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रबी सीजन की शुरुआत के साथ ही देशभर के किसान गेहूं और जौ की खेती की तैयारी में जुट गए हैं। ऐसे में किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (IIWBR), करनाल ने रबी सीजन 2026-27 के लिए 1 से 15 नवंबर तक की पहली कृषि एडवाइजरी जारी कर दी है।
संस्थान ने इस सलाह में बताया है कि किस क्षेत्र में गेहूं और जौ की कौन-सी किस्म लगानी चाहिए, बुवाई का सही समय क्या है और प्रति हेक्टेयर कितने बीज, खाद और उर्वरक की जरूरत पड़ेगी। इसके अलावा गुल्ली डंडा जैसे खरपतवारों को नियंत्रित करने के तरीके भी बताए गए हैं।
Wheat Barley Sowing Advisory 2026 उन किसानों के लिए काफी महत्वपूर्ण है, जो इस साल बेहतर उत्पादन के साथ खेती की लागत को भी नियंत्रित रखना चाहते हैं।
Wheat Barley Sowing Advisory 2026: नवंबर में बुवाई की तारीख समझना जरूरी
ICAR-IIWBR की सलाह के अनुसार गेहूं की अगेती बुवाई के लिए नवंबर का पहला सप्ताह महत्वपूर्ण है। इसके बाद सिंचित परिस्थितियों में समय पर बुवाई के लिए 20 नवंबर तक की अवधि को ध्यान में रखना चाहिए।
किसानों को यह समझना जरूरी है कि हर क्षेत्र में एक जैसी बुवाई की तारीख और किस्में लागू नहीं होतीं। पंजाब, हरियाणा, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की जलवायु तथा मिट्टी अलग-अलग है।
इसलिए अपने क्षेत्र के लिए अनुशंसित किस्म का ही चुनाव करें। प्रमाणित बीज खरीदें और खेत में पर्याप्त नमी होने पर ही बुवाई करें।

गेहूं की खेती में इन उन्नत किस्मों से करें शुरुआत
संस्थान ने अलग-अलग कृषि जलवायु क्षेत्रों के अनुसार गेहूं की किस्मों की सूची जारी की है।
1. उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र
इस क्षेत्र में पंजाब, हरियाणा, उत्तरी राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश शामिल हैं।
अगेती सिंचित बुवाई के लिए DBW 187, DBW 303, WH 1270, DBW 327, DBW 332, PBW 872, DBW 370, DBW 371 और DBW 372 जैसी किस्में सुझाई गई हैं।
समय पर सिंचित बुवाई के लिए NICRA पूसा गेहूं 3471 (HD 3471), DBW 187, DBW 222, HD 3406, HD 3386, PBW 826, HD 3226, HD 3086 और WH 1105 प्रमुख विकल्प हैं।
2. मध्य क्षेत्र के किसान चुनें ये किस्में
मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान के उदयपुर एवं कोटा क्षेत्र के किसानों के लिए DBW 187, DBW 303, DBW 327, DBW 445, JW 1399, PBW 906, HD 3463 और GW 543 जैसी किस्में अगेती बुवाई के लिए सुझाई गई हैं।
समय पर बुवाई के लिए HI 1636, HI 1669, MACS 6768, GW 366, GW 555, MACS 6837, HI 1683, HI 8850 और MACS 4135 जैसी किस्मों का विकल्प दिया गया है।

3. बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसान ध्यान दें
बिहार के किसान उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्र में आते हैं। इस क्षेत्र के लिए समय पर सिंचित बुवाई के तहत DBW 187, PBW 826, HD 3411, DBW 222, HD 3086, K 1006, PBW 915 और DBW 386 जैसी किस्मों की सिफारिश की गई है।
इसलिए बिहार के किसानों को बीज खरीदते समय इन किस्मों को प्राथमिकता देनी चाहिए। स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र से अपने जिले के अनुसार किस्म की उपयुक्तता जरूर जांच लें।
4. महाराष्ट्र और कर्नाटक के लिए किस्में
प्रायद्वीपीय क्षेत्र में DBW 168, MACS 6478, UAS 304, MACS 6222, PBW 891, HI 8849, MACS 4135, AKAW 5100, DBW 443, NWS 2222 और WH 1306 की सिफारिश की गई है।
गेहूं की बीज दर और खाद का सही हिसाब रखें
अच्छी फसल के लिए केवल उन्नत किस्म का बीज खरीदना पर्याप्त नहीं है। खेत में बीज की सही मात्रा और संतुलित पोषण देना भी जरूरी है।
ICAR-IIWBR के अनुसार सिंचित और समय पर बुवाई की स्थिति में गेहूं की सामान्य बीज दर 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रखी गई है।
उर्वरक की अनुशंसित मात्रा इस प्रकार है:
