डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन पर तेज हुआ दबाव, 61% Farmer ID लिंकिंग के बाद राज्यों से मांगा गया जवाब

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देश में खेती को डिजिटल बनाने की तैयारी अब सिर्फ कागजों और प्रेजेंटेशन तक सीमित नहीं रही है। सरकार किसान की पहचान, जमीन, फसल, सरकारी योजनाओं और कृषि सेवाओं को एक डिजिटल व्यवस्था से जोड़ना चाहती है। लेकिन इस पूरी कवायद की रफ्तार को लेकर केंद्र सरकार ने राज्यों के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। कृषि से जुड़ी ऐसी ही नई जानकारी के लिए किसान भाइयों Bihar Agro को विजिट करें।

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नई दिल्ली में हुए राष्ट्रीय सम्मेलन और समीक्षा के दौरान केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कई राज्यों में Digital Agriculture Mission Farmer ID Process Review को लेकर धीमी प्रगति पर नाराजगी जताई। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 15 अगस्त 2026 तक देश के कुल बुवाई क्षेत्र का करीब 61 प्रतिशत ही Farmer ID से जोड़ा जा सका है। वहीं 17 राज्यों में यह कवरेज एक-तिहाई से भी कम है।

Digital Agriculture Mission Farmer ID Process Review: 61% आंकड़े ने बढ़ाई चिंता

Digital Agriculture Mission Farmer ID Process Review का सबसे अहम मुद्दा Farmer ID की कवरेज है। केंद्र की योजना के अनुसार Farmer ID को भविष्य के कृषि डिजिटल इकोसिस्टम की बुनियादी पहचान माना जा रहा है। इसके जरिए किसान की डिजिटल प्रोफाइल तैयार होगी और केंद्र तथा राज्य की सेवाओं को एक-दूसरे से जोड़ने में मदद मिलेगी।

लेकिन फिलहाल सिर्फ 61 प्रतिशत बुवाई क्षेत्र का Farmer ID से लिंक होना बताता है कि मिशन का काम अभी लक्ष्य से काफी पीछे है। बिहार, झारखंड, पंजाब, हरियाणा, असम, केरल, ओडिशा और पश्चिम बंगाल समेत 17 राज्यों में एक-तिहाई से भी कम बुवाई क्षेत्र लिंक हुआ है।

शिवराज सिंह चौहान का तर्क सीधा है—जिन राज्यों ने गंभीरता से काम किया, वहां परिणाम दिखाई दिए। ऐसे में बाकी राज्यों को भी समयबद्ध तरीके से काम पूरा करना होगा।

Farmer ID आखिर इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

Digital Agriculture Mission Farmer ID Process Review को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि Farmer ID सिर्फ एक पहचान संख्या नहीं है। इसे AgriStack से जुड़ी सेवाओं के लिए आधारभूत डिजिटल पहचान के रूप में देखा जा रहा है।

सरकार की शुरुआती योजना में Farmer ID के माध्यम से किसान को फसल ऋण, फसल बीमा, MSP आधारित खरीद, कृषि इनपुट और दूसरी सेवाओं से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। सितंबर 2024 में केंद्र सरकार ने Digital Agriculture Mission को ₹2,817 करोड़ के परिव्यय के साथ मंजूरी दी थी और 2026-27 तक लगभग 11 करोड़ किसानों के लिए डिजिटल पहचान बनाने का लक्ष्य बताया था।

यानी Digital Agriculture Mission Farmer ID Process Review महज तकनीकी प्रोजेक्ट की समीक्षा नहीं है, बल्कि आने वाले वर्षों में सरकारी कृषि सेवाओं के पूरे ढांचे की दिशा तय करने वाली प्रक्रिया है।

खाद बिक्री से लेकर सरकारी खरीद तक, अभी बड़ा गैप

Digital Agriculture Mission Farmer ID Process Review में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई। ज्यादातर राज्यों ने अभी तक खाद बिक्री और सरकारी खरीद जैसी व्यवस्थाओं को Farmer ID से पूरी तरह नहीं जोड़ा है।

समीक्षा के अनुसार केवल मध्य प्रदेश और गोवा में राज्य स्तर पर Farmer ID आधारित खाद बिक्री की व्यवस्था लागू है, जबकि झारखंड, तेलंगाना, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में यह व्यवस्था अभी शुरू नहीं हुई थी।

