है। कुछ परिस्थितियों में बीज सड़ने और पौधों की शुरुआती बढ़वार कमजोर होने का खतरा भी रहता है। इसलिए किसानों को जल्दबाजी करने के बजाय मौसम साफ होने का इंतजार करना चाहिए।
किसानों को क्या करना चाहिए?
- गेहूं, चना और मसूर की बुआई फिलहाल टालें।
- मौसम सामान्य होने के बाद नवंबर के पहले सप्ताह से बुआई शुरू करने पर विचार करें।
- खेत की मिट्टी में नमी की स्थिति जांचें।
- जलभराव वाले खेतों में बुआई करने से बचें।
- अपने क्षेत्र के कृषि विशेषज्ञ से स्थानीय सलाह जरूर लें।
ध्यान रखें कि बुआई का सही समय फसल की किस्म, क्षेत्र और स्थानीय मौसम के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
खेतों में पानी भरने से पहले करें जल निकासी की तैयारी
बारिश के दौरान खेतों में पानी जमा होना किसानों के लिए बड़ी समस्या बन सकता है। खासकर निचले इलाकों और भारी मिट्टी वाले खेतों में जलभराव लंबे समय तक बना रह सकता है। इससे फसलों की जड़ों तक ऑक्सीजन पहुंचने में परेशानी होती है और पौधों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है।
किसानों को चाहिए कि वे खेतों की मेड़ों और नालियों की जांच कर लें। जहां पानी जमा होने की आशंका है, वहां पहले से निकासी की व्यवस्था करें। खेत के आसपास बनी नालियों में मिट्टी, खरपतवार और कचरा जमा हो तो उसे साफ कर दें। इससे बारिश का पानी आसानी से बाहर निकल सकेगा।
तेज हवाओं के कारण लंबी फसलों के गिरने की आशंका भी रहती है। इसलिए खेतों की स्थिति पर नजर रखें और जरूरत के अनुसार फसल को सहारा देने की व्यवस्था करें।
पकी फसल और अनाज को बचाने के लिए अपनाएं ये तरीके
अगर आपके खेत में कोई फसल पककर तैयार हो चुकी है, तो उसे लंबे समय तक खेत में छोड़ना जोखिम भरा हो सकता है। तेज बारिश और हवाओं से फसल गिर सकती है। इससे कटाई में परेशानी के साथ अनाज की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है।
इसलिए जिन फसलों की कटाई या तुड़ाई पूरी हो चुकी है, उनकी उपज को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की व्यवस्था करें।
अनाज भंडारण के लिए जरूरी सावधानियां:
- अनाज को बारिश से बचाने के लिए तिरपाल या मजबूत कवर से ढकें।
- भंडारण से पहले अनाज को अच्छी तरह सुखाएं।
- अनाज को साफ और हवादार स्थान पर रखें।
- गोदाम की छत और फर्श में पानी आने की संभावना जांचें।
- बीजों को नमी और कीटों से सुरक्षित रखें।
- भंडारण स्थल के आसपास पानी जमा न होने दें।
किसानों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि गीले अनाज को बंद जगह पर रखने से फफूंद लगने और गुणवत्ता खराब होने का खतरा बढ़ जाता है।
कीटनाशक और खरपतवारनाशक का छिड़काव अभी रोकें
मौसम खराब होने के दौरान खेतों में कीटनाशक और खरपतवारनाशक का छिड़काव करने से बचना चाहिए। बारिश होने पर दवाओं का असर कम हो सकता है। तेज हवा में छिड़काव करने से दवा दूसरी फसलों या आसपास के क्षेत्रों में भी जा सकती है।
इसलिए मौसम साफ होने तक छिड़काव रोकने की सलाह दी गई है। बारिश के बाद खेतों में कीट और बीमारियों की निगरानी जरूर करें। यदि किसी फसल में रोग के लक्षण दिखाई देते हैं, तो बिना जानकारी के दवा का इस्तेमाल न करें।
कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही सही दवा और उसकी उचित मात्रा का चयन करें।
सब्जी किसानों के लिए भी जारी हुई जरूरी एडवाइजरी
