गन्ने का ‘कैंसर’ रेड रॉट फिर बना बड़ा खतरा, 1 बीमारी से उपज से लेकर चीनी रिकवरी तक पर वार

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किसान भाइयों, गन्ने की फसल खेत में ऊपर से भले ही हरी-भरी दिखाई दे, लेकिन अगर तने के अंदर लाल सड़न शुरू हो जाए तो पूरी मेहनत पर पानी फिर सकता है। यही वजह है कि Red Rot Disease of Sugarcane (sugarcane cancer) and red-rot resistant varieties इन दिनों गन्ना किसानों के बीच चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है। कृषि से जुड़ी ऐसी ही नई जानकारी के लिए किसान भाइयों Bihar Agro को विजिट करें।

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हाल में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने चीनी उत्पादन में गिरावट के पीछे रेड रॉट बीमारी और अल नीनो जैसी मौसमीय परिस्थितियों को प्रमुख कारणों में बताया है। सरकार ने चीनी उपलब्धता बनाए रखने के लिए अस्थायी रूप से कच्ची चीनी के आयात जैसे कदमों की भी बात कही है।

यानी खेत की यह बीमारी अब सिर्फ किसान की फसल तक सीमित मामला नहीं है। इसका असर चीनी मिलों, चीनी रिकवरी, बाजार और आखिरकार आम उपभोक्ता तक पहुंच सकता है।

Red Rot Disease of Sugarcane (sugarcane cancer) and red-rot resistant varieties क्यों बनीं सबसे बड़ी चर्चा?

रेड रॉट गन्ने का एक गंभीर फफूंदजनित रोग है। इसे आम बोलचाल में “गन्ने का कैंसर” कहा जाता है, क्योंकि संक्रमित तने के अंदर ऊतक सड़ने लगते हैं और बीमारी धीरे-धीरे पूरे पौधे की उत्पादक क्षमता को कमजोर कर देती है। इस रोग की खास पहचान संक्रमित गन्ने को चीरने पर दिखाई देने वाली लाल या लाल-भूरी सड़न और धारियां हैं। रोग बढ़ने पर पत्तियां पीली पड़ सकती हैं, पौधे मुरझा सकते हैं और गन्ने की सामान्य बढ़वार प्रभावित होती है।

ICAR-Indian Institute of Sugarcane Research ने भी रेड रॉट को गंभीर आर्थिक नुकसान से जुड़ा रोग बताया है और रोग प्रतिरोधी किस्मों, स्वस्थ रोपण सामग्री तथा वैज्ञानिक रोग प्रबंधन पर जोर दिया है।

खेत में हरा गन्ना, लेकिन अंदर से बीमारी का हमला!

रेड रॉट की सबसे बड़ी परेशानी यही है कि शुरुआती चरण में किसान को हमेशा बाहरी लक्षण साफ दिखाई नहीं देते। जब तक पौधे की पत्तियों पर असर दिखता है, तब तक तने के अंदर संक्रमण काफी बढ़ चुका हो सकता है। किसान जब संदिग्ध गन्ने को बीच से काटकर देखते हैं तो लाल रंग की धारियां, सड़न और ऊतक का खराब होना दिखाई दे सकता है। कुछ मामलों में संक्रमित गन्ने से असामान्य या खट्टी गंध भी महसूस हो सकती है।

इसलिए सिर्फ खेत की ऊपरी हरियाली देखकर फसल को सुरक्षित मान लेना सही तरीका नहीं है।

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Red Rot Disease of Sugarcane से उत्पादन के साथ चीनी रिकवरी भी गिरती है

रेड रॉट का नुकसान केवल गन्ने के वजन तक नहीं रुकता। बीमारी बढ़ने पर गन्ने की गुणवत्ता और मिल में उससे निकलने वाली चीनी की मात्रा भी प्रभावित हो सकती है। कमजोर और संक्रमित गन्ने में रस की गुणवत्ता खराब होने तथा सुक्रोज की मात्रा घटने का जोखिम रहता है। इससे चीनी मिल को समान मात्रा के गन्ने से अपेक्षाकृत कम चीनी मिल सकती है। यही कारण है कि रेड रॉट को किसान और चीनी उद्योग दोनों के लिए आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण बीमारी माना जाता है।

हाल के वर्षों में उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्र में बीमारी का दबाव खास तौर पर चिंता का कारण रहा है।

Co-0238 की कहानी ने किसानों को क्यों सोचने पर मजबूर किया?

Co-0238 लंबे समय तक अपनी अच्छी उपज और चीनी गुणवत्ता के कारण किसानों की पसंद बनी रही। ICAR के अनुसार यह किस्म कभी उत्तर भारत में तेजी से फैली और कई राज्यों में इसका बड़ा क्षेत्र रहा। लेकिन समय के साथ कुछ क्षेत्रों में रेड रॉट की समस्या बढ़ने लगी। यही वजह है कि वैज्ञानिक अब केवल ज्यादा उत्पादन देने वाली एक ही किस्म पर निर्भर रहने के बजाय किस्मों में विविधता और रोग प्रतिरोध को ज्यादा महत्व दे रहे हैं।

ICAR ने रेड रॉट के दबाव वाले क्षेत्रों में Co-0238 के विकल्प के तौर पर Co 98014, Co 0118, Co 15023, CoLk 14201 और CoS 13235 जैसी किस्मों पर विचार करने की सलाह दी थी।

Red Rot Disease of Sugarcane (sugarcane cancer) से निपटने में नई किस्मों की उम्मीद

यही वह मोर्चा है जहां red-rot resistant varieties किसानों को नई उम्मीद देती हैं। उत्तर प्रदेश गन्ना अनुसंधान परिषद ने 2025-26 के दौरान रेड रॉट से निपटने के लिए 10 नई रोग-प्रतिरोधी किस्मों को सामने रखा। रिपोर्टों के अनुसार इन किस्मों का लंबे समय तक फील्ड परीक्षण किया गया और कुछ ने बेहतर उत्पादन क्षमता भी दिखाई।

इससे पहले उत्तर प्रदेश में CoSe 17451 और CoSh 19231 जैसी रोग-रोधी किस्मों को भी बढ़ावा दिया गया था। इनमें CoSh 19231 को व्यापक क्षेत्र के लिए और CoSe 17451 को पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए पेश किए जाने की जानकारी दी गई है।

हालांकि किसान भाइयों को एक बात जरूर समझनी चाहिए—कोई भी किस्म हर खेत और हर रोग-प्रजाति के खिलाफ समान प्रदर्शन करे, यह जरूरी नहीं है। स्थानीय कृषि विश्वविद्यालय, गन्ना विभाग या चीनी मिल की अनुशंसा के अनुसार किस्म का चुनाव करना बेहतर रहेगा।

बीमारी दिखे तो ये गलती बिल्कुल न करें

रेड रॉट वाले पौधों को खेत में छोड़ते रहना आगे संक्रमण का खतरा बढ़ा सकता है। इसलिए रोगग्रस्त पौधों की नियमित पहचान जरूरी है। बीज गन्ने के लिए हमेशा स्वस्थ खेत का चयन करें। संक्रमित खेत से सेट्स लेकर नई फसल खड़ी करने से बचें। खेत में जल निकासी अच्छी रखें और लंबे समय तक पानी जमा न रहने दें।

ICAR ने स्वस्थ रोपण सामग्री, रोग प्रतिरोधी किस्मों और सेट उपचार को रेड रॉट प्रबंधन की महत्वपूर्ण रणनीतियों में शामिल किया है। कुछ परिस्थितियों में गर्म पानी उपचार जैसी तकनीकों पर भी जोर दिया गया है।

Red Rot Disease of Sugarcane को रोकने का सबसे मजबूत तरीका क्या है?

विशेषज्ञों की रणनीति साफ है—बीमारी फैलने के बाद केवल उपचार पर निर्भर रहने के बजाय पहले से रोकथाम पर काम करें।

स्वस्थ बीज, रोग-रोधी किस्म, खेत की निगरानी, संक्रमित पौधों को हटाना, उचित जल निकासी और एक ही किस्म की लगातार खेती से बचना इस रणनीति के प्रमुख हिस्से हैं। ICAR की विशेषज्ञ चर्चा में भी इस बात पर जोर दिया गया कि किसी एक लोकप्रिय किस्म पर अत्यधिक निर्भरता जोखिम बढ़ा सकती है। व्यापक स्तर पर एकीकृत रोग प्रबंधन और किस्म विविधता को महत्वपूर्ण माना गया है।

अल नीनो और रेड रॉट का दोहरा दबाव क्यों बढ़ा रहा है चिंता?

