अरहर के बीज (Pigeon Pea Seeds): उन्नत खेती और बंपर पैदावार की पूरी जानकारी

5/5 - (2 votes)
अरहर के बीज, pigeon pea seeds, अरहर बीज कीमत, best pigeon pea seeds, arhar seed rate,

किसान भाइयों, आज हम बात करने वाले हैं अरहर के बीज (Pigeon Pea Seeds) के बारे में। अगर आप अरहर की खेती से अच्छा उत्पादन और ज्यादा मुनाफा चाहते हैं, तो सबसे पहली और सबसे ज़रूरी चीज़ है उन्नत और शुद्ध अरहर के बीज (Pigeon Pea Seeds)। सही बीज ही पूरी फसल की नींव होता है। इस लेख में हम बीज की पहचान, किस्में, बीज दर, बीज उपचार और खरीद से जुड़ी हर जरूरी जानकारी आसान भाषा में बताएँगे।

अरहर के बीज क्या हैं? (What are Pigeon Pea Seeds?)

अरहर के बीज का सही चुनाव (Right Selection of Pigeon Pea Seeds)

किसान भाइयों, फसल की सफलता 50% इस बात पर निर्भर करती है कि आपने अरहर के बीज (Pigeon Pea Seeds) कैसे चुने हैं। हमेशा अपनी मिट्टी और जलवायु के हिसाब से ही किस्मों का चयन करें। अगर आपके क्षेत्र में पानी की कमी है, तो जल्दी पकने वाली किस्मों का चुनाव करें। बाजार में मिलने वाले हाइब्रिड अरहर के बीज (Pigeon Pea Seeds) ज्यादा पैदावार देते हैं, लेकिन देसी बीजों में रोगों से लड़ने की क्षमता अधिक होती है। अच्छी गुणवत्ता वाले अरहर के बीज (Pigeon Pea Seeds) वही हैं जो साफ हों, कटे-फटे न हों और जिनमें नमी की मात्रा सही हो।

उन्नत अरहर बीज की पहचान (Quality Pigeon Pea Seeds Identification)

अच्छे अरहर के बीज (Pigeon Pea Seeds) की पहचान करना बहुत ज़रूरी है। बीज साफ, एकसमान आकार के और चमकदार होने चाहिए। टूटे, सिकुड़े या फफूंद लगे बीज कभी न लें।
किसान भाइयों, बीज खरीदते समय हमेशा सरकारी या प्रमाणित एजेंसी का टैग देखें। पैकेट पर अंकुरण प्रतिशत (Germination Rate) 80% से ज्यादा होना चाहिए। याद रखें—सस्ता बीज अक्सर महंगा नुकसान देता है।

अरहर के बीज की प्रमुख किस्में (Best Pigeon Pea Seed Varieties in India)

भारत में कई उन्नत तूर के बीज (Tur Seeds) उपलब्ध हैं जैसे—UPAS 120, PUSA 992, Asha (ICPL 87119), और Narendra Arhar-1।
ये किस्में कम समय में तैयार होती हैं और कीट-रोगों से बेहतर बचाव देती हैं। उत्तर भारत और बिहार जैसे क्षेत्रों में Asha और PUSA 992 बहुत लोकप्रिय हैं। सही किस्म चुनने से उत्पादन सीधा 25–30% तक बढ़ सकता है।

अरहर के बीज की मात्रा (Pigeon Pea Seed Rate per Acre)

किसान भाइयों, एक एकड़ खेत के लिए तूर के बीज (Tur Seeds) की मात्रा लगभग 6–8 किलो पर्याप्त होती है। देर से बोआई में यह मात्रा थोड़ी बढ़ सकती है।
सही बीज दर रखने से पौधों की दूरी संतुलित रहती है, जिससे हवा और धूप सही मिलती है। ज्यादा बीज डालने से पौधे कमजोर हो जाते हैं और उत्पादन घट जाता है।