चक्रवात का असर केवल अनाज वाली फसलों पर ही नहीं पड़ता, बल्कि सब्जियों और बागवानी फसलों को भी नुकसान पहुंच सकता है। फूलगोभी, ब्रोकोली, चुकंदर और पत्तागोभी जैसी रबी सब्जियों की बुआई और रोपाई नवंबर के पहले सप्ताह से शुरू करने की सलाह दी गई है। जिन किसानों के खेतों में सब्जियां और फल पककर तैयार हो चुके हैं, उन्हें मौसम खराब होने से पहले कटाई और तुड़ाई की व्यवस्था करनी चाहिए।
बेल वाली सब्जियों को दें मजबूत सहारा
- करेला, लौकी और दूसरी बेल वाली सब्जियों की खेती करने वाले किसानों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
- तेज हवा के कारण बेलों के मचान और सहारे टूट सकते हैं। इससे पौधों को नुकसान हो सकता है।
- ऐसे में किसानों को मचान की मजबूती जांचनी चाहिए और कमजोर सहारों को ठीक करना चाहिए।
केले की फसल में अपनाएं यह तरीका
- जिन केले के पौधों में फूल या फल आ रहे हैं, उन्हें बांस के सहारे से मजबूती दें। तेज हवाओं में ऐसे पौधों के गिरने की आशंका अधिक रहती है।
- बागवानी फसलों में खाद डालने का काम भी मौसम सामान्य होने के बाद ही करें। खेतों में पानी जमा होने से बचाएं।
बारिश के बाद आलू और दूसरी फसलों में बढ़ सकता है रोग का खतरा
बारिश और नमी बढ़ने के बाद कुछ फसलों में बीमारियों का प्रकोप बढ़ सकता है। खासकर आलू की फसल में झुलसा रोग का खतरा किसानों की चिंता बढ़ा सकता है। इसके अलावा दूसरी सब्जियों और खेतों की फसलों में भी नमी के कारण रोग फैलने की आशंका रहती है।
इसलिए बारिश के बाद खेतों का नियमित निरीक्षण करें। पत्तियों पर धब्बे, सड़न, असामान्य पीलापन या दूसरे रोग के लक्षण दिखाई देने पर कृषि विशेषज्ञ से संपर्क करें। किसी भी बीमारी की पुष्टि किए बिना कीटनाशक या फफूंदनाशक का छिड़काव न करें। सही पहचान के बाद ही उचित उपचार करें।

पशुपालक भी रहें सतर्क, बारिश और तेज हवाओं से बचाएं मवेशी
चक्रवात के दौरान किसानों के साथ पशुपालकों को भी सावधानी बरतनी चाहिए। तेज हवाएं, बारिश और बिजली गिरने की घटनाएं पशुओं के लिए खतरनाक हो सकती हैं।
पशुओं को खुले मैदान में छोड़ने के बजाय सुरक्षित और सूखे स्थान पर रखें।
पशुओं की सुरक्षा के लिए जरूरी उपाय:
- पशुओं को मजबूत और सुरक्षित शेड में रखें।
- तेज हवा और बिजली गिरने के दौरान पेड़ों के नीचे न बांधें।
- उनके लिए साफ पीने के पानी की व्यवस्था करें।
- सूखा चारा और पशु आहार सुरक्षित स्थान पर रखें।
- चारे को बारिश के पानी से बचाएं।
- पशुओं के रहने की जगह को साफ और सूखा रखें।
अगर कोई पशु सुस्त दिखाई दे, खाना कम कर दे, दस्त से परेशान हो या सांस लेने में परेशानी हो, तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें।
मौसम साफ होने तक खेती के काम में न करें जल्दबाजी
कृषि मौसम विज्ञान विभाग की एडवाइजरी का मुख्य उद्देश्य किसानों को संभावित नुकसान से पहले ही सतर्क करना है। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे मौसम का पूर्वानुमान देखकर ही खेतों में काम करें। तेज बारिश, आंधी और बिजली गिरने के दौरान खेतों में जाने से बचें।
इसके अलावा कृषि उपज और बीजों को सुरक्षित रखने के लिए पहले से व्यवस्था करें।
किसानों के लिए 7 जरूरी सावधानियां एक नजर में:
- गेहूं, चना और मसूर की बुआई मौसम सामान्य होने तक टालें।
- नवंबर के पहले सप्ताह से स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार बुआई की तैयारी करें।