इसका मतलब साफ है कि किसान की डिजिटल पहचान बनने के बाद भी उसके इस्तेमाल को जमीन पर उतारने का काम अभी बाकी है। Digital Agriculture Mission Farmer ID Process Review में यही अंतर केंद्र की चिंता का बड़ा कारण दिखाई देता है।

हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने भी जोर दिया कि सब्सिडी वाले खाद का लाभ वास्तविक खेती करने वाले किसानों को मिलना चाहिए, सिर्फ जमीन के मालिकों को नहीं। यह सवाल बटाईदार और किरायेदार किसानों के लिए भी अहम है।

Digital Crop Survey से बदलेगा फसल आंकड़ों का खेल

Digital Agriculture Mission Farmer ID Process Review का दूसरा बड़ा हिस्सा Digital Crop Survey यानी DCS है। इसका उद्देश्य खेती और फसल उत्पादन से जुड़े आंकड़ों को ज्यादा तेजी से उपलब्ध कराना है।

अभी अंतिम फसल उत्पादन आंकड़े आने में काफी समय लगता है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार अंतिम अनुमान आने में एक साल से ज्यादा लग सकता है। Digital Crop Survey से सरकार को फसल उत्पादन की स्थिति जल्द समझने में मदद मिल सकती है, जिससे आयात, निर्यात और कृषि नीति से जुड़े फैसले अधिक समय पर लिए जा सकेंगे। हालांकि अभी तक केवल आठ राज्यों ने डिजिटल क्रॉप सर्वे के आंकड़ों का इस्तेमाल अपने आंकड़ों में किया है।

यहीं Digital Agriculture Mission Farmer ID Process Review की असली उपयोगिता सामने आती है—किसान की डिजिटल पहचान और खेत की डिजिटल जानकारी अगर एक सिस्टम में जुड़ती है, तो कृषि नीति ज्यादा डेटा आधारित हो सकती है।

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राज्यों ने भी रखी अपनी मजबूरियां

Digital Agriculture Mission Farmer ID Process Review में केंद्र ने जहां राज्यों से तेजी की उम्मीद जताई, वहीं राज्यों ने अपनी जमीनी मुश्किलें भी बताईं।

शहरी क्षेत्रों के आसपास रिकॉर्ड का बिखराव, नामों में गलती, डुप्लीकेट रिकॉर्ड हटाना, कर्मचारियों की दूसरी सरकारी जिम्मेदारियां और आपदा राहत जैसे कामों ने प्रक्रिया को प्रभावित किया है। रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम बंगाल और झारखंड समेत आठ राज्यों ने इसी महीने Farmer ID बनाने की प्रक्रिया शुरू की है।

सबसे बड़ा सवाल बटाईदार और किरायेदार किसानों का है। समीक्षा में सामने आया कि 22 राज्यों ने अभी तक ऐसे किसानों को Farmer ID देने के लिए स्पष्ट व्यवस्था तैयार नहीं की है। Digital Agriculture Mission Farmer ID Process Review के लिहाज से यह महत्वपूर्ण कमजोरी है, क्योंकि भारत में खेती करने वाला व्यक्ति हमेशा जमीन का मालिक नहीं होता।

पूर्वोत्तर के लिए एक जैसा मॉडल क्यों मुश्किल है?

Digital Agriculture Mission Farmer ID Process Review में पूर्वोत्तर राज्यों की स्थिति भी चर्चा का विषय बनी। वहां जमीन का पारंपरिक स्वामित्व, कठिन भौगोलिक परिस्थितियां, अधिक बारिश और पारंपरिक भूमि रिकॉर्ड प्रणाली के कारण सामान्य AgriStack मॉडल लागू करना आसान नहीं है।

अरुणाचल प्रदेश के कृषि मंत्री गैब्रियल डी. वांगसू ने बताया कि राज्य में पारंपरिक Record of Rights और cadastral maps की कमी के कारण जमीन और मालिकाना हक की पहचान मुश्किल है। अधिकारियों के मुताबिक ऐसे इलाकों में सैटेलाइट डेटा और जमीन पर सत्यापन के जरिए फार्म की सीमाएं तय करने के विकल्प इस्तेमाल किए जा रहे हैं।