अरहर बीज उपचार का सही तरीका (Pigeon Pea Seed Treatment Method)

बुवाई से पहले अरहर के बीज (Pigeon Pea Seeds) का उपचार करना बहुत जरूरी है। किसान भाइयों, अगर आप बिना उपचार किए अरहर के बीज (Pigeon Pea Seeds) बोते हैं, तो फसल में फफूंद लगने का डर रहता है। इसके लिए आप थिरम या कार्बेन्डाजिम (2-3 ग्राम प्रति किलो बीज) का प्रयोग करें। इसके बाद, अरहर के बीज (Pigeon Pea Seeds) को राइजोबियम कल्चर से भी उपचारित करें। इससे पौधों की जड़ों में गांठें अच्छी बनती हैं और मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है। जैविक खेती के लिए Trichoderma या Rhizobium से उपचार करें। उपचारित अरहर के बीज (Pigeon Pea Seeds) का अंकुरण प्रतिशत बहुत अच्छा होता है।

बुवाई का सही समय और तरीका (Sowing Time and Method)

अरहर की बुवाई का सबसे सटीक समय मानसून की पहली बारिश यानी जून के अंत से जुलाई के पहले सप्ताह तक होता है। अरहर के बीज (Pigeon Pea Seeds) को कतारों में बोना चाहिए। कतार से कतार की दूरी 60-75 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 15-20 सेमी रखनी चाहिए। ध्यान रहे कि अरहर के बीज (Pigeon Pea Seeds) को 4-5 सेमी से ज्यादा गहरा न बोएं, वरना अंकुरण में समस्या आ सकती है। सही दूरी पर बोए गए अरहर के बीज (Pigeon Pea Seeds) को फैलने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है, जिससे फलियां ज्यादा आती हैं।

अरहर के बीज कहां से खरीदें? (Where to Buy Pigeon Pea Seeds?)

अरहर के बीज, pigeon pea seeds, अरहर बीज कीमत, best pigeon pea seeds, arhar seed rate,

अरहर के बीज (Pigeon Pea Seeds) हमेशा विश्वसनीय स्रोत से ही खरीदें। सरकारी कृषि केंद्र, कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) और प्रमाणित निजी कंपनियाँ सबसे बेहतर विकल्प हैं।
ऑनलाइन खरीदते समय रिव्यू और कंपनी की विश्वसनीयता ज़रूर जांचें। नकली बीज से बचना ही असली मुनाफा है।

अरहर के बीज से जुड़े फायदे (Benefits of Pigeon Pea Seeds)

उन्नत अरहर के बीज (Pigeon Pea Seeds) लगाने से कम लागत में ज्यादा उत्पादन मिलता है। ये मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ाते हैं क्योंकि अरहर दलहनी फसल है।
इसके अलावा बाजार में अरहर दाल की मांग हमेशा बनी रहती है, जिससे किसानों को अच्छा भाव मिलता है।

सरकारी योजनाएँ और किसान क्रेडिट कार्ड (Government Schemes and KCC)

खेती में मुनाफ़ा बढ़ाने के लिए किसान सरकारी योजनाओं का भी लाभ उठा सकते हैं। ये योजनाएँ खेती की लागत को कम करने और पूंजी (Capital) की व्यवस्था करने में मदद करती हैं।

भारत सरकार और राज्य सरकारों द्वारा चलाई जाने वाली कई योजनाएँ हैं, जो किसानों को सब्ज़ी और बागवानी (Horticulture) फसलों के लिए सब्सिडी (Subsidy) देती हैं।

  1. राष्ट्रीय बागवानी मिशन (NHM): इस योजना के तहत, आलू की खेती के लिए उन्नत बीज, प्लांटर मशीन, कोल्ड स्टोरेज बनाने और माइक्रो-इरिगेशन सिस्टम लगाने पर सब्सिडी मिल सकती है।
  2. प्रधