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Haryana Paddy Procurement Delay Farmers Facing Trouble: हरियाणा में इस बार धान की अच्छी पैदावार किसानों के लिए जहां उम्मीद लेकर आई है, वहीं सरकारी मंडियों में खरीद की धीमी रफ्तार ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। किसान फसल लेकर मंडियों में पहुंच रहे हैं, लेकिन खरीद में देरी, धान की अधिक नमी, चावल मिलों की सीमित भागीदारी और पहले से रखे अनाज के स्टॉक के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कृषि से जुड़ी ऐसी ही नई जानकारी के लिए किसान भाइयों Bihar Agro को विजिट करें।

11 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा के ई-खरीद पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों में शनिवार शाम 5 बजे तक मंडियों में लगभग 16 लाख मीट्रिक टन धान पहुंचा था। इसमें से लगभग 8.56 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद दर्ज हुई, जबकि केवल 3.10 लाख मीट्रिक टन उपज का उठान हो पाया था। इससे मंडियों में जगह की कमी की समस्या बढ़ी।
यह स्थिति अब राजनीतिक बहस का मुद्दा भी बन चुकी है। विपक्ष किसानों को हो रही परेशानी को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठा रहा है। वहीं, किसानों की मांग है कि उनकी उपज की खरीद समय पर हो और उन्हें घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का पूरा लाभ मिले।
Haryana Paddy Procurement Delay Farmers Facing Trouble: बंपर फसल के बाद भी क्यों बढ़ी मुसीबत?
हरियाणा के धान उत्पादक इलाकों में इस समय खरीद व्यवस्था पर काफी दबाव है। किसान जब अपनी फसल लेकर मंडी पहुंचते हैं, तो उन्हें केवल तौल या खरीद का इंतजार नहीं करना पड़ता, बल्कि नमी की जांच, जरूरी दस्तावेज, खरीद एजेंसी की उपलब्धता और उपज के उठान जैसी प्रक्रियाओं से भी गुजरना पड़ता है।
किसानों के लिए सबसे बड़ी परेशानी तब होती है, जब कई दिन तक फसल मंडी में पड़ी रहती है। इससे फसल को बारिश और खराब मौसम से बचाने की चिंता बढ़ती है। साथ ही, खेत में अगली फसल की तैयारी और घरेलू खर्चों के लिए पैसों की जरूरत भी बनी रहती है।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 11 अक्टूबर तक हरियाणा में अनुमानित 57 लाख मीट्रिक टन धान की आवक के मुकाबले लगभग 16 लाख मीट्रिक टन उपज खरीद केंद्रों तक पहुंची थी। रिपोर्ट में बताया गया कि खरीदे गए धान में से उठान की गति अपेक्षाकृत धीमी रही। यह आंकड़ा उस तारीख और समय तक की स्थिति बताता है, पूरे सीजन का अंतिम परिणाम नहीं।
MSP ₹2,441 होने के बावजूद किसानों को कम दाम मिलने की चिंता
किसान अपनी फसल इसलिए भी सरकारी खरीद केंद्रों तक लाते हैं, ताकि उन्हें घोषित धान MSP 2026-27 के अनुसार उचित कीमत मिल सके। खरीफ विपणन सीजन 2026-27 के लिए सामान्य धान का Haryana Paddy MSP 2026-27 ₹2,441 प्रति क्विंटल और ग्रेड-A धान का MSP ₹2,461 प्रति क्विंटल तय किया गया है।
