Table of Contents
किसान भाइयों, खेती में पानी की बचत आज सिर्फ सुविधा का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह सीधे लागत और आमदनी से जुड़ा मामला बन चुका है। इसी वजह से Drip Sprinkler Irrigation Subsidy किसानों के बीच लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ यानी Per Drop More Crop (PDMC) पहल के जरिए सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि पानी को खेत में जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल किया जा सके। कृषि से जुड़ी ऐसी ही नई जानकारी के लिए किसान भाइयों Bihar Agro को विजिट करें।

खेत की सिंचाई का खर्च घटाने वाली बड़ी खबर, Drip Sprinkler Irrigation Subsidy पर किसानों की नजर
उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक जुलाई 2026 तक इस पहल के जरिए देश में 115 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी माइक्रो-इरिगेशन प्रणालियों के तहत लाया जा चुका है। ऐसे में Drip Sprinkler Irrigation Subsidy उन किसानों के लिए खास मायने रखती है, जो सिंचाई की लागत कम करने और फसल को बेहतर पानी प्रबंधन देना चाहते हैं।
55% तक सहायता! Drip Sprinkler Irrigation Subsidy में किसे कितना लाभ?
योजना की सबसे आकर्षक बात वित्तीय सहायता है। उपलब्ध प्रावधानों के अनुसार छोटे और सीमांत किसानों को ड्रिप या स्प्रिंकलर प्रणाली लगाने की लागत का 55 प्रतिशत तक वित्तीय अनुदान दिया जाता है। वहीं अन्य श्रेणी के किसानों के लिए यह सहायता 45 प्रतिशत तक बताई गई है। यानी Drip Sprinkler Irrigation Subsidy का उद्देश्य सिर्फ सिस्टम लगवाना नहीं, बल्कि महंगी माइक्रो सिंचाई तकनीक को किसानों की पहुंच में लाना भी है।
एक लाभार्थी किसान को अधिकतम 5 हेक्टेयर भूमि तक सहायता का प्रावधान बताया गया है। साथ ही उसी भूमि पर दोबारा सहायता लेने के लिए 7 साल का अंतराल रखा गया है। पिछले तीन वर्षों में इस पहल के लिए केंद्र की ओर से ₹8,123.24 करोड़ की वित्तीय सहायता जारी किए जाने का आंकड़ा भी दिया गया है।
ड्रिप सिंचाई में पानी सीधा जड़ों तक, यहीं से शुरू होती है असली बचत
ड्रिप सिस्टम में पाइप और छोटे उत्सर्जक के जरिए पानी धीरे-धीरे पौधों की जड़ों के पास पहुंचता है। इसका फायदा यह है कि पूरे खेत को एक साथ पानी से भरने के बजाय पौधे की जरूरत के हिसाब से सिंचाई की जा सकती है।
यही वजह है कि Drip Sprinkler Irrigation Subsidy का लाभ फलदार पौधों, सब्जियों, बागवानी फसलों और उन क्षेत्रों में खास उपयोगी हो सकता है, जहां पानी सीमित मात्रा में उपलब्ध है।
ड्रिप सिस्टम में मुख्य रूप से दो विकल्प देखने को मिलते हैं। On-line drip असमान दूरी पर लगे पौधों और बागवानी के लिए उपयोगी है, जबकि In-line drip एक निश्चित दूरी वाली फसलों के लिए बेहतर माना जाता है।
स्प्रिंकलर सिस्टम खेत पर बरसाता है पानी, फसल के हिसाब से चुनें मॉडल
स्प्रिंकलर प्रणाली दबावयुक्त पानी को नोजल के जरिए छोटे-छोटे कणों के रूप में खेत में फैलाती है। देखने में यह काफी हद तक बारिश जैसा प्रभाव पैदा करती है। अनाज, दलहन, बीज, मसाले और कई खुले खेत की फसलों में इसका उपयोग किया जाता है।
Drip Sprinkler Irrigation Subsidy के तहत किसानों के लिए स्प्रिंकलर के अलग-अलग मॉडल उपलब्ध हो सकते हैं। इनमें पोर्टेबल स्प्रिंकलर, माइक्रो स्प्रिंकलर, मिनी स्प्रिंकलर, सेमी-परमानेंट सिस्टम और रेन-गन जैसे विकल्प शामिल हैं।
पोर्टेबल मॉडल का फायदा यह है कि पाइप को खेत के अलग हिस्सों में ले जाया जा सकता है। माइक्रो स्प्रिंकलर नर्सरी, पत्तेदार सब्जियों और पौध तैयार करने वाले क्षेत्रों में उपयोगी है। मिनी स्प्रिंकलर मूंगफली, आलू, प्याज और अदरक जैसी फसलों में काम आ सकता है।
वहीं बड़े क्षेत्र के लिए रेन-गन उपयोगी है। इसमें 10,000 से 32,000 लीटर प्रति घंटा तक डिस्चार्ज और करीब 24 से 36 मीटर तक छिड़काव त्रिज्या बताई गई है। हालांकि इसके लिए ज्यादा दबाव वाले पंप और पाइप की जरूरत होती है।
पानी ही नहीं, खाद की बचत भी! Fertigation से बढ़ता है फायदा
Drip Sprinkler Irrigation Subsidy को समझते समय फर्टिगेशन को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। फर्टिगेशन में सिंचाई के पानी के साथ घुलनशील उर्वरकों को फसल की जड़ों के पास पहुंचाया जाता है।
