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Balram Krishi Mahotsav Khargone: खरगोन से आई खबर ने एक बार फिर मध्यप्रदेश की खेती को सुर्खियों में ला दिया है। राज्य में जैविक और प्राकृतिक खेती तेजी से नई पहचान बना रही है। सरकार के दावे के मुताबिक, मध्यप्रदेश अब देश में जैविक खेती के मामले में पहले स्थान पर पहुंच गया है। सबसे खास बात यह है कि राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत अब तक 1,513 क्लस्टर बनाए जा चुके हैं, जिनसे 1.89 लाख किसान सीधे जुड़े हैं। कृषि से जुड़ी ऐसी ही नई जानकारी के लिए किसान भाइयों Bihar Agro को विजिट करें।

जैविक खेती में मध्यप्रदेश ने मारी बाजी
पारंपरिक खेती से हटकर अब किसान प्राकृतिक और जैविक खेती की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। सरकार का कहना है कि राज्य की 27 प्रतिशत से ज्यादा भागीदारी के साथ मध्यप्रदेश जैविक खेती में देश में टॉप पर है। यह आंकड़ा न सिर्फ सरकार की नीतियों को दर्शाता है, बल्कि किसानों की बढ़ती जागरूकता को भी साफ दिखाता है।
खरगोन में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों से ऑनलाइन संवाद किया। इस दौरान उन्होंने प्राकृतिक खेती, गोपालन और आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
देशी गाय पालने पर हर महीने 900 रुपये की मदद
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि जो किसान देशी गोपालन करते हैं, उन्हें 900 रुपये प्रति माह अनुदान दिया जा रहा है। सरकार की मंशा साफ है—किसान रासायनिक खेती की निर्भरता कम करें और ऐसी खेती अपनाएं जो लंबे समय तक मिट्टी और सेहत दोनों के लिए फायदेमंद हो।

54 एकड़ में पूरी तरह जैविक खेती, 13 राज्यों तक पहुंचा उत्पादन
खरगोन के प्रगतिशील किसान अविनाश दांगी इस बदलाव की बड़ी मिसाल बनकर उभरे हैं। उनके पास 54 एकड़ जमीन है और वे कई सालों से पूरी तरह जैविक खेती कर रहे हैं। उनके खेतों में करीब 40 गोवंश हैं और पूरे 8 सदस्यीय परिवार की भागीदारी से यह खेती संचालित हो रही है।
अविनाश दांगी हल्दी, धनिया और मिर्च जैसी मसाला फसलें उगा रहे हैं। उनकी उपज आज देश के 13 राज्यों तक भेजी जा रही है। उनका कहना है कि सरकार प्राकृतिक खेती करने वाले छोटे किसानों की मदद कर रही है, लेकिन जो किसान रासायनिक उर्वरकों का उपयोग नहीं करते, उन्हें भी सब्सिडी का लाभ सीधे मिलना चाहिए।
सफेद मूसली ने बदली किस्मत, बेटे को अमेरिका तक पढ़ाया
खरगोन के ही किसान अनिल वर्मा की कहानी भी किसी प्रेरणा से कम नहीं है। वे सफेद मूसली, पपीता, प्याज और सोयाबीन की खेती करते हैं। खेती से मिली आमदनी ने उनके परिवार की दिशा बदल दी। अनिल वर्मा बताते हैं कि सफेद मूसली की खेती से उन्होंने अपने बेटे प्रीतेश को अमेरिका पढ़ने भेजा।
प्रीतेश ने ओहियो विश्वविद्यालय से कंप्यूटर साइंस में मास्टर्स किया और अब वहीं पढ़ा भी रहे हैं। यह कहानी बताती है कि अगर खेती को सही दिशा और बाजार मिले, तो गांव का किसान भी बड़े सपने पूरे कर सकता है।
1,500 एकड़ में सफेद मूसली, हजार से ज्यादा किसान जुड़े
इलाके में सफेद मूसली की खेती अब एक बड़े मॉडल के रूप में उभर रही है। करीब 1,500 एकड़ जमीन पर 1,000 से अधिक किसान इसकी खेती कर रहे हैं। इससे किसानों को सालभर में 5 से 7 लाख रुपये तक का लाभ होने की बात सामने आई है।
यह बदलाव सिर्फ आय तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे गांवों में खेती को लेकर नया भरोसा भी पैदा हुआ है।