गन्ने की फसल पर मौसम और बीमारी एक साथ असर डालें तो चुनौती और बड़ी हो जाती है। अल नीनो से जुड़े वर्षा पैटर्न में बदलाव और कम बारिश ने कुछ गन्ना क्षेत्रों में उत्पादन क्षमता को प्रभावित किया है। अमेरिकी कृषि विभाग की भारत संबंधी रिपोर्ट में भी El Niño के कारण शुरुआती वर्षा में कमी और उत्तर प्रदेश में रेड रॉट के प्रकोप को गन्ना उत्पादन पर असर डालने वाले कारकों में बताया गया था।

अगस्त 2026 में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी रेड रॉट और El Niño परिस्थितियों को चीनी उत्पादन में गिरावट से जोड़ते हुए कहा कि सरकार चीनी उपलब्धता को लेकर कदम उठा रही है।

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किसानों के लिए असली संदेश: बीमारी से लड़ाई खेत से ही शुरू होगी

Red Rot Disease of Sugarcane (sugarcane cancer) and red-rot resistant varieties की पूरी कहानी का सबसे अहम सबक यही है कि केवल ज्यादा उत्पादन देने वाली किस्म चुनना पर्याप्त नहीं है। अब किसान को उपज, रोग प्रतिरोध, स्थानीय जलवायु और गन्ना मिल की पसंद—इन सभी को एक साथ देखकर फैसला करना होगा।

रेड रॉट को समय पर पहचानना, संदिग्ध पौधों की जांच करना और प्रमाणित स्वस्थ बीज का उपयोग करना नुकसान को सीमित करने में मदद कर सकता है। आने वाले समय में नई रोग-प्रतिरोधी किस्में इस लड़ाई में बड़ा हथियार बन सकती हैं, लेकिन उनका सही क्षेत्र और सही परिस्थितियों में उपयोग ही असली सफलता तय करेगा।

गन्ने का यह “कैंसर” गंभीर जरूर है, लेकिन वैज्ञानिक शोध, बेहतर बीज और खेत-स्तरीय प्रबंधन के साथ इसका खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।

FAQs: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

गन्ने में रेड रॉट बीमारी क्या है?

रेड रॉट गन्ने की गंभीर फफूंदजनित बीमारी है, जिसमें तने के अंदर लाल रंग की सड़न और धारियां दिखाई दे सकती हैं। इससे पौधे की बढ़वार और उत्पादन प्रभावित होता है।

गन्ने को “कैंसर” क्यों कहा जाता है?

रेड रॉट को किसान और कृषि क्षेत्र में “गन्ने का कैंसर” इसलिए कहते हैं क्योंकि यह तने के अंदर के ऊतकों को तेजी से नुकसान पहुंचाकर पौधे की उत्पादक क्षमता को कमजोर कर सकती है।

रेड रॉट बीमारी की पहचान कैसे करें?

गन्ने के तने को काटकर अंदर लाल-भूरी सड़न या धारियां देखना एक प्रमुख संकेत है। पत्तियों का मुरझाना और पौधे की वृद्धि रुकना भी गंभीर संक्रमण के संकेत हो सकते हैं।

क्या Co-0238 गन्ने की किस्म रेड रॉट से प्रभावित हो सकती है?

हां। Co-0238 कभी बहुत लोकप्रिय और उच्च उत्पादक किस्म थी, लेकिन कुछ क्षेत्रों में रेड रॉट के गंभीर प्रकोप ने इसकी संवेदनशीलता को लेकर चिंता बढ़ाई है।

गन्ने की रेड रॉट प्रतिरोधी किस्में कौन-सी हैं?

क्षेत्र के अनुसार विकल्प अलग हो सकते हैं। ICAR ने Co 98014, Co 0118, Co 15023, CoLk 14201 और CoS 13235 जैसे विकल्पों पर जोर दिया है, जबकि उत्तर प्रदेश में नई रोग-रोधी किस्मों को भी आगे बढ़ाया गया है।

क्या संक्रमित खेत से गन्ने का बीज लेना चाहिए?

नहीं। संक्रमित खेत से planting material लेने के बजाय प्रमाणित और स्वस्थ बीज गन्ने को प्राथमिकता देना अधिक सुरक्षित रणनीति है।

रेड रॉट से खेत को कैसे बचाएं?

रोग-रोधी किस्म, स्वस्थ बीज, नियमित खेत निरीक्षण, उचित जल निकासी, संक्रमित पौधों को हटाना और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की अनुशंसा के अनुसार सेट उपचार अपनाना महत्वपूर्ण है।

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