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अगर आप खरीफ सीजन 2026 में सोयाबीन की खेती (Soybean cultivation in the Kharif season of 2026) से अच्छी कमाई करना चाहते हैं, तो सबसे पहले अपनी जमीन और क्षेत्र के अनुसार सही बीज किस्म का चुनाव करना जरूरी है। देश के अलग-अलग राज्यों की जलवायु और मिट्टी को ध्यान में रखते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और कई कृषि विश्वविद्यालयों ने सोयाबीन की कई नई और उन्नत किस्में विकसित की हैं।

इन किस्मों की खासियत यह है कि ये कम अवधि में तैयार हो जाती हैं, प्रमुख कीट एवं रोगों का बेहतर तरीके से सामना करती हैं और कम खर्च में अधिक उत्पादन देने की क्षमता रखती हैं। यही कारण है कि इन नई वैरायटी को अपनाकर किसान अपनी उपज और मुनाफे दोनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी कर सकते हैं। अधिक कृषि जानकारी के लिए Bihar Agro पर विजिट कर सकते हैं।
सोयाबीन की बेहतर किस्म कैसे चुनें? जानिए जरूरी बातें
खरीफ सीजन 2026 में सोयाबीन की खेती (Soybean cultivation in the Kharif season of 2026) की अच्छी पैदावार काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि किसान किस किस्म का चयन करते हैं। बीज चुनने से पहले कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है, ताकि उत्पादन बढ़े और खेती अधिक लाभदायक बन सके।
1. अपने क्षेत्र और मौसम के अनुसार किस्म चुनें
हर राज्य और कृषि-जलवायु क्षेत्र की मिट्टी एवं मौसम अलग-अलग होते हैं। इसलिए किसानों को अपने क्षेत्र के लिए अनुशंसित और सरकार द्वारा अधिसूचित (नोटिफाइड) सोयाबीन किस्मों का ही चयन करना चाहिए। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि कम से कम 2 से 3 ऐसी किस्में लगानी चाहिए, जो अलग-अलग अवधि में तैयार होती हों। इससे मौसम संबंधी जोखिम कम हो जाता है।
2. फसल चक्र को ध्यान में रखें
सोयाबीन के बाद कौन-सी फसल बोनी है, यह तय करता है कि कौन-सी वैरायटी आपके लिए बेहतर रहेगी।
कम अवधि में पकने वाली किस्में:
यदि आप सोयाबीन की कटाई के बाद आलू, प्याज, लहसुन जैसी नगदी फसलें लगाते हैं और फिर गेहूं या चना की खेती करते हैं, तो जल्दी तैयार होने वाली सोयाबीन किस्मों का चयन करना अधिक फायदेमंद रहेगा।
मध्यम और लंबी अवधि वाली किस्में:
जो किसान साल में केवल दो फसलें लेते हैं, जैसे खरीफ में सोयाबीन और रबी में गेहूं या चना, वे अधिक उत्पादन देने वाली मध्यम या देर से पकने वाली किस्मों को चुन सकते हैं। इन किस्मों में पैदावार की संभावना अधिक रहती है।
3. कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेना न भूलें
यदि आपको यह तय करने में परेशानी हो रही है कि आपके जिले के लिए कौन-सी किस्म सबसे उपयुक्त रहेगी, तो अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), कृषि विभाग के अधिकारियों या विकासखंड स्तर के कृषि विशेषज्ञों से संपर्क करें। स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार उनकी सलाह बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफा दिलाने में मदद कर सकती है।

अपने राज्य के हिसाब से चुनें सही सोयाबीन वैरायटी
मध्य क्षेत्र (Central Zone) के किसानों के लिए उपयुक्त किस्में
