अरहर की आर्गेनिक खेती (Pigeon Pea Organic Farming): 100% प्राकृतिक तरीके से ज्यादा पैदावार और मुनाफा

5/5 - (1 vote)
अरहर की आर्गेनिक खेती, Pigeon Pea Organic Farming, Organic Arhar Farming, अरहर की जैविक खेती, Organic Dal, Arhar Farming, Organic Farming India, Pigeon Pea, जैविक खेती, Dal Farming, अरहर की खेती, जैविक खेती, Pigeon Pea Organic Farming, Arhar ki kheti, ऑर्गेनिक खेती के फायदे, तुअर दाल की खेती, Organic Farming India, जैविक खाद,

किसान भाइयों, आज के समय में रासायनिक खादों के बढ़ते प्रयोग ने न केवल हमारी मिट्टी को खराब कर दिया है, बल्कि हमारी सेहत पर भी बुरा असर डाला है। इसी वजह से अरहर की आर्गेनिक खेती (Pigeon Pea Organic Farming) एक बहुत ही फायदेमंद विकल्प बनती जा रही है। जिसे किसान कम लागत में शुद्ध और महंगी फसल पैदा कर सकते हैं। अरहर, जिसे हम तुअर दाल के नाम से भी जानते हैं, प्रोटीन का मुख्य स्रोत है। अगर अरहर खेती जैविक तरीके से की जाए, तो बाजार में इसकी कीमत सामान्य अरहर से लगभग दोगुनी मिलती है।

आर्गेनिक खेती से न सिर्फ मिट्टी की सेहत सुधरती है, बल्कि बाजार में अरहर दाल की कीमत भी सामान्य से 20–30% ज्यादा मिलती है। यही कारण है कि अब समझदार किसान भाई अरहर की आर्गेनिक खेती की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं। इस लेख में हम जानेंगे कि कैसे किसान अरहर की आर्गेनिक खेती (Pigeon Pea Organic Farming) को अपनाकर ज्यादा मुनाफा ले सकते हैं।

अरहर की आर्गेनिक खेती क्या है? (What is Pigeon Pea Organic Farming)

अरहर की आर्गेनिक खेती का मतलब है बिना रासायनिक खाद, कीटनाशक और खरपतवारनाशक के अरहर की फसल उगाना। इसमें गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट, जीवामृत, नीम आधारित कीटनाशक और जैविक फफूंदनाशक का इस्तेमाल किया जाता है। अरहर की आर्गेनिक खेती (Pigeon Pea Organic Farming) मिट्टी के प्राकृतिक जीवों को नुकसान नहीं पहुंचाती और लंबे समय तक खेत की उर्वरता बनाए रखती है। इससे उत्पादन भले थोड़ा कम हो, लेकिन दाम ज्यादा मिलने से कुल मुनाफा बढ़ जाता है।

मिट्टी, खेत और जलवायु की तैयारी (Soil, Field and Climate selection for Pigeon Pea Organic Farming)

अरहर की आर्गेनिक खेती, Pigeon Pea Organic Farming, Organic Arhar Farming, अरहर की जैविक खेती, Organic Dal, Arhar Farming, Organic Farming India, Pigeon Pea, जैविक खेती, Dal Farming, अरहर की खेती, जैविक खेती, Pigeon Pea Organic Farming, Arhar ki kheti, ऑर्गेनिक खेती के फायदे, तुअर दाल की खेती, Organic Farming India, जैविक खाद,

अरहर की आर्गेनिक खेती (Pigeon Pea Organic Farming) के लिए जल निकासी वाली दोमट या मध्यम भारी मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है। खेत की तैयारी के लिए सबसे पहले गर्मी के दिनों में गहरी जुताई करें। इससे मिट्टी में छिपे हानिकारक कीट और खरपतवार नष्ट हो जाते हैं। खेत का pH 6.5 से 7.5 के बीच हो तो फसल बेहतर होती है।

जैविक खेती के लिए रासायनिक खाद की जगह प्रति एकड़ 4-5 टन अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट का प्रयोग करें। अंतिम जुताई के समय मिट्टी में ट्राइकोडर्मा और पीएसबी कल्चर मिलाएं ताकि मिट्टी जनित रोगों से सुरक्षा मिल सके। ध्यान रहे कि खेत में जलभराव न हो, क्योंकि अरहर की जड़ें ज्यादा पानी बर्दाश्त नहीं कर पातीं।

जलवायु की बात करें तो गर्म और शुष्क मौसम अरहर के लिए अनुकूल होता है। ज्यादा नमी से रोग बढ़ते हैं, इसलिए संतुलित बारिश वाले क्षेत्र अरहर की खेती (Arhar Ki Kheti) के लिए आदर्श माने जाते हैं।