इससे पौधों को पोषक तत्व अपेक्षाकृत लक्षित तरीके से मिल सकते हैं और उर्वरक के इस्तेमाल की दक्षता बढ़ाने में मदद मिलती है। यानी किसान के लिए फायदा सिर्फ पानी बचने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि खेती की पूरी इनपुट व्यवस्था अधिक व्यवस्थित हो सकती है।
जिन इलाकों में भूजल पर दबाव अधिक है या पानी की उपलब्धता सीमित है, वहां ऐसी तकनीकों की उपयोगिता और बढ़ जाती है। इसी कारण Drip Sprinkler Irrigation Subsidy को जल-संरक्षण आधारित खेती से जोड़कर देखा जा रहा है।
डिग्गी, खेत तालाब और सौर सिंचाई से जुड़ रहा माइक्रो इरिगेशन
माइक्रो सिंचाई की सफलता केवल पाइप और नोजल से तय नहीं होती। खेत तक पानी की भरोसेमंद उपलब्धता भी जरूरी है। इसी सोच के तहत डिग्गी, खेत तालाब और जल संचयन जैसी व्यवस्थाओं को बढ़ावा देने की बात सामने आई है।
किसान स्थानीय जरूरत के अनुसार व्यक्तिगत या सामुदायिक जल भंडारण व्यवस्था अपना सकते हैं। इसके अलावा ट्यूबवेल, नदी से पानी उठाने वाली प्रणालियों और सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई को माइक्रो इरिगेशन से जोड़ने का प्रयास भी किया जा रहा है।
20% से 48% तक पानी बचत, उपज में भी सुधार का दावा
नीति आयोग और IIM अहमदाबाद से जुड़े मूल्यांकन अध्ययनों के दिए गए आंकड़ों के अनुसार माइक्रो सिंचाई से सिंचाई जल की बचत 20% से 48%, उर्वरक बचत 11% से 19% और श्रम लागत में 30% से 40% तक कमी दर्ज की गई। वहीं फसल उत्पादकता में 20% से 38% और किसान की शुद्ध आय में 10% से 69% तक वृद्धि के आंकड़े भी बताए गए हैं।
इन परिणामों को देखते हुए Drip Sprinkler Irrigation Subsidy को केवल एक सब्सिडी योजना के बजाय खेती में संसाधन दक्षता बढ़ाने वाली पहल के रूप में समझना अधिक सही होगा।
2025-26 में किन राज्यों में सबसे ज्यादा पहुंची योजना?
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 2025-26 के दौरान महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात और राजस्थान में योजना के तहत सबसे अधिक क्षेत्र कवर किया गया। इसी अवधि में 12.30 लाख से अधिक किसानों को लाभ मिलने की बात कही गई है, जिनमें करीब 20 प्रतिशत महिला किसान शामिल थीं।
इससे संकेत मिलता है कि Drip Sprinkler Irrigation Subsidy का दायरा केवल बड़े कृषि क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि अलग-अलग राज्यों के किसानों तक इसे पहुंचाने की कोशिश हो रही है।
PDMC से PM-RKVY तक, आखिर यह योजना चल कैसे रही है?
‘प्रति बूंद अधिक फसल’ पहल की शुरुआत जनवरी 2006 में केंद्र प्रायोजित सूक्ष्म सिंचाई कार्यक्रम के तौर पर हुई थी। वर्ष 2015-16 से 2021-22 तक यह प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के प्रमुख घटक के रूप में लागू रही। इसके बाद वर्ष 2022-23 से इसे प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY) के तहत लागू किया जा रहा है।
यानी आज Drip Sprinkler Irrigation Subsidy को व्यापक कृषि विकास और जल दक्षता की नीति के हिस्से के रूप में देखा जा सकता है।
किसान आवेदन करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
सब्सिडी वाला सिस्टम लगवाने से पहले किसान को अपनी फसल, मिट्टी, खेत का आकार, पानी का स्रोत और उपलब्ध बिजली या सौर ऊर्जा की स्थिति समझनी चाहिए। केवल कम कीमत देखकर सिस्टम चुनना सही नहीं होगा।
साथ ही यह भी देखना जरूरी है कि स्थानीय स्तर पर योजना के लिए आवेदन किस विभाग, पोर्टल या अधिकृत एजेंसी के माध्यम से स्वीकार किए जा रहे हैं। Drip Sprinkler Irrigation Subsidy की वास्तविक राशि, स्वीकृति प्रक्रिया, लागत मानक और आवेदन नियम राज्य के अनुसार अलग हो सकते हैं, इसलिए आवेदन से पहले स्थानीय कृषि विभाग से नवीनतम जानकारी लेना बेहतर रहेगा।
निष्कर्ष
बढ़ती सिंचाई लागत और घटते जल संसाधनों के दौर में Drip Sprinkler Irrigation Subsidy किसानों के लिए खेती को अधिक जल-कुशल बनाने का एक महत्वपूर्ण रास्ता हो सकती है। ड्रिप से जड़ों तक लक्षित पानी, स्प्रिंकलर से समान सिंचाई और फर्टिगेशन से पोषक तत्वों का बेहतर प्रबंधन—इन तीनों का सही संयोजन किसान की लागत घटाने में मदद कर सकता है।
सबसे जरूरी बात यह है कि किसान अपनी फसल और खेत की जरूरत के अनुसार सही प्रणाली चुने। सही डिजाइन, उचित दबाव, फिल्टर की देखभाल और समय पर रखरखाव के साथ Drip Sprinkler Irrigation Subsidy का लाभ लंबे समय तक खेती की उत्पादकता और पानी की बचत दोनों में मददगार बन सकता है।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Drip Sprinkler Irrigation Subsidy में कितनी सब्सिडी मिलती है?