लेकिन मंडियों में खरीद में देरी होने और फसल की गुणवत्ता संबंधी मानकों को पूरा न कर पाने पर कुछ किसानों को निजी व्यापारियों के हाथों कम कीमत पर उपज बेचनी पड़ रही है। हिंदुस्तान टाइम्स ने 7 अक्टूबर की रिपोर्ट में करनाल के एक किसान का उदाहरण दिया, जिसने अधिक नमी और सरकारी खरीद में दिक्कत के कारण धान ₹2,150 से ₹2,275 प्रति क्विंटल के भाव पर निजी खरीदारों को बेचा। यह एक किसान का दर्ज मामला है, सभी किसानों के लिए एक समान भाव नहीं।
यही वजह है कि Haryana Paddy Procurement Delay Farmers Facing Trouble का मुद्दा केवल सरकारी खरीद की गति तक सीमित नहीं है। किसानों के लिए यह उनकी लागत निकालने, अगली फसल के लिए पैसा जुटाने और उपज का सही मूल्य पाने से जुड़ा सवाल है।

धान में नमी 17% से ज्यादा नमी बनी खरीद की एक बड़ी बाधा
सरकारी खरीद में धान की नमी (Paddy Moisture Limit) भी अहम भूमिका निभाती है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा में निष्पक्ष औसत गुणवत्ता संबंधी मानकों के तहत धान में अधिकतम स्वीकार्य नमी 17% बताई गई है। इस सीमा से अधिक नमी होने पर किसानों को धान सुखाने के लिए इंतजार करना पड़ सकता है या उन्हें निजी खरीदारों से कम कीमत मिलने का जोखिम उठाना पड़ सकता है।
हरियाणा धान खरीद: कटाई के तुरंत बाद लाया गया धान कई बार पर्याप्त रूप से सूखा नहीं होता। ऐसे में किसान चाहते हैं कि नमी की जांच सही तरीके से हो और उन्हें फसल सुखाने के लिए उचित सुविधाएं मिलें। कुछ किसान संगठनों ने नमी सीमा में छूट देने की मांग भी उठाई है।
हालांकि, नमी की समस्या का समाधान करते समय अनाज की गुणवत्ता और सरकारी खरीद के निर्धारित मानकों का भी ध्यान रखना जरूरी है। किसानों की मांग है कि जांच पारदर्शी हो, डिजिटल मीटर की रीडिंग में अंतर की शिकायतों की जांच हो और योग्य उपज को अनावश्यक रूप से रोका न जाए।
चावल मिलों की कमी और धीमा उठान मंडियों में बढ़ा रहे दबाव
धान खरीद की प्रक्रिया केवल मंडी में फसल पहुंचने से पूरी नहीं होती। खरीद एजेंसियों को उपज खरीदने के बाद उसे मंडी से उठवाना, संबंधित मिलों तक पहुंचाना और आगे की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। यदि उठान धीमा हो जाए, तो मंडी में जगह कम पड़ने लगती है।
7 अक्टूबर की रिपोर्ट में बताया गया कि हरियाणा में करीब 1,400 चावल मिलों में से लगभग 500 मिलें ही उस समय सरकारी खरीद प्रक्रिया में शामिल हुई थीं। रिपोर्ट में पिछले सीजन के लंबित चावल स्टॉक, मिलर्स की भागीदारी और खरीद से जुड़ी प्रक्रियाओं को भी देरी के कारणों में गिनाया गया।
इसका सीधा असर किसानों पर पड़ता है। मंडी में पहले से रखी बोरियों का उठान नहीं होगा, तो नई फसल के लिए जगह बनाना मुश्किल होगा। ऐसे में सरकार के लिए जरूरी है कि खरीद एजेंसियों, मिलर्स और परिवहन व्यवस्था के बीच तालमेल बेहतर किया जाए।
कांग्रेस ने खरीद व्यवस्था पर उठाए सवाल