- उत्तर-पश्चिमी और उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्र में 150:60:40 किलोग्राम NPK प्रति हेक्टेयर।
- मध्य और प्रायद्वीपीय क्षेत्र में 120:60:40 किलोग्राम NPK प्रति हेक्टेयर।
NOTE: यहां N का मतलब नाइट्रोजन, P का मतलब फॉस्फोरस और K का मतलब पोटाश है।
नाइट्रोजन की एक-तिहाई मात्रा तथा फॉस्फोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बुवाई के समय दें। बची हुई नाइट्रोजन को दो बराबर हिस्सों में बांटकर पहली और दूसरी सिंचाई के समय डालें।
यूरिया को सिंचाई से ठीक पहले देना बेहतर रहेगा। हालांकि मिट्टी की जांच और स्थानीय कृषि सलाह के अनुसार उर्वरक की मात्रा में बदलाव किया जा सकता है।
गुल्ली डंडा खरपतवार से गेहूं की फसल को बचाएं
गेहूं में गुल्ली डंडा यानी Phalaris minor एक प्रमुख खरपतवार है। समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो यह फसल के साथ पोषक तत्वों, पानी और जगह के लिए प्रतिस्पर्धा करता है।
संस्थान की एडवाइजरी में बुवाई के 0 से 3 दिन के भीतर निम्न विकल्प बताए गए हैं:
- पायरोक्सासल्फोन 85 WG की 60 ग्राम प्रति एकड़ मात्रा।
- पायरोक्सासल्फोन के साथ पेंडीमेथालिन 30 EC का 2 लीटर प्रति एकड़ विकल्प।
- एक्लोनिफेन, डाइफ्लुफेनिकन और पायरोक्सासल्फोन का तैयार मिश्रण 800 मिलीलीटर प्रति एकड़।
छिड़काव के लिए 150 से 200 लीटर पानी प्रति एकड़ की मात्रा बताई गई है। साफ मौसम में छिड़काव करें। बारिश, कोहरा और ओस की स्थिति में छिड़काव न करें।
ध्यान रखें कि खरपतवारनाशी का इस्तेमाल उत्पाद के पंजीकृत लेबल, फसल की अवस्था और कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही करें। अलग-अलग दवाओं को अपनी तरफ से मिलाकर प्रयोग न करें।

जौ की खेती करने वाले किसान भी जान लें नई किस्में
गेहूं के साथ-साथ ICAR ने जौ की खेती के लिए भी क्षेत्रवार किस्मों की जानकारी दी है।
- उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र में सिंचित बुवाई के लिए 10 से 25 नवंबर का समय बताया गया है।
- यहां फीड जौ के लिए DWRB 137 और BH 946, छिलका रहित जौ के लिए PL 891 और DWRB 223 तथा दोहरे उपयोग के लिए RD 2715 और RD 2552 की सिफारिश की गई है।
- माल्ट जौ के लिए DWRB 219, DWRUB 52, RD 2849, DWRB 123, DWRB 101 और DWRB 182 जैसी किस्में दी गई हैं।
- उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्र यानी बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, झारखंड और आसपास के इलाकों में सिंचित बुवाई के लिए DWRB 137, HUB 113, K 1149, NDB 943, RD 2715 और RD 2552 प्रमुख किस्में हैं।
- बारानी खेती के लिए K 603 और लखन किस्मों का विकल्प दिया गया है। मध्य क्षेत्र में DWRB 137, RD 2899, PL 891, DWRB 223, RD 2715 और RD 2552 की सिफारिश की गई है।
- लवणीय और क्षारीय मिट्टी में NDB 1173, RD 2794 और RD 2907 उपयोगी विकल्प हैं।
- पहाड़ी क्षेत्रों में BHS 400, HBL 113 और VLB 118 जैसी फीड जौ की किस्में बताई गई हैं।
जौ की बुवाई में बीज उपचार और खाद को न करें नजरअंदाज
जौ की खेती में सामान्य बीज दर 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रखी गई है।
- दीमक से बचाव के लिए संस्थान ने 100 किलोग्राम बीज पर 150 मिलीलीटर क्लोरपायरीफॉस 20 EC को 5 लीटर पानी में घोलकर बीज उपचार का उल्लेख किया है।
- कंडुआ रोग से बचाव के लिए थीरम और बाविस्टिन या विटावैक्स को 1:1 अनुपात में मिलाकर 2.5 ग्राम प्रति किलो बीज की दर बताई गई है। विकल्प के रूप में टेबुकोनाजोल 2 ग्राम प्रति किलो बीज दिया गया है।
- जैव उर्वरक के रूप में एजोटोबैक्टर और PSB से 10-20 मिलीलीटर प्रति किलो बीज की दर से उपचार की सलाह भी दी गई है।
- खाद की बात करें तो फीड और छिलका रहित जौ के लिए 60:30:20 किलो NPK प्रति हेक्टेयर की मात्रा बताई गई है। उत्तर-पश्चिमी और उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्रों में माल्ट जौ के लिए 90:30:20 किलो NPK प्रति हेक्टेयर देना चाहिए।
- नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फॉस्फोरस-पोटाश की पूरी मात्रा बुवाई के समय दें। बाकी नाइट्रोजन पहली सिंचाई के समय डालें।
- जौ में खरपतवार नियंत्रण के लिए बुवाई के 0 से 3 दिन के भीतर पेंडीमेथालिन 30 EC की 1.5 से 2 लीटर प्रति एकड़ मात्रा 150 से 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़कने की सलाह दी गई है।
किसानों के लिए ICAR की सात जरूरी बातें
Wheat Barley Sowing Advisory 2026 में केवल बीज और खाद की जानकारी ही नहीं, बल्कि खेती के सही प्रबंधन पर भी जोर दिया गया है।
- अपने क्षेत्र के लिए अनुशंसित किस्म का ही चुनाव करें।
- प्रमाणित और अच्छी गुणवत्ता वाला बीज खरीदें।
- धान की कटाई के बाद खेत में फसल अवशेष समान रूप से फैले हों तो हैप्पी सीडर या स्मार्ट सीडर से सीधी बुवाई कर सकते हैं।
- फसल अवशेषों को खेत में न जलाएं।
- बुवाई से पहले मिट्टी की जांच जरूर कराएं।
- सिंचाई जरूरत के अनुसार करें और पानी की बर्बादी रोकें।
- खाद, खरपतवारनाशी और फफूंदनाशी का संतुलित इस्तेमाल करें।
इस बार सही समय पर बुवाई ही बेहतर पैदावार की पहली तैयारी
रबी सीजन 2026-27 में किसानों के लिए सबसे जरूरी है कि वे बुवाई में अनावश्यक देरी न करें। सही समय पर बोई गई फसल को बढ़वार और दाना बनने के लिए बेहतर परिस्थितियां मिल सकती हैं। वहीं देरी होने पर पकने के समय अधिक गर्मी का असर पड़ सकता है।
Wheat Barley Sowing Advisory 2026 के मुताबिक किस्म का चुनाव, बीज दर, उर्वरक और खरपतवार नियंत्रण चारों बातों पर ध्यान देना जरूरी है।
बिहार के किसानों के लिए विशेष रूप से सलाह है कि वे उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्र की अनुशंसित किस्में ही चुनें। बीज खरीदने से पहले अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग से जानकारी लें।
इस तरह सही तकनीक और संतुलित प्रबंधन अपनाकर किसान रबी सीजन में फसल की अच्छी शुरुआत कर सकते हैं।
ये भी पढ़ें: गेहूं की बुवाई में देर न करें! बुंदेलखंड के किसानों के लिए 6 उन्नत किस्मों और बेहतर पैदावार
Wheat Barley Sowing Advisory से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल
गेहूं की बुवाई का सबसे अच्छा समय क्या है?
ICAR-IIWBR की 2026-27 एडवाइजरी के अनुसार क्षेत्र के हिसाब से बुवाई करें। अगेती बुवाई के लिए नवंबर का पहला सप्ताह और सिंचित समय पर बुवाई के लिए 20 नवंबर तक की अवधि बताई गई है।
बिहार में गेहूं की कौन-सी किस्म लगानी चाहिए?
बिहार के उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्र के लिए DBW 187, PBW 826, HD 3411, DBW 222, HD 3086, K 1006, PBW 915 और DBW 386 की सिफारिश की गई है।
गेहूं की बुवाई के लिए प्रति हेक्टेयर कितना बीज चाहिए?
सिंचित और समय पर बुवाई की स्थिति में सामान्य बीज दर 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है।
गेहूं की फसल में NPK की कितनी मात्रा डालनी चाहिए?
पश्चिमी और उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्रों के लिए 150:60:40 किलो NPK प्रति हेक्टेयर तथा मध्य और प्रायद्वीपीय क्षेत्रों के लिए 120:60:40 किलो NPK प्रति हेक्टेयर की सिफारिश है।
गेहूं में गुल्ली डंडा खरपतवार को कैसे नियंत्रित करें?
बुवाई के 0-3 दिन के भीतर उपयुक्त अनुशंसित खरपतवारनाशी का इस्तेमाल किया जा सकता है। दवा का चयन फसल, मिट्टी और उत्पाद के लेबल के अनुसार करें।
जौ की बुवाई के लिए कितने किलो बीज की जरूरत होती है?
ICAR-IIWBR की सलाह के अनुसार जौ की सामान्य बीज दर 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है।
बिहार में जौ की खेती के लिए कौन-सी किस्में अच्छी हैं?
पूर्वी मैदानी क्षेत्र की सिंचित खेती के लिए DWRB 137, HUB 113, K 1149, NDB 943, RD 2715 और RD 2552 की सिफारिश की गई है। बारानी खेती के लिए K 603 और लखन का विकल्प है।
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