सबसे ज्यादा उत्पादन देने वाली सोयाबीन की 15 उन्नत किस्में (Best Soybean Varieties) 2026

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किसान भाइयों, आज के समय में अच्छी पैदावार और ज्यादा मुनाफा पाने के लिए सही बीज का चुनाव बहुत जरूरी हो गया है। खेती में मुनाफा सिर्फ मेहनत से नहीं, बल्कि सही बीज के चुनाव से आता है। अगर आप भी सोयाबीन की उन्नत किस्में (Best Soybean Varieties) खोज रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा। अक्सर किसान भाई पुरानी किस्मों का ही इस्तेमाल करते रहते हैं, जिससे पैदावार कम हो जाती है। लेकिन सोयाबीन की उन्नत किस्में अपनाकर आप न केवल फसल को बीमारियों से बचा सकते हैं, बल्कि अपनी कमाई को भी दोगुना कर सकते हैं।

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सही किस्म का चुनाव करने से उत्पादन बढ़ता है, रोग कम लगते हैं और बाजार में अच्छा दाम मिलता है। भारत में कई ऐसी उन्नत सोयाबीन किस्में मौजूद हैं जो कम समय में अधिक पैदावार देने के लिए जानी जाती हैं। खेती-बाड़ी की ऐसी ही सटीक जानकारी के लिए आप Bihar Agro से जुड़े रह सकते हैं।

सोयाबीन की उन्नत किस्में क्यों जरूरी हैं? (Why Best Soybean Varieties Are Important)

भारत में सोयाबीन की खेती तेजी से बढ़ रही है क्योंकि इसकी मांग तेल, पशु आहार और फूड इंडस्ट्री में काफी ज्यादा है।
National Food Security Mission के अनुसार बेहतर किस्मों का उपयोग करने से 20% तक अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

सोयाबीन की उन्नत किस्में: पैदावार और कमाई का सही रास्ता (Best Soybean Varieties: Path to Yield and Profit)

भारत में सोयाबीन की खेती मुख्य रूप से खरीफ सीजन में की जाती है। भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान (IISR) का कहना है कि बीज का चुनाव आपकी मिट्टी और वहां की जलवायु के आधार पर होना चाहिए। सोयाबीन की उन्नत किस्में वही अच्छी मानी जाती हैं जो कम समय में पकें और जिनमें कीटों से लड़ने की क्षमता अधिक हो।