धान खरीद में देरी का मुद्दा अब राजनीतिक बहस का रूप ले चुका है। कांग्रेस नेता और हरियाणा विधानसभा में विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने 10 अक्टूबर को राज्य सरकार की खरीद व्यवस्था पर सवाल उठाए और MSP के क्रियान्वयन को लेकर श्वेतपत्र जारी करने की मांग की।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, हुड्डा ने दावा किया कि मंडियों में पहुंची धान की बड़ी मात्रा की खरीद और उठान लंबित है। उन्होंने पोर्टल से जुड़ी देरी, गेट पास, उपज की सीमा तय करने और सत्यापन में लंबित मामलों को भी समस्या बताया। ये विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोप हैं; इन्हें सरकार द्वारा पुष्ट निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।
इस मुद्दे पर किसानों की वास्तविक स्थिति समझने के लिए जरूरी है कि मंडीवार आवक, खरीदी गई उपज, उठान, भुगतान और लंबित मामलों के आंकड़े नियमित रूप से सामने आएं। इससे यह स्पष्ट होगा कि समस्या कहां ज्यादा है और समाधान के लिए कौन-से कदम जरूरी हैं।
पंजाब में भी धान खरीद के लक्ष्य और वास्तविक उत्पादन पर बहस
हरियाणा की तरह पंजाब में भी सरकारी धान खरीद को लेकर चिंता सामने आई है। इंडियन एक्सप्रेस की 9 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र ने पंजाब के लिए मौजूदा सीजन में 180 लाख टन धान खरीद का लक्ष्य रखा है। वहीं, राज्य की मंडियों के लिए पिछले तीन वर्षों की औसत खरीद के आधार पर अलग-अलग लक्ष्य तय किए गए हैं।
किसानों और आढ़तियों को आशंका है कि यदि इस बार वास्तविक उत्पादन और मंडियों में आवक पुराने औसत से ज्यादा हुई, तो निर्धारित लक्ष्यों के कारण खरीद व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। रिपोर्ट में पंजाब के कुछ क्षेत्रों में प्रति एकड़ 30 क्विंटल या उससे अधिक पैदावार की उम्मीद का भी उल्लेख है। ये अनुमान हैं, पूरे राज्य की अंतिम पैदावार के प्रमाणित आंकड़े नहीं।
इससे साफ है कि हरियाणा में धान की खरीद में देरी से किसान परेशान केवल एक राज्य तक सीमित चिंता नहीं है। दोनों राज्यों में किसानों की मांग है कि खरीद व्यवस्था फसल की वास्तविक आवक के अनुसार तैयार हो, ताकि अच्छी पैदावार उनके लिए परेशानी का कारण न बन जाए।
गोदामों में पुराना अनाज, नई फसल के लिए जगह बनाना बड़ी चुनौती
धान खरीद की समस्या को समझने के लिए पुराने स्टॉक और भंडारण क्षमता के आंकड़े भी अहम हैं। बिजनेस स्टैंडर्ड की 11 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, 31 अगस्त 2026 तक पंजाब में पिछले खरीद सीजन से लगभग 153 लाख टन चावल का स्टॉक था, जबकि हरियाणा में यह स्टॉक लगभग 43 लाख टन बताया गया।
इसी रिपोर्ट में पंजाब की संयुक्त गेहूं-चावल भंडारण क्षमता लगभग 268.4 लाख टन और कुल स्टॉक लगभग 276.4 लाख टन दर्ज किया गया। हरियाणा के लिए संबंधित क्षमता लगभग 139.4 लाख टन और कुल स्टॉक लगभग 143.2 लाख टन बताया गया। ये आंकड़े अगस्त के हैं और सितंबर-अक्टूबर में स्टॉक में हुई संभावित कमी को शामिल नहीं करते।
इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि नई फसल आने से पहले भंडारण व्यवस्था पर काफी दबाव था। इसलिए धान की खरीद के साथ-साथ पुराने अनाज का समय पर उठान और वितरण भी उतना ही जरूरी है।

अब किसानों को राहत देने के लिए क्या कदम जरूरी हैं?