मशीन पर 35% सब्सिडी से कम हुई मेहनत
अनिल वर्मा ने बताया कि पहले सफेद मूसली के छिलके हाथ से निकालने पड़ते थे, जिसमें काफी मजदूरी लगती थी। लेकिन अब केंद्र सरकार की 35 प्रतिशत सब्सिडी की मदद से छिलका निकालने वाली मशीन खरीदी गई है। इससे लागत घटी है और काम भी आसान हुआ है।
फिलहाल इस मशीन का उपयोग 50 से 60 किसान कर रहे हैं। इससे साफ है कि तकनीक और सरकारी सहायता मिलकर खेती को ज्यादा लाभकारी बना रही है।
किसानों को मिल रही नई दिशा Balram Krishi Mahotsav Khargone
बलराम कृषि महोत्सव (Balram Krishi Mahotsav Khargone) में किसानों ने खुलकर कहा कि राज्य सरकार की नीतियों ने खेती को नई राह दिखाई है। प्राकृतिक खेती, आधुनिक तकनीक और सरकारी सहयोग का मेल अब उत्पादन, गुणवत्ता और आय—तीनों को बेहतर बना रहा है। मुख्यमंत्री ने किसानों की समस्याएं सुनीं और प्राकृतिक खेती को और बड़े स्तर पर अपनाने का आह्वान किया।
मध्यप्रदेश की यह तस्वीर बता रही है कि अगर नीति, तकनीक और किसान का हौसला साथ चलें, तो खेती सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि मुनाफे और सम्मान का मजबूत रास्ता भी बन सकती है।
FAQ-अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मध्यप्रदेश में प्राकृतिक खेती से कितने किसान जुड़े हैं?
मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत अब तक 1.89 लाख किसान जुड़े हैं।
सरकार प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को कितनी आर्थिक मदद दे रही है?
देशी गोपालन करने वाले किसानों को सरकार 900 रुपये प्रतिमाह अनुदान दे रही है।
मध्यप्रदेश जैविक खेती में किस स्थान पर है?
सरकार के दावे के मुताबिक मध्यप्रदेश जैविक खेती में देश में पहले स्थान पर पहुंच गया है।
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत कितने क्लस्टर बनाए गए हैं?
अब तक 1,513 क्लस्टर बनाए जा चुके हैं।
खरगोन के प्रगतिशील किसान अविनाश दांगी कौन-सी फसलें उगा रहे हैं?
अविनाश दांगी हल्दी, धनिया और मिर्च जैसी मसाला फसलें उगा रहे हैं।
अविनाश दांगी के जैविक उत्पाद कितने राज्यों में पहुंच रहे हैं?
उनके उत्पाद देश के 13 अलग-अलग राज्यों में सप्लाई किए जा रहे हैं।
सफेद मूसली की खेती से किसान अनिल वर्मा को क्या लाभ मिला?
सफेद मूसली की खेती से उन्होंने अपने बेटे को अमेरिका में पढ़ाई के लिए भेजा और खेती से अच्छा मुनाफा भी कमाया।
सफेद मूसली की खेती करने वाले किसानों को कितना लाभ हो रहा है?
करीब 1,000 से अधिक किसान इस खेती से जुड़े हैं और उन्हें सालभर में 5 से 7 लाख रुपये तक का मुनाफा हो रहा है।
सफेद मूसली की छिलका निकालने वाली मशीन पर कितनी सब्सिडी मिली?
इस मशीन पर केंद्र सरकार से 35 प्रतिशत सब्सिडी मिली है।
सरकार प्राकृतिक खेती को क्यों बढ़ावा दे रही है?
सरकार का उद्देश्य रासायनिक खेती पर निर्भरता कम करना, देशी गोपालन को प्रोत्साहित करना और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देना है।
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