उपलब्ध प्रावधानों के अनुसार छोटे एवं सीमांत किसानों को 55 प्रतिशत तक और अन्य किसानों को 45 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता दी जा सकती है।
Drip Sprinkler Irrigation Subsidy के लिए कितनी जमीन पर लाभ मिलता है?
दिए गए प्रावधान के अनुसार अधिकतम 5 हेक्टेयर भूमि तक सहायता का प्रावधान बताया गया है।
क्या ड्रिप और स्प्रिंकलर दोनों पर सब्सिडी मिलती है?
PDMC के तहत ड्रिप और स्प्रिंकलर दोनों प्रकार की सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों को शामिल किया गया है।
एक ही जमीन पर दोबारा सब्सिडी कब मिल सकती है?
दिए गए प्रावधान के अनुसार उसी भूमि पर दोबारा सहायता के लिए 7 वर्ष का अंतराल रखा गया है।
क्या ड्रिप सिंचाई से खाद की भी बचत होती है?
फर्टिगेशन के जरिए सिंचाई के पानी के साथ उर्वरक देने से पोषक तत्वों के उपयोग की दक्षता बढ़ाने और उर्वरक की बचत में मदद मिल सकती है।
स्प्रिंकलर किन फसलों के लिए बेहतर है?
अनाज, दलहन, बीज, मसाले और कई खुले खेत की फसलों में स्प्रिंकलर उपयोगी हो सकता है, जबकि मॉडल का चुनाव खेत और फसल की जरूरत के अनुसार करना चाहिए।
क्या रेन-गन भी माइक्रो इरिगेशन में शामिल है?
दिए गए विवरण में रेन-गन/हाई वॉल्यूम स्प्रिंकलर को भी सूक्ष्म सिंचाई उपकरणों के समूह में बताया गया है।
क्या महिला किसान भी योजना का लाभ ले सकती हैं?
2025-26 के उपलब्ध आंकड़ों में लाभार्थियों में लगभग 20 प्रतिशत महिला किसानों की भागीदारी बताई गई है।
Monsoon Rainfall Deficit Kharif Crops 2026: सितंबर की बारिश तय करेगी किसानों की अगली बड़ी तस्वीर
Monsoon Rainfall Deficit Kharif Crops 2026: सितंबर अब बना सबसे बड़ा मौसम संकेत13% कमी का आंकड़ा क्यों बढ़ा रहा है…
पानी की एक-एक बूंद बचाएगी आपकी कमाई: Drip Sprinkler Irrigation Subsidy से किसानों की बदलेगी तकदीर
खेत की सिंचाई का खर्च घटाने वाली बड़ी खबर, Drip Sprinkler Irrigation Subsidy पर किसानों की नजर55% तक सहायता! Drip…
बड़ी राहत! 5 शहरों में अब 35 रुपये किलो बिकेगा प्याज, सरकार का नया Alert
Onion Price Hike Relief 24 Aug 2026: 5 बड़े शहरों में शुरू होगी राहत की सप्लाई35 रुपये किलो वाला प्याज…
धान की रोपाई के बाद खाद की मांग ने पकड़ी रफ्तार, बिहार सरकार ने कालाबाजारी पर कसा शिकंजा
Paddy Transplanting Fertilizer Demand Black Marketing पर सरकार की सीधी नजर97% धान की रोपनी के बाद क्यों बढ़ी खाद की…
UP Sugarcane की बढ़ती ताकत: 3.25 लाख करोड़ भुगतान और 1,28,500 TCD नई क्षमता से गन्ना सेक्टर को बड़ा Boost
यूपी का गन्ना सेक्टर बना बड़ा उदाहरण, किसानों की कमाई से उद्योग तक दिखा बदलावUP ranks number one in sugarcane…
चीनी के बढ़ते दाम पर सरकार का बड़ा एक्शन, 2026 में बदले Import Rules से बाजार को मिलेगी राहत?
Sugar Price Hike Government Changes Import Rules: अब 2 महीने में होगी पूरी प्रक्रियासरकार का फोकस साफ है—चीनी बाजार में…