बीज चयन और बीज उपचार (Seed Selection & Organic Treatment)

अरहर की आर्गेनिक खेती (Pigeon Pea Organic Farming) में बीज की गुणवत्ता का बड़ा महत्व है। हमेशा अपनी जलवायु के अनुसार प्रमाणित, रोगमुक्त और स्थानीय किस्मों का बीज लें (जैसे- यूपीएएस 120, आईसीपीएल 87)। अरहर की आर्गेनिक खेती (Pigeon Pea Organic Farming) में बीज उपचार के लिए ट्राइकोडर्मा या स्यूडोमोनास जैसे जैविक फफूंदनाशक का उपयोग करें। साथ ही बीज को गौमूत्र या छाछ में 8–10 घंटे भिगोकर बोने से अंकुरण अच्छा होता है। इससे शुरुआती रोगों से बचाव होता है और पौधा मजबूत बनता है। जैविक बीज उपचार न केवल फसल को मजबूती देता है बल्कि मिट्टी की उर्वरता को भी बनाए रखता है।

बुवाई का समय और तरीका (Sowing Time and Method)

अरहर की आर्गेनिक खेती (Pigeon Pea Organic Farming) की बुवाई आमतौर पर मानसून के आगमन (जून-जुलाई) के साथ की जाती है। बुवाई के लिए कतार से कतार की दूरी 60-90 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 15-20 सेंटीमीटर रखनी चाहिए। इसे आप मेड़ (Ridge) बनाकर भी बो सकते हैं, जो जल निकासी में मदद करता है। आर्गेनिक फार्मिंग या जैविक खेती (Organic Farming) में मिश्रित खेती (Intercropping) बहुत फायदेमंद है। अरहर के साथ आप मूंग, उड़द या सोयाबीन जैसी फसलें उगा सकते हैं। इससे न केवल अतिरिक्त आय होती है, बल्कि दाल वाली फसलें होने के कारण मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा भी प्राकृतिक रूप से बढ़ती है।

जैविक खाद और पोषक तत्व प्रबंधन (Organic Fertilizer and Nutrient Management)

अरहर की आर्गेनिक खेती (Pigeon Pea Organic Farming) में रसायनों का कोई स्थान नहीं है। अरहर की आर्गेनिक खेती (Pigeon Pea Organic Farming) में रासायनिक खाद की जगह गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट और हरी खाद का प्रयोग किया जाता है। बुवाई से पहले 5–6 टन सड़ी हुई गोबर खाद डालना लाभकारी होता है। पौधों के विकास के लिए जीवामृत, पंचगव्य और वेस्ट डीकंपोजर का नियमित अंतराल पर प्रयोग करें।

बुवाई के 30 और 60 दिन बाद जीवामृत का छिड़काव करने से पौधों की वृद्धि बहुत तेजी से होती है। चूंकि अरहर एक दलहनी फसल है, यह अपनी जड़ों में मौजूद ग्रंथियों के माध्यम से हवा से नाइट्रोजन सोखती है, इसलिए इसे बाहर से ज्यादा खाद की जरूरत नहीं होती। बस मिट्टी में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को पूरा करने के लिए राख या तरल जैविक खाद का उपयोग करना पर्याप्त होता है। अरहर दलहनी फसल होने के कारण खुद नाइट्रोजन भी बनाती है, जिससे मिट्टी की उर्वरता और बढ़ती है।

खरपतवार, कीट और रोग नियंत्रण (Weed, Pest and Disease Control)

आर्गेनिक खेती जैविक खेती (Organic Farming) में खरपतवार नियंत्रण के लिए निराई-गुड़ाई सबसे कारगर तरीका है। 20–25 दिन पर हाथ से या यंत्र से निराई करें। अरहर में अक्सर फली छेदक कीट और उकठा रोग (Wilt) की समस्या आती है। अरहर की आर्गेनिक खेती (Pigeon Pea Organic Farming) में इनका नियंत्रण बेहद आसान और सस्ता है।

कीटों को दूर रखने के लिए खेत में फेरोमोन ट्रैप, लाइट ट्रैप और ‘टी’ (T) आकार के लकड़ी के खूंटे लगाएं ताकि पक्षी उन पर बैठकर कीड़ों को खा सकें। इसके अलावा, नीम का तेल या दशपर्णी अर्क का छिड़काव 15-15 दिनों के अंतराल पर करें। अगर उकठा रोग की समस्या दिखे, तो प्रभावित पौधों को उखाड़कर जला दें और वहां ट्राइकोडर्मा का घोल डालें। रासायनिक कीटनाशकों से बचकर ही आप शुद्ध जैविक उपज प्राप्त कर सकते हैं।

कटाई, मड़ाई और लाभ (Harvesting, Threshing and Profit)

सही तरीके से की गई अरहर की आर्गेनिक खेती (Pigeon Pea Organic Farming) से 8–12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज मिल सकती है। जब अरहर की फलियां सूखकर भूरी हो जाएं और हिलाने पर दानों की आवाज आने लगे, तब कटाई का सही समय होता है। अरहर की आर्गेनिक खेती (Pigeon Pea Organic Farming) में उपज को पूरी तरह सुखाकर ही मड़ाई (Threshing) करनी चाहिए। आर्गेनिक अरहर की मांग शहरों में बहुत अधिक है।

सामान्य अरहर की तुलना में आर्गेनिक अरहर 20–40% ज्यादा कीमत पर बिकती है, यदि आप इसे सीधे पैक करके बेचते हैं, तो आपको सामान्य बाजार भाव से 30% से 50% अधिक मुनाफा हो सकता है। एक एकड़ में वैज्ञानिक तरीके से खेती करने पर 8-10 क्विंटल तक उपज मिल सकती है। यह न केवल आर्थिक रूप से लाभदायक है, बल्कि आपकी भूमि को भी आने वाली पीढ़ियों के लिए उपजाऊ बनाए रखता है।

अरहर की आर्गेनिक खेती, Pigeon Pea Organic Farming, Organic Arhar Farming, अरहर की जैविक खेती, Organic Dal, Arhar Farming, Organic Farming India, Pigeon Pea, जैविक खेती, Dal Farming, अरहर की खेती, जैविक खेती, Pigeon Pea Organic Farming, Arhar ki kheti, ऑर्गेनिक खेती के फायदे, तुअर दाल की खेती, Organic Farming India, जैविक खाद,

सरकारी योजनाएँ और किसान क्रेडिट कार्ड (Government Schemes and KCC)

खेती में मुनाफ़ा बढ़ाने के लिए किसान सरकारी योजनाओं का भी लाभ उठा सकते हैं। ये योजनाएँ खेती की लागत को कम करने और पूंजी (Capital) की व्यवस्था करने में मदद करती हैं।

भारत सरकार और राज्य सरकारों द्वारा चलाई जाने वाली कई योजनाएँ हैं, जो किसानों को सब्ज़ी और बागवानी (Horticulture) फसलों के लिए सब्सिडी (Subsidy) देती हैं।

  1. राष्ट्रीय बागवानी मिशन (NHM): इस योजना के तहत, आलू की खेती के लिए उन्नत बीज, प्लांटर मशीन, कोल्ड स्टोरेज बनाने और माइक्रो-इरिगेशन सिस्टम लगाने पर सब्सिडी मिल सकती है।
  2. प्रधान मंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN): यह योजना सीधे किसानों के खाते में सालाना ₹6,000 की वित्तीय सहायता देती है, जिसका उपयोग किसान खेती के छोटे-मोटे ख़र्चों के लिए कर सकते हैं।

सबसे ज़रूरी है किसान क्रेडिट कार्ड (Kisan Credit Card – KCC)। केसीसी के ज़रिए किसान बहुत कम ब्याज दर पर (लगभग 4% प्रति वर्ष) खेती के लिए लोन (Loan) ले सकते हैं। इस पैसे का उपयोग आलू के बीज, खाद, कीटनाशक खरीदने या बुवाई के ख़र्चों को पूरा करने के लिए किया जा सकता है। इससे किसान को तुरंत पैसा उधार लेने या अपनी बचत को ख़र्च करने की ज़रूरत नहीं पड़ती। किसान को हमेशा अपने क्षेत्र के कृषि विभाग या बागवानी विभाग से संपर्क करके नवीनतम योजनाओं और सब्सिडी के बारे में जानकारी लेते रहना चाहिए।

निष्कर्ष (Conclusion): किसान भाइयों, अरहर की आर्गेनिक खेती (Pigeon Pea Organic Farming) भविष्य की खेती है। इसमें लागत कम और लाभ अधिक है। साथ ही, यह पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए भी सुरक्षित है। आज ही जैविक खेती की ओर कदम बढ़ाएं और समृद्ध बनें।

FAQ: अरहर की आर्गेनिक खेती (Pigeon Pea Organic Farming) पर अक्सर पूछे जाने वाले सवाल।

क्या अरहर की आर्गेनिक खेती में पैदावार कम होती है?

शुरुआती एक-दो साल में मामूली फर्क पड़ सकता है, लेकिन मिट्टी की उर्वरता बढ़ने के साथ पैदावार रासायनिक खेती के बराबर या उससे अधिक हो जाती है।

अरहर के लिए सबसे अच्छा जैविक कीटनाशक कौन सा है?

नीम का तेल और दशपर्णी अर्क अरहर के फली छेदक कीटों के लिए सबसे प्रभावी जैविक कीटनाशक हैं।

अरहर की फसल कितने दिनों में तैयार होती है?

किस्म के आधार पर अरहर की फसल 120 दिन (शीघ्र पकने वाली) से लेकर 180-200 दिन (देर से पकने वाली) में तैयार होती है।

ऑर्गेनिक खेती के फायदे क्या है ?

ऑर्गेनिक खेती के फायदे कमाल के हैं, किसान भाइयों। सबसे बड़ा लाभ मिट्टी की गहरी सेहत है—गोबर खाद और जैविक खनिज मिट्टी के सूक्ष्मजीवों को जगा देते हैं, जिससे सालों तक बिना थके पैदावार मिलती रहती है। पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं, क्योंकि जहर भरी केमिकल दवाओं से जल स्रोत और हवा साफ-सुथरी रहती है। उपज स्वादिष्ट, पोषक और रसायन-रहित होती है, जो शहरों में प्रीमियम दाम (25-40% ज्यादा) दिलाती है। खेती की लागत घट जाती है, पानी की बचत होती है।

मशरूम के कीट और रोकथाम (Mushroom Pests and Prevention): किसान भाइयों के लिए सम्पूर्ण गाइड मशरूम के कीट और रोकथाम, Mushroom Pests and Prevention, मशरूम की खेती, मशरूम के रोग, सियारिड मक्खी नियंत्रण, Mushroom Farming Tips in Hindi, Bihar Agro Mushroom, जैविक कीटनाशक, Mushroom Diseases, Mushroom Pest Control,

मशरूम के कीट और रोकथाम (Mushroom Pests and Prevention): किसान भाइयों के लिए सम्पूर्ण गाइड

मशरूम के प्रमुख कीट और उनकी पहचान (Major Mushroom Pests and Identification)मशरूम के कीट और रोकथाम के लिए पूर्व-तैयारी (Pre-preparation…

घर पर मशरूम कैसे उगाएं: पूरी जानकारी (How to Grow Mushroom at Home): Complete Guide घर पर मशरूम कैसे उगाएं, मशरूम की खेती कैसे करें, how to grow mushroom at home in hindi, mushroom farming at home, mushroom cultivation cost, button mushroom farming, bihar agro mushroom, low cost business ideas,

घर पर मशरूम कैसे उगाएं: पूरी जानकारी (How to Grow Mushroom at Home): Complete Guide

घर पर मशरूम कैसे उगाएं (How to Grow Mushroom at Home)मशरूम के प्रकार और सही चुनाव (Types of Mushrooms and…

मशरूम की खेती से 3 गुना कमाई का मौका (Mushroom Farming for High Profit) मशरूम की खेती, mushroom farming, oyster mushroom, button mushroom, mushroom profit, indoor farming,

मशरूम की खेती से 3 गुना कमाई का मौका (Mushroom Farming for High Profit)

मशरूम की खेती क्या है और क्यों फायदेमंद है? (What is Mushroom Farming & Why Profitable)मशरूम की मुख्य किस्में (Main…

गेहूं की कटाई (Wheat Harvesting) का सही समय और जरूरी सावधानियां गेहूं के कटाई में बरते सावधानियाँ, Wheat Harvesting Precautions, गेहूं कटाई सलाह,

गेहूं की कटाई (Wheat Harvesting) का सही समय और जरूरी सावधानियां

गेहूं के कटाई का सही समय कैसे पहचानें? (How to Identify Right Time for Wheat Harvesting?)कटाई के दौरान सुरक्षा और…

7 फरवरी से शुरू होगा गेहूं खरीद के लिए किसानों का रजिस्ट्रेशन, MSP 2585 रुपये घोषित। Wheat MSP Registration Process, गेहूं खरीदी के लिए MSP पंजीयन प्रक्रिया शुरू,Wheat MSP 2026,

7 फरवरी से शुरू होगा गेहूं खरीद के लिए किसानों का रजिस्ट्रेशन, MSP 2585 रुपये घोषित।

गेहूं खरीदी के लिए MSP पंजीयन प्रक्रिया शुरू (Wheat MSP Registration Process Begins)गेहूं के समर्थन मूल्य (Wheat MSP) में की…

Leave a comment