खरीफ सीजन 2026 में सोयाबीन की खेती (Soybean cultivation in the Kharif season of 2026): देश के मध्य कृषि-जलवायु क्षेत्र में खेती करने वाले किसानों के लिए कुछ विशेष सोयाबीन किस्मों की सिफारिश की जाती है। इस क्षेत्र में मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश का बुंदेलखंड इलाका और उत्तर-पश्चिमी महाराष्ट्र शामिल हैं। इन राज्यों की मिट्टी और मौसम को ध्यान में रखते हुए विकसित की गई सोयाबीन किस्में बेहतर उत्पादन देने के साथ-साथ रोग और प्रतिकूल परिस्थितियों का भी अच्छी तरह सामना करती हैं।
| सोयाबीन की उन्नत किस्म | औसत परिपक्वता अवधि (दिन) | औसत उत्पादन (क्विंटल/हेक्टेयर) |
| JS 24-33 | 90 | 22-23 |
| NRC 150 | 91 | 18 |
| JS 21-72 | 97 | 21 |
| NRC 147 | 96 | 23 |
| JS 23-03 | 93 | 23 |
| JS 23-09 | 92 | 21 |
| MAUS 731 (मराठवाड़ा) | 105 | 28 |
| JS 22-12 | 90 | 21 |
| JS 22-16 | 91 | 21 |
| NRC 165 | 90 | 19 |
| NRC 157 | 93 | 16 |
| MAUS 725 (Maharashtra*) | 92-96 | 24 |
| Phule Durva (KDS 992 Maharashtra*) | 101 | 27 |
| RVSM 2011-35 | 98 | 22 |
| AMS 100-39 (PDKV Amba) | 97 | 21 |
| MACS 1520 | 98-120 | 22 |
| RSC 10-46 | 102 | 19 |
| RSC 10-52 | 101 | 21 |
| AMS–MB-5-18 (सुवर्ण सोया) | 100 | 20 |
| NRC 181 | 93 | 16-17 |
उत्तरी मैदानी क्षेत्र (Northern Plain Zone) के लिए उपयुक्त सोयाबीन किस्में
खरीफ सीजन 2026 में सोयाबीन की खेती (Soybean cultivation in the Kharif season of 2026): उत्तरी भारत के मैदानी इलाकों में खेती करने वाले किसानों को अपने क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी के अनुरूप सोयाबीन की किस्मों का चयन करना चाहिए। यह कृषि क्षेत्र मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश के पूर्वी मैदानी भाग, उत्तराखंड के तराई एवं मैदानी क्षेत्र तथा पूर्वी बिहार को शामिल करता है। इन राज्यों के लिए विकसित और अनुशंसित सोयाबीन किस्में बेहतर उत्पादन, रोग प्रतिरोधक क्षमता और मौसम की अनिश्चितताओं को सहन करने की विशेषता रखती हैं, जिससे किसानों को अधिक उपज और बेहतर मुनाफा प्राप्त करने में मदद मिलती है।
| सोयाबीन की उन्नत किस्म | औसत परिपक्वता अवधि (दिन) | औसत उत्पादन (क्विंटल/हेक्टेयर) |
| Pusa Soybean 21 | – | – |
| NRC 149 | 125 | 26 |
| Pant Soybean 27 (PS 1670) | 122 | 23 |
| SL 1074 | 124 | 19 |
| SL 1028 | 124 | 21 |
| NRC 128 | 110 | 22 |
| Uttarakhand Black Soybean (Bhat 202) | 100-115 | 16 |
| SL 979 | 127 | 24 |
| SL 955 | 126 | 22 |
| Pant Soybean 26 (PS 1572) | 120 | 20 |
| PS 1368 | 117-125 | 21 |
| PS 24 (PS 1477) | 113 | 26 |
पूर्वी एवं उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के किसानों के लिए उपयुक्त सोयाबीन किस्में
खरीफ सीजन 2026 में सोयाबीन की खेती (Soybean cultivation in the Kharif season of 2026): पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत के कई राज्यों में जलवायु, वर्षा और मिट्टी की परिस्थितियां अन्य क्षेत्रों से काफी अलग होती हैं। इन्हीं विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए इस कृषि क्षेत्र के लिए अलग-अलग सोयाबीन किस्मों की सिफारिश की जाती है। इस जोन में छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, मणिपुर, नागालैंड और सिक्किम जैसे राज्य शामिल हैं। इन क्षेत्रों के किसानों को ऐसी सोयाबीन वैरायटी का चयन करना चाहिए, जो अधिक नमी, स्थानीय मौसम और प्रमुख रोगों के प्रति बेहतर सहनशीलता रखती हो, ताकि कम जोखिम में अधिक उत्पादन और बेहतर आय प्राप्त की जा सके।
