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धान की फसल पर तीन तरफ से कीटों की नजर, किसान अभी से रहें सतर्क (BPH leaf folder and yellow stem borer)
BPH leaf folder and yellow stem borer: किसान भाइयों, धान की फसल इस समय खेत में अच्छी तरह बढ़ रही है, लेकिन इसी चरण में कई ऐसे कीट सक्रिय हो सकते हैं जो देखते ही देखते फसल की ताकत और उपज दोनों को प्रभावित कर देते हैं। ब्राउन प्लांट हॉपर यानी BPH, लीफ फोल्डर और येलो स्टेम बोरर (BPH leaf folder and yellow stem borer) धान के प्रमुख कीटों में शामिल हैं।
इसी खतरे को देखते हुए ICAR के सेंट्रल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट (CRRI), कटक की जुलाई 2026 की कृषि सलाह में किसानों को खेत की नियमित निगरानी करने और कीटों की शुरुआती पहचान पर जोर दिया गया है।
इसका सीधा मतलब है कि कीट ज्यादा बढ़ने का इंतजार करने के बजाय किसान खेत में शुरुआती लक्षण देखें और जरूरत पड़ने पर ही नियंत्रण उपाय अपनाएं। कृषि से जुड़ी ऐसी ही नई जानकारी के लिए किसान भाइयों Bihar Agro को विजिट करें।

खेत में कीटों की पहचान ही सबसे पहला बचाव
धान में BPH leaf folder and yellow stem borer in Paddy की समस्या को नियंत्रित करने के लिए सबसे जरूरी है कि किसान इनकी पहचान करना सीखें।
लीफ फोल्डर के हमले में धान की पत्तियां मुड़कर नली जैसी दिखाई देने लगती हैं। इनके अंदर कीट छिपकर पत्ती की हरी सतह को खाता है, जिससे पत्तियों पर सफेद या पारदर्शी धारियां नजर आ सकती हैं। ऐसे नुकसान की पहचान आमतौर पर खेत में चलते हुए भी की जा सकती है।
येलो स्टेम बोरर (Yellow Stem Borer) का मामला थोड़ा अलग है। इसका प्रकोप पौधे के तने पर असर डालता है, इसलिए फसल की नियमित जांच बेहद जरूरी हो जाती है। वहीं BPH मुख्य रूप से पौधे के निचले हिस्से में रहकर रस चूसता है और ज्यादा प्रकोप होने पर धान के पौधे कमजोर पड़ सकते हैं।
फेरोमोन ट्रैप लगाएंगे तो कीटों की गतिविधि जल्दी पकड़ में आएगी
ICAR-CRRI की सलाह में येलो स्टेम बोरर और लीफ फोल्डर की निगरानी के लिए प्रति एकड़ 4 से 5 फेरोमोन ट्रैप लगाने की बात कही गई है।
किसान इन ट्रैप की नियमित जांच करते रहें। यदि नर पतंगों की संख्या 4 से 5 तक पहुंचती है, तो इसे कीट गतिविधि बढ़ने का संकेत मानते हुए अनुशंसित नियंत्रण उपाय अपनाए जा सकते हैं।
यह तरीका इसलिए उपयोगी है क्योंकि किसान को बिना जरूरत पूरे खेत में दवा का छिड़काव करने के बजाय पहले कीट की स्थिति का अंदाजा मिल जाता है। इससे खर्च भी नियंत्रित किया जा सकता है और अनावश्यक कीटनाशी इस्तेमाल से बचा जा सकता है।

ट्राइकोग्रामा से शुरू करें जैविक नियंत्रण का रास्ता
धान के कीट प्रबंधन में जैविक नियंत्रण को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ICAR की सलाह में Trichogramma japonicum और Trichogramma chilonis जैसे अंड परजीवियों के उपयोग का सुझाव दिया गया है।
कीटों की गतिविधि दिखाई देने पर इन्हें 7 से 10 दिन के अंतराल पर छोड़ा जा सकता है। इससे कीटों की अगली पीढ़ी को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
धान में स्टेम बोरर (Stem Borer) और लीफ फोल्डर (Leaf Folder) के प्रबंधन में ट्राइकोग्रामा की नियमित रिलीज पर आधारित एकीकृत प्रबंधन के प्रभावी होने की रिपोर्ट भी उपलब्ध है।
पत्तियां मुड़ने लगी हैं तो लीफ फोल्डर को हल्के में न लें
कई किसान पत्तियों के हल्के मुड़ने को सामान्य मानकर छोड़ देते हैं। लेकिन अगर खेत में मुड़ी हुई पत्तियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, तो उन्हें सावधान हो जाना चाहिए।