किसानों की परेशानी कम करने के लिए सबसे पहले मंडियों में खरीद और उठान की गति बढ़ानी होगी। खरीद केंद्रों पर पर्याप्त कर्मचारी, समय पर गेट पास, पारदर्शी नमी जांच, मिलर्स की उपलब्धता और परिवहन की व्यवस्था सुनिश्चित करना जरूरी है।
किसानों को अपनी फसल बेचने से पहले संबंधित मंडी की व्यवस्था और दस्तावेजों की जानकारी लेनी चाहिए। फसल की नमी निर्धारित मानक से अधिक हो, तो सुरक्षित तरीके से सुखाने की व्यवस्था करना उपयोगी होगा। यदि किसान को MSP से कम भाव मिलता है या खरीद में असामान्य देरी होती है, तो उसे पर्ची, गुणवत्ता जांच, तौल और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड संभालकर रखने चाहिए तथा मंडी समिति या संबंधित खरीद एजेंसी के सामने शिकायत दर्ज करनी चाहिए।
अंततः अच्छी पैदावार तभी किसानों के लिए वास्तविक फायदा बनेगी, जब फसल की खरीद समय पर हो, भुगतान पारदर्शी रहे और मंडियों में उपज का उठान तेजी से किया जाए। सरकार, खरीद एजेंसियों और मिलर्स के बीच बेहतर तालमेल ही इस सीजन में किसानों की परेशानी घटाने का सबसे व्यावहारिक रास्ता है।
FAQs: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
हरियाणा में धान खरीद में देरी की मुख्य वजह क्या है?
धान खरीद में देरी के पीछे अधिक नमी, चावल मिलर्स की सीमित भागीदारी, खरीद संबंधी प्रक्रियाओं में देरी और मंडियों से खरीदे गए धान का धीमा उठान जैसे कारण सामने आए हैं।
हरियाणा में 2026-27 के लिए धान का MSP कितना है?
सामान्य धान का MSP ₹2,441 प्रति क्विंटल और ग्रेड-A धान का MSP ₹2,461 प्रति क्विंटल है। वास्तविक खरीद के लिए निर्धारित गुणवत्ता मानकों को भी पूरा करना जरूरी है।
सरकारी खरीद में धान की नमी कितनी होनी चाहिए?
हरियाणा की खरीद व्यवस्था पर प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, स्वीकार्य अधिकतम नमी सीमा 17% बताई गई है। किसान अपनी मंडी और खरीद एजेंसी के लागू मानकों की पुष्टि जरूर करें।
क्या हरियाणा में किसान प्रति एकड़ तय सीमा से अधिक धान नहीं बेच सकते?
कुछ किसानों ने प्रति एकड़ खरीद सीमा और सत्यापन संबंधी समस्याओं की शिकायत की है। लेकिन किसी निश्चित सीमा को पूरे हरियाणा में लागू सार्वभौमिक नियम मानने से पहले संबंधित सरकारी आदेश और किसान के रिकॉर्ड की जांच जरूरी है।
MSP से कम कीमत मिलने पर किसान क्या कर सकते हैं?
किसान अपनी तौल पर्ची, खरीद रसीद, गुणवत्ता जांच रिपोर्ट और भुगतान रिकॉर्ड सुरक्षित रखें। समस्या होने पर संबंधित मंडी समिति, खरीद एजेंसी या जिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग से शिकायत कर सकते हैं।
पंजाब में धान खरीद को लेकर क्या चिंता है?
पंजाब में 2026-27 के लिए केंद्र का खरीद लक्ष्य 180 लाख टन निर्धारित किया गया है। किसानों को आशंका है कि बंपर पैदावार और मंडीवार लक्ष्य के कारण खरीद व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।
धान खरीद की ताजा स्थिति कहां चेक करें?
किसान केंद्रीय खाद्यान्न खरीद पोर्टल CFPP और हरियाणा के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग पर उपलब्ध जानकारी देख सकते हैं। स्थानीय मंडी समिति से खरीद की तारीख, एजेंसी और दस्तावेजों की पुष्टि भी करें।
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