| सोयाबीन की उन्नत किस्म | औसत परिपक्वता अवधि (दिन) | औसत उत्पादन (क्विंटल/हेक्टेयर) |
| RSC 11-35 | 107 | 24 |
| RSC 10-71 | 107 | 19 |
| RSC 10-52 | 101 | 20 |
| Birsa Soya-4 (झारखंड) | 115-120 | 20 |
| MACS 1407 | 104 | 21 |
| MACS 1460 | 97 | 23 |
| NRC 128 | 110 | 23 |
| RSC 11-07 | 107 | 17 |
| RSC 10-46 | 98-103 | 19 |

उत्तर पहाड़ी क्षेत्र (Northern Hill Zone) के लिए उपयुक्त सोयाबीन किस्में
खरीफ सीजन 2026 में सोयाबीन की खेती (Soybean cultivation in the Kharif season of 2026): पर्वतीय इलाकों में खेती की परिस्थितियां मैदानी क्षेत्रों से काफी अलग होती हैं। यहां का तापमान, वर्षा और मिट्टी की प्रकृति को देखते हुए विशेष प्रकार की सोयाबीन किस्मों की सिफारिश की जाती है। इस कृषि क्षेत्र में मुख्य रूप से हिमाचल प्रदेश तथा उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के पर्वतीय जिले शामिल हैं। इन क्षेत्रों के किसानों को ऐसी सोयाबीन वैरायटी अपनानी चाहिए, जो कम तापमान और पहाड़ी परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन करे, रोगों के प्रति अधिक सहनशील हो और स्थिर एवं अच्छी पैदावार देने में सक्षम हो।
| सोयाबीन की उन्नत किस्म | औसत परिपक्वता अवधि (दिन) | औसत उत्पादन (क्विंटल/हेक्टेयर) |
| शालीमार सोयाबीन-3 (SKAU–S-3) | – | – |
| NRC 197 | 113 | 16 |
| VLS 99 | 118 | 24 |
| Him Palam Soya-1 (हिमाचल प्रदेश) | – | 23 |
| Pant Soybean 25 (PS 1556) | 120 | 23 |
| Shalimar Soybean-1 (J&K) | 140-145 | 22 |
दक्षिणी क्षेत्र (Southern Zone) के किसानों के लिए अनुशंसित सोयाबीन किस्में
खरीफ सीजन 2026 में सोयाबीन की खेती (Soybean cultivation in the Kharif season of 2026): दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों में जलवायु, तापमान और वर्षा की स्थिति को ध्यान में रखते हुए सोयाबीन की कुछ विशेष किस्मों की सिफारिश की गई है। इस कृषि क्षेत्र में मुख्य रूप से कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र के दक्षिणी जिले शामिल हैं। यहां के किसानों को ऐसी सोयाबीन वैरायटी का चयन करना चाहिए, जो स्थानीय मौसम के अनुरूप बेहतर उत्पादन दे, सूखा और प्रमुख रोगों को सहन करने की क्षमता रखती हो तथा कम लागत में अधिक उपज सुनिश्चित कर सके।
| सोयाबीन की उन्नत किस्म | औसत परिपक्वता अवधि (दिन) | औसत उत्पादन (क्विंटल/हेक्टेयर) |
| ALSB 50 (तेलंगाना) | 99 | 24 |
| MAUS 725 (महाराष्ट्र) | 92-96 | 24 |
| Phule Durva (KDS 992 Maharashtra*) | 101 | 27 |
| NRCMACS 1667 | 96 | 21 |
| NRC 142 | 96 | 22 |
| MACS 1460 | 89 | 21 |
| NRC 132 | 99 | 17 |
| DSb 34 | 95 | 27 |
| KDS 753 (फूले किमया) | 96-97 | 25 |
| KBS 23 (कर्नाटक) | 92 | 25 |
| KDS 726 (फुले संगम) | 96-97 | 24 |
FAQ: खरीफ सीजन 2026 में सोयाबीन की खेती (Soybean cultivation in the Kharif season of 2026) से जुड़े सवाल
खरीफ 2026 के लिए सोयाबीन की सबसे अच्छी किस्म कौन-सी है?