लीफ फोल्डर (Leaf Folder) पत्ती को मोड़कर उसके अंदर रहकर हरी सतह को खाता है। अधिक नुकसान की स्थिति में खेत का एक हिस्सा जला हुआ या सूखा-सूखा दिखाई दे सकता है। खासकर फसल के महत्वपूर्ण विकास चरणों में गंभीर पत्ती क्षति उपज को प्रभावित कर सकती है।
ICAR की सलाह के अनुसार नुकसान दिखाई देने पर क्लोरान्ट्रानिलिप्रोल 18.5% SC, टेट्रानिलिप्रोल 200 SC या फ्लूबेंडियामाइड 20 WG जैसे अनुशंसित विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता है। दवा का चयन और मात्रा स्थानीय कृषि सलाह तथा उत्पाद के लेबल के अनुसार ही करें।
BPH दिखे तो सबसे पहले खेत के पानी पर दें ध्यान
ब्राउन प्लांट हॉपर यानी BPH का प्रकोप धान किसानों के लिए खास चिंता का विषय है। इस कीट के बढ़ने पर केवल तुरंत कीटनाशी छिड़काव करने के बजाय खेत की पानी प्रबंधन व्यवस्था पर भी ध्यान देना जरूरी है।
ICAR की सलाह के मुताबिक अगर BPH आर्थिक क्षति स्तर से ऊपर पहुंच जाए, तो सबसे पहले Alternate Wetting and Drying यानी AWD तकनीक अपनाकर खेत में लंबे समय तक पानी जमा रहने से बचना चाहिए।
इसका मकसद खेत में लगातार पानी भरा रखने की स्थिति को कम करना है। इसके बाद भी कीट की समस्या बनी रहती है, तो अनुशंसित कीटनाशियों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
BPH के लिए इन विकल्पों की दी गई है सलाह
आईसीएआर (ICAR) की दी गई सलाह के अनुसार BPH नियंत्रण के लिए स्थिति के अनुसार ट्राइफ्लूमेजोपाइरिम 10% SC, पाइमेट्रोजीन 50% WG, डाइनोटेफ्यूरान 20% SG, थायमेथोक्साम 25% WG, एथोफेनप्रॉक्स 10% EC, एसीफेट 75% SP या फिप्रोनिल 5% SC जैसे विकल्प बताए गए हैं।
लेकिन यहां एक बात बेहद जरूरी है—किसान केवल कीट देखकर किसी भी दवा की मनमानी मात्रा न डालें। लेबल पर दी गई मात्रा, फसल की अवस्था, स्थानीय कृषि विभाग या विशेषज्ञ की सलाह और सुरक्षा निर्देशों का पालन करना जरूरी है।
ज्यादा नाइट्रोजन से BPH का खतरा बढ़ सकता है
धान में अच्छी हरियाली के लिए किसान अक्सर जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजनयुक्त खाद डाल देते हैं। लेकिन कीट प्रकोप के दौरान ऐसा करना नुकसानदायक हो सकता है।
ICAR ने BPH के प्रकोप के समय नाइट्रोजनयुक्त उर्वरकों के अनावश्यक इस्तेमाल से बचने की सलाह दी है। संतुलित पोषण देना इसलिए जरूरी है ताकि पौधे स्वस्थ रहें, लेकिन अत्यधिक कोमल और घनी वृद्धि की स्थिति पैदा न हो।
लीफ फोल्डर के संदर्भ में भी उपलब्ध कृषि स्रोत अत्यधिक नाइट्रोजन को कीट वृद्धि के अनुकूल परिस्थितियों से जोड़ते हैं।
दूसरे कीट भी दिखें तो समय पर कदम उठाएं
धान के खेत में केवल BPH, स्टेम बोरर और लीफ फोल्डर ही चिंता का विषय नहीं हैं। कुछ परिस्थितियों में स्वॉर्मिंग कैटरपिलर, केस वर्म और हिस्पा जैसे कीट भी नुकसान कर सकते हैं।
ICAR की सलाह में इनके प्रकोप की स्थिति में क्लोरपायरीफॉस 20 EC या क्विनालफॉस 25% EC जैसे विकल्पों का उल्लेख किया गया है। इन उत्पादों का इस्तेमाल भी केवल वर्तमान स्वीकृत लेबल, फसल और स्थानीय अनुशंसा के अनुसार ही किया जाना चाहिए।

किसान अपनाएं यह सरल मॉनिटरिंग रूटीन
किसान भाइयों के लिए सबसे आसान तरीका यही है कि सप्ताह में कई बार खेत का चक्कर लगाएं और केवल दूर से फसल देखकर वापस न आएं।
कुछ पौधों की पत्तियों को खोलकर लीफ फोल्डर की जांच करें। पौधे के निचले हिस्से में BPH की मौजूदगी देखें। अलग-अलग हिस्सों में स्टेम बोरर से जुड़े लक्षणों पर नजर रखें और फेरोमोन ट्रैप की संख्या नियमित रूप से नोट करते रहें।
ऐसी निगरानी से कीटों का प्रकोप शुरुआती अवस्था में पकड़ में आ सकता है और जरूरत के अनुसार ही नियंत्रण किया जा सकता है। यही एकीकृत कीट प्रबंधन का व्यावहारिक तरीका है।
कीटनाशक आखिरी कदम नहीं, सही समय पर सही कदम होना चाहिए
धान में कीट दिखते ही लगातार अलग-अलग दवाओं का छिड़काव करना अच्छा तरीका नहीं है। शुरुआती अवस्था में कई बार फसल कुछ नुकसान की भरपाई खुद कर सकती है और प्राकृतिक शत्रु भी कीटों को नियंत्रित करते हैं। अत्यधिक या अनावश्यक कीटनाशी इस्तेमाल प्राकृतिक जैविक नियंत्रण को प्रभावित कर सकता है।
इसलिए पहले निगरानी, फिर पहचान, उसके बाद आर्थिक क्षति स्तर का आकलन और अंत में जरूरत पड़ने पर अनुशंसित नियंत्रण—यह क्रम अपनाना ज्यादा समझदारी है।
निष्कर्ष: अभी संभल गए तो धान की उपज सुरक्षित रहेगी
धान की फसल में BPH leaf folder and yellow stem borer in Paddy का खतरा बढ़ने पर घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन लापरवाही भी नहीं करनी चाहिए। फेरोमोन ट्रैप से निगरानी, ट्राइकोग्रामा जैसे जैविक विकल्प, खेत में पानी का उचित प्रबंधन, संतुलित उर्वरक इस्तेमाल और जरूरत पड़ने पर अनुशंसित कीटनाशियों का प्रयोग फसल सुरक्षा में मदद कर सकता है।
सबसे अहम बात यह है कि किसान कीटों की संख्या और नुकसान को देखते हुए निर्णय लें। समय पर उठाया गया छोटा कदम बाद में होने वाले बड़े नुकसान और अतिरिक्त खर्च को काफी हद तक रोक सकता है।
FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
धान में BPH की पहचान कैसे करें?
BPH यानी Brown Planthopper सामान्यतः धान के पौधे के निचले हिस्से में दिखाई देता है। लगातार प्रकोप बढ़ने पर पौधे कमजोर और प्रभावित दिखाई दे सकते हैं। खेत की नियमित निगरानी जरूरी है।
धान में लीफ फोल्डर का सबसे प्रमुख लक्षण क्या है?
लीफ फोल्डर के प्रकोप में पत्तियां मुड़कर नली जैसी बन जाती हैं और पत्ती पर सफेद या पारदर्शी धारियां दिखाई दे सकती हैं।
येलो स्टेम बोरर से धान को कैसे बचाएं?
फेरोमोन ट्रैप से निगरानी, ट्राइकोग्रामा जैसे जैविक नियंत्रण उपाय और जरूरत पड़ने पर अनुशंसित कीटनाशी उपयोग किए जा सकते हैं।
धान में फेरोमोन ट्रैप कितने लगाने चाहिए?
दिए गए ICAR-CRRI परामर्श के अनुसार येलो स्टेम बोरर और लीफ फोल्डर की निगरानी के लिए प्रति एकड़ 4 से 5 फेरोमोन ट्रैप लगाए जा सकते हैं।
BPH के प्रकोप में AWD तकनीक क्यों अपनाई जाती है?
AWD यानी Alternate Wetting and Drying का उद्देश्य खेत में लंबे समय तक लगातार पानी जमा रहने की स्थिति को कम करना है। ICAR की सलाह में BPH नियंत्रण के शुरुआती उपाय के रूप में इसे अपनाने की सिफारिश की गई है।
क्या ज्यादा यूरिया डालने से BPH बढ़ सकता है?
BPH के प्रकोप के दौरान अनावश्यक नाइट्रोजनयुक्त उर्वरक से बचने की सलाह दी गई है। अत्यधिक नाइट्रोजनयुक्त वृद्धि कुछ कीटों के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा कर सकती है।
धान में लीफ फोल्डर के लिए कौन-सी दवा इस्तेमाल की जाती है?
दिए गए परामर्श में क्लोरान्ट्रानिलिप्रोल 18.5% SC, टेट्रानिलिप्रोल 200 SC और फ्लूबेंडियामाइड 20 WG जैसे विकल्पों का उल्लेख है। इस्तेमाल से पहले लेबल और स्थानीय अनुशंसा जरूर देखें।
Trichogramma japonicum और Trichogramma chilonis क्या काम करते हैं?
ये अंड परजीवी जैविक नियंत्रण एजेंट हैं, जिनका इस्तेमाल कुछ धान कीटों की अगली पीढ़ी को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।
धान में कीटनाशक कब डालना चाहिए?
केवल कीट दिखाई देने पर तुरंत छिड़काव करने के बजाय पहले प्रकोप की गंभीरता और आर्थिक क्षति स्तर का आकलन करना बेहतर है। जरूरत होने पर ही अनुशंसित दवा और सही मात्रा का इस्तेमाल करें।
धान में BPH, Leaf Folder और Yellow Stem Borer से बचाव का सबसे अच्छा तरीका क्या है?
नियमित निगरानी, फेरोमोन ट्रैप, संतुलित पोषण, उचित पानी प्रबंधन, जैविक नियंत्रण और जरूरत के अनुसार अनुशंसित कीटनाशियों का एकीकृत इस्तेमाल सबसे व्यावहारिक तरीका है।
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