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टॉप सोयाबीन किस्में और उनकी खासियत (Top Soybean Varieties and Their Features)
  • JS 20-34: यह किस्म बहुत ही कम समय (करीब 85-90 दिन) में पककर तैयार हो जाती है। ICAR (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) के अनुसार, यह उन क्षेत्रों के लिए वरदान है जहाँ बारिश जल्दी खत्म हो जाती है।
  • KDS 726 (फुले संगम): महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के किसानों की यह पहली पसंद बनती जा रही है। इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत अधिक है।
  • JS 95-60: यह उन्नत सोयाबीन किस्म अधिक उत्पादन और मजबूत पौध वृद्धि के लिए जानी जाती है। बारिश वाले क्षेत्रों में भी इसकी पैदावार अच्छी रहती है। यह किस्म 95-100 दिन में तैयार हो जाती है। इसका उत्पादन 25-30 क्विंटल/हेक्टेयर तक होता है। महाराष्ट्र, बिहार और मध्यप्रदेश में इसकी खेती अधिक की जाती है। यह रोग प्रतिरोधक, अधिक फलियों वाली और बेहतर दाना गुणवत्ता देने वाली वेरायटी है।
  • NRC 138: यह नई किस्म है जो सूखे को सहने की अच्छी क्षमता रखती है।
  • JS-335: यह भारत की सबसे लोकप्रिय सोयाबीन किस्मों में से एक है। कम लागत में अच्छा उत्पादन देती है और किसानों को स्थिर मुनाफा प्रदान करती है। सोयाबीन की यह किस्म 90-95 दिन में तैयार हो जाती है। इसका उत्पादन 20-25 क्विंटल/हेक्टेयर होता है। बिहार, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश की जलवायु के लिए उपयुक्त मानी जाती है। यह जल्दी पकने वाली, पीला मोजैक रोग सहनशील और अधिक तेल उत्पादन देने वाली वेरायटी है।
  • NRC-37 (Ahilya-4): यह सोयाबीन की उन्नत किस्म अधिक तेल और प्रोटीन मात्रा के लिए प्रसिद्ध है। इसके दानों की गुणवत्ता काफी अच्छी मानी जाती है। यह किस्म 100-105 दिन में तैयार हो जाती है। इसका उत्पादन 22-28 क्विंटल/हेक्टेयर तक होता है। मध्यप्रदेश और राजस्थान के लिए यह उपयुक्त मानी जाती है। यह अधिक तेल उत्पादन, बेहतर दाना गुणवत्ता और बाजार में अच्छी कीमत देने वाली वेरायटी है।
  • RVS-2001-4: यह किस्म सूखा प्रभावित क्षेत्रों के किसानों के लिए काफी लाभदायक मानी जाती है। कम पानी में भी यह अच्छा उत्पादन देने की क्षमता रखती है। यह 90-100 दिन में तैयार हो जाती है। इसका उत्पादन 20-24 क्विंटल/हेक्टेयर तक होता है। राजस्थान और गुजरात की जलवायु में इसकी खेती सफल रहती है। यह सूखा सहनशील, मजबूत पौध संरचना और स्थिर उत्पादन देने वाली वेरायटी है।
  • MAUS-71: यह उन्नत सोयाबीन किस्म अधिक पैदावार और बेहतर तेल प्रतिशत के लिए जानी जाती है। किसान इसे अधिक मुनाफे वाली किस्म मानते हैं। यह 95-100 दिन में तैयार हो जाती है। इसका उत्पादन लगभग 25 क्विंटल/हेक्टेयर तक होता है। महाराष्ट्र में इसकी खेती तेजी से बढ़ रही है। यह रोग सहनशील, उच्च तेल मात्रा और बेहतर बाजार मांग वाली वेरायटी है।
  • JS-20-29: यह नई उन्नत सोयाबीन किस्म कम समय में अधिक उत्पादन देने के लिए जानी जाती है। इसके पौधे मजबूत और फलियां अधिक होती हैं। यह किस्म 90-95 दिन में तैयार हो जाती है। इसका उत्पादन 26-30 क्विंटल/हेक्टेयर तक होता है। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए यह बेहतर विकल्प मानी जाती है। यह अधिक उपज, रोग प्रतिरोधक और उच्च गुणवत्ता वाली वेरायटी है।
  • PS-1347: यह मध्यम अवधि में तैयार होने वाली उन्नत सोयाबीन किस्म है। इसकी अंकुरण क्षमता अच्छी होती है और उत्पादन भी बेहतर मिलता है। यह किस्म लगभग 100 दिन में तैयार हो जाती है। इसका उत्पादन 22-26 क्विंटल/हेक्टेयर तक होता है। उत्तरप्रदेश और बिहार में इसकी खेती सफल रहती है। यह मजबूत पौध वृद्धि, कम रोग प्रभाव और बेहतर उत्पादन देने वाली वेरायटी है।
  • PK-472: यह सोयाबीन की किस्म मजबूत जड़ प्रणाली और बेहतर पौध विकास के लिए जानी जाती है। कम समय में अच्छी पैदावार देने की क्षमता रखती है। यह किस्म लगभग 95 दिन में तैयार हो जाती है। इसका उत्पादन 20-24 क्विंटल/हेक्टेयर तक होता है। पंजाब और हरियाणा में इसकी खेती अधिक की जाती है। यह मजबूत पौधे, बेहतर अंकुरण और स्थिर उत्पादन देने वाली वेरायटी है।
  • MACS-1188: यह किस्म अधिक तेल मात्रा और बेहतर गुणवत्ता वाले दानों के लिए प्रसिद्ध है। तेल उद्योग में इसकी मांग काफी अधिक रहती है। यह 100-105 दिन में तैयार हो जाती है। इसका उत्पादन 24-28 क्विंटल/हेक्टेयर तक होता है। महाराष्ट्र और कर्नाटक के लिए यह उपयुक्त मानी जाती है। यह उच्च तेल प्रतिशत, बेहतर गुणवत्ता और अधिक मुनाफा देने वाली वेरायटी है।
  • NRC-86: यह उन्नत सोयाबीन किस्म अधिक बारिश वाले क्षेत्रों के लिए काफी उपयुक्त मानी जाती है। जलभराव की स्थिति में भी यह अच्छा उत्पादन देती है। यह 105 दिन में तैयार हो जाती है। इसका उत्पादन लगभग 25 क्विंटल/हेक्टेयर तक होता है। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में इसकी खेती की जाती है। यह अधिक नमी सहनशील, रोग प्रतिरोधक और स्थिर उत्पादन देने वाली वेरायटी है।
  • JS-9305: यह किस्म अधिक फलियां और बेहतर बीज गुणवत्ता के लिए जानी जाती है। किसानों को स्थिर उत्पादन और अच्छा बाजार भाव दिलाने में मदद करती है। यह 90-95 दिन में तैयार हो जाती है। इसका उत्पादन 22-27 क्विंटल/हेक्टेयर तक होता है। महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश की जलवायु के लिए उपयुक्त है। यह अधिक फलियां, मजबूत पौधे और बेहतर उत्पादन वाली वेरायटी है।
  • MAUS-162: यह जल्दी तैयार होने वाली उन्नत सोयाबीन किस्म है। कम अवधि में तैयार होने के कारण किसान दूसरी फसल भी आसानी से ले सकते हैं। यह 85-90 दिन में तैयार हो जाती है। इसका उत्पादन 20-23 क्विंटल/हेक्टेयर तक होता है। महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में इसकी खेती की जाती है। यह जल्दी पकने वाली, रोग प्रतिरोधक और बेहतर गुणवत्ता वाली वेरायटी है।
  • RSC-10-17: यह किस्म कठिन जलवायु परिस्थितियों में भी अच्छा उत्पादन देने के लिए जानी जाती है। सूखा और रोग दोनों को सहन करने की क्षमता रखती है। यह 95-100 दिन में तैयार हो जाती है। इसका उत्पादन 24-26 क्विंटल/हेक्टेयर तक होता है। राजस्थान और गुजरात में इसकी खेती सफल रहती है। यह सूखा सहनशील, रोग प्रतिरोधक और स्थिर उपज देने वाली वेरायटी है।
  • NRC-128: यह उन्नत सोयाबीन किस्म उच्च गुणवत्ता और अधिक पैदावार के लिए प्रसिद्ध है। बाजार में इसके दानों की मांग काफी अच्छी रहती है। यह 100 दिन में तैयार हो जाती है। इसका उत्पादन लगभग 28 क्विंटल/हेक्टेयर तक होता है। मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में इसकी खेती की जाती है। यह अधिक उपज, बेहतर गुणवत्ता और उच्च बाजार मूल्य देने वाली वेरायटी है।
  • AMS-MB-5-18: यह आधुनिक खेती के लिए उपयुक्त हाई-यील्ड सोयाबीन किस्म मानी जाती है। नई कृषि तकनीकों के साथ यह काफी अच्छा प्रदर्शन करती है। यह किस्म लगभग 95 दिन में तैयार हो जाती है। इसका उत्पादन 25-30 क्विंटल/हेक्टेयर तक होता है। महाराष्ट्र और कर्नाटक के किसानों के लिए यह बेहतर विकल्प है। यह अधिक उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता और ज्यादा मुनाफा देने वाली वेरायटी है।
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सोयाबीन की उन्नत किस्में चुनते समय ध्यान रखने वाली बातें (Things To Consider Before Selecting Best Soybean Varieties)