यह आपके राज्य, मिट्टी और जलवायु पर निर्भर करता है। मध्य भारत में JS-95-60, JS-20-34 और NRC-150 जैसी किस्में लोकप्रिय हैं, जबकि पूर्वी और दक्षिणी राज्यों के लिए अलग-अलग अनुशंसित किस्में उपलब्ध हैं।
सोयाबीन की किस्म चुनते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
किसानों को अपने क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी, वर्षा, फसल चक्र और पकने की अवधि को ध्यान में रखकर ही बीज का चयन करना चाहिए।
जल्दी पकने वाली सोयाबीन किस्में किस किसानों के लिए बेहतर हैं?
जो किसान सोयाबीन की कटाई के बाद आलू, प्याज, लहसुन, गेहूं या चना जैसी दूसरी फसलें लेना चाहते हैं, उनके लिए शीघ्र अवधि में तैयार होने वाली किस्में अधिक फायदेमंद रहती हैं।
सोयाबीन की नई उन्नत किस्मों की खासियत क्या है?
नई किस्में अधिक उत्पादन देने, रोग एवं कीटों का बेहतर सामना करने और कम समय में पकने की क्षमता रखती हैं, जिससे किसानों की लागत कम और मुनाफा अधिक होता है।
सोयाबीन की खेती के लिए कौन-सी मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है?
अच्छी जल निकासी वाली दोमट और मध्यम काली मिट्टी सोयाबीन की खेती के लिए सबसे बेहतर मानी जाती है। मिट्टी का pH 6.0 से 7.5 के बीच होना चाहिए।
सोयाबीन की बुवाई का सही समय क्या है?
मानसून की पहली अच्छी बारिश के बाद जून के अंतिम सप्ताह से लेकर जुलाई के मध्य तक सोयाबीन की बुवाई करना सबसे उपयुक्त माना जाता है।
क्या एक ही खेत में हर साल एक ही सोयाबीन किस्म लगानी चाहिए?
नहीं, लगातार एक ही किस्म लगाने से रोग और कीटों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए समय-समय पर किस्मों में बदलाव करना लाभदायक रहता है।
अपने जिले के लिए सही सोयाबीन किस्म की जानकारी कहां से प्राप्त करें?
किसान अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), कृषि विभाग के कार्यालय या कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों से संपर्क करके अपने क्षेत्र के लिए अनुशंसित किस्मों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
क्या नई सोयाबीन किस्मों से उत्पादन में बढ़ोतरी होती है?
हां, यदि अनुशंसित तकनीकों के साथ उन्नत किस्मों की खेती की जाए, तो पारंपरिक किस्मों की तुलना में अधिक उपज और बेहतर गुणवत्ता प्राप्त की जा सकती है।
खरीफ सीजन 2026 में सोयाबीन की खेती (Soybean cultivation in the Kharif season of 2026) में अधिक मुनाफे के लिए किसानों को क्या करना चाहिए?
प्रमाणित बीज का उपयोग करें, अपने क्षेत्र के अनुसार सही किस्म चुनें, समय पर बुवाई करें और कृषि वैज्ञानिकों द्वारा सुझाए गए पोषक तत्व एवं कीट प्रबंधन उपाय अपनाएं।
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