- खेतों में पानी निकासी की व्यवस्था दुरुस्त रखें।
- पकी फसलों की कटाई और उपज का सुरक्षित भंडारण करें।
- मौसम साफ होने तक कीटनाशक और खरपतवारनाशक का छिड़काव न करें।
- सब्जियों, केले और बागवानी फसलों को तेज हवाओं से बचाएं।
- पशुओं को सुरक्षित स्थान पर रखकर चारा और पानी की व्यवस्था करें।
किसानों के लिए जरूरी संदेश: थोड़ी सावधानी बचा सकती है पूरी फसल
चक्रवात के संभावित प्रभाव को देखते हुए किसानों को इस समय सबसे ज्यादा ध्यान मौसम की जानकारी, खेतों में जल निकासी और फसल सुरक्षा पर देना चाहिए। गेहूं, चना और मसूर की बुआई में जल्दबाजी करने के बजाय मौसम सामान्य होने का इंतजार करना बेहतर रहेगा। वहीं जिन किसानों की फसल तैयार है, उन्हें कटाई और भंडारण की व्यवस्था समय रहते कर लेनी चाहिए।
याद रखें, खेती में सही समय पर लिया गया छोटा फैसला भी बड़े नुकसान से बचा सकता है।
किसान भाई अपने जिले के मौसम पूर्वानुमान और कृषि विभाग की ताजा सलाह पर नजर रखें। मौसम से जुड़ी खेती-किसानी की ऐसी ही जरूरी खबरों के लिए Bihar Agro से जुड़े रहें।
ये भी पढ़ें: गेहूं की बुवाई में देर न करें! बुंदेलखंड के किसानों के लिए 6 उन्नत किस्मों और बेहतर पैदावार
Cyclone Alert से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल
चक्रवात की चेतावनी के दौरान गेहूं की बुआई कब करनी चाहिए?
कृषि विश्वविद्यालय की जारी एडवाइजरी के अनुसार, मौसम सामान्य होने के बाद नवंबर के पहले सप्ताह से गेहूं की बुआई शुरू करने की सलाह दी गई है। स्थानीय मौसम और मिट्टी की स्थिति भी जांचें।
क्या चक्रवात के दौरान चना और मसूर की बुआई करनी चाहिए?
फिलहाल चना और मसूर की बुआई टालने की सलाह दी गई है। बारिश और जलभराव से बीजों के अंकुरण पर असर पड़ सकता है।
बारिश से गेहूं और चने की फसल को क्या नुकसान हो सकता है?
अधिक बारिश और खेतों में जलभराव से बीज सड़ सकते हैं, अंकुरण प्रभावित हो सकता है और पौधों की शुरुआती बढ़वार कमजोर हो सकती है।
चक्रवात के समय खेतों में पानी भर जाए तो क्या करें?
खेतों में जल निकासी की नालियों को साफ करें और अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने की व्यवस्था करें। लंबे समय तक जलभराव न रहने दें।
क्या बारिश के समय कीटनाशक का छिड़काव करना चाहिए?
नहीं। मौसम खराब रहने तक छिड़काव से बचें। मौसम साफ होने के बाद कृषि विशेषज्ञ की सलाह से ही दवा का इस्तेमाल करें।
चक्रवात से केले की फसल को कैसे बचाएं?
जिन पौधों में फूल या फल आ रहे हैं, उन्हें बांस के मजबूत सहारे से बांधें। खेतों में पानी जमा न होने दें।
बारिश के दौरान अनाज का भंडारण कैसे करें?
अनाज को अच्छी तरह सुखाकर साफ और हवादार स्थान पर रखें। गोदाम में नमी और बारिश का पानी प्रवेश न करने दें।
चक्रवात के दौरान पशुओं को कहां रखना चाहिए?
पशुओं को सुरक्षित, मजबूत और सूखे शेड में रखें। तेज हवा और बिजली गिरने के दौरान पेड़ों के नीचे न बांधें।
क्या बारिश के बाद आलू की फसल में झुलसा रोग हो सकता है?
बारिश और नमी बढ़ने से आलू में झुलसा रोग का खतरा बढ़ सकता है। फसल की नियमित जांच करें और रोग के लक्षण दिखने पर विशेषज्ञ की सलाह लें।
किसान मौसम की सही जानकारी कहां से प्राप्त कर सकते हैं?
किसान IMD, कृषि विश्वविद्यालय, कृषि विज्ञान केंद्र और राज्य कृषि विभाग की आधिकारिक मौसम संबंधी सलाह देख सकते हैं।
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