  • अपने क्षेत्र की जलवायु देखें।
  • मिट्टी की जांच जरूर कराएं।
  • प्रमाणित बीज ही खरीदें।
  • रोग प्रतिरोधक किस्में चुनें।

अधिक कृषि जानकारी के लिए आप Bihar Agro पर भी विजिट कर सकते हैं।

सोयाबीन की उन्नत किस्में से होने वाले फायदे (Benefits of Best Soybean Varieties)

  • अधिक उत्पादन।
  • कम रोग।
  • बेहतर बाजार भाव।
  • अधिक तेल और प्रोटीन।
  • कम लागत में ज्यादा मुनाफा।

निष्कर्ष (Conclusion)

किसान भाइयों, सही बीज ही सफल खेती की नींव है। सही सोयाबीन की उन्नत किस्में (Best Soybean Varieties) जैसे JS 20-34 या फुले संगम का चुनाव करके आप कम लागत में अधिक उत्पादन और बेहतर मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं। हमेशा प्रमाणित बीज का उपयोग करें और बुवाई से पहले उपचार करना न भूलें। अपने क्षेत्र के अनुसार किस्म का चुनाव करें।

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FAQs – सोयाबीन की उन्नत किस्में (Best Soybean Varieties FAQs)

सबसे ज्यादा उत्पादन देने वाली सोयाबीन की किस्म कौन सी है?

JS-9560 और MAUS-71 को सबसे ज्यादा उत्पादन देने वाली किस्मों में माना जाता है।

बिहार में कौन सी सोयाबीन किस्म अच्छी रहती है?

JS-335 और MAUS-71 बिहार के लिए बेहतर मानी जाती हैं।

सोयाबीन की खेती में कितना समय लगता है?

अधिकतर उन्नत किस्में 90 से 110 दिनों में तैयार हो जाती हैं।

कौन सी सोयाबीन किस्म रोग प्रतिरोधक है?

JS-9560 पीला मोजैक रोग के खिलाफ अच्छी प्रतिरोधक क्षमता रखती है।

सबसे ज्यादा पैदावार देने वाली सोयाबीन की किस्म कौन सी है?

भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान के अनुसार, KDS 726 और NRC सीरीज की नई किस्में प्रति हेक्टेयर 25-30 क्विंटल तक पैदावार दे सकती हैं।

सोयाबीन बोने का सही समय क्या है?

आमतौर पर मानसून की पहली अच्छी बारिश (जून के आखिरी हफ्ते से जुलाई के पहले हफ्ते तक) के बाद सोयाबीन की उन्नत किस्में बोनी चाहिए।

क्या सोयाबीन के बीज को उपचारित करना जरूरी है?

हाँ, कार्बेन्डाजिम या थीरम जैसी दवाओं से उपचार करने पर फसल की शुरुआती ग्रोथ अच्छी होती है।

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