इससे संकेत मिलता है कि Digital Agriculture Mission Farmer ID Process Review का अगला चरण शायद सिर्फ तेजी का नहीं, बल्कि राज्यों की अलग-अलग परिस्थितियों के अनुसार लचीला मॉडल तैयार करने का भी होगा।

Farmer ID का लक्ष्य और बढ़ सकता है

Digital Agriculture Mission Farmer ID Process Review में एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। मौजूदा Farmer ID लक्ष्य 2015-16 की कृषि जनगणना के आंकड़ों के आधार पर तय हैं। 2021-22 की कृषि जनगणना के आंकड़े आने के बाद देश में परिचालन कृषि जोतों की संख्या लगभग दो करोड़ तक बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में Farmer ID का कुल लक्ष्य भी बढ़ सकता है।

यानी आज 61 प्रतिशत कवरेज की चुनौती है, तो भविष्य में लक्ष्य और बड़ा हो सकता है। इसलिए Digital Agriculture Mission Farmer ID Process Review सिर्फ वर्तमान स्थिति पर नजर रखने तक सीमित नहीं रहेगा।

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25 अगस्त की समीक्षा पर टिकी नजरें

Digital Agriculture Mission Farmer ID Process Review को लेकर अब 25 अगस्त 2026 की संभावित प्रधानमंत्री समीक्षा पर भी नजर है। Business Standard की रिपोर्ट के अनुसार सम्मेलन के प्रमुख निष्कर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने रखे जाने की संभावना थी।

ऐसे में आने वाले दिनों में राज्यों के लिए स्पष्ट समयसीमा, मॉनिटरिंग या मिशन की रफ्तार बढ़ाने से जुड़े नए निर्देश सामने आ सकते हैं। कृषि मंत्रालय पहले ही राज्यों से योजनाओं की 100 प्रतिशत saturation और तय समयसीमा के भीतर काम पूरा करने पर जोर दे चुका है।

कुल मिलाकर Digital Agriculture Mission Farmer ID Process Review एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच चुका है। सरकार का लक्ष्य सिर्फ किसान को एक ID देना नहीं, बल्कि उस ID को खाद, बीमा, ऋण, MSP खरीद, फसल सर्वे और सरकारी योजनाओं से जोड़कर खेती की पूरी व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी और डेटा आधारित बनाना है।

लेकिन असली सफलता तब मानी जाएगी, जब Farmer ID सरकारी फाइल में दर्ज नंबर न रहकर किसान के रोजमर्रा के काम को आसान बनाए। Digital Agriculture Mission Farmer ID Process Review में अब सबसे बड़ा सवाल यही है—डिजिटल पहचान कितनी जल्दी बनेगी नहीं, बल्कि वह किसान के खेत और उसकी जेब तक कितनी जल्दी पहुंचेगी।

FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Digital Agriculture Mission क्या है?

यह केंद्र सरकार की पहल है जिसका उद्देश्य कृषि के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना और किसान सेवाओं को डिजिटल माध्यम से जोड़ना है।

Farmer ID क्या है?

Farmer ID किसान की डिजिटल पहचान है, जिसे Farmer Registry और AgriStack से जोड़कर विभिन्न कृषि सेवाओं तक पहुंच आसान बनाने की योजना है।

2026 में कितने बुवाई क्षेत्र को Farmer ID से जोड़ा गया है?

15 अगस्त 2026 तक देश के करीब 61 प्रतिशत बुवाई क्षेत्र को Farmer ID से जोड़ा गया था।

किन राज्यों में Farmer ID की प्रगति धीमी बताई गई है?

बिहार, झारखंड, पंजाब, हरियाणा, असम, केरल, ओडिशा और पश्चिम बंगाल समेत 17 राज्यों में एक-तिहाई से कम बुवाई क्षेत्र Farmer ID से लिंक हुआ था।

क्या बटाईदार किसान को भी Farmer ID मिलेगी?

सरकार का लक्ष्य सभी cultivators को शामिल करना है, लेकिन 22 राज्यों में बटाईदार, किरायेदार और अन्य खेती करने वालों के लिए व्यवस्था अभी स्पष्ट रूप से तैयार नहीं थी।

Digital Crop Survey का फायदा क्या है?

इससे फसल उत्पादन के आंकड़े अपेक्षाकृत जल्दी उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है, जिससे आयात-निर्यात और कृषि नीति के फैसले तेजी से लिए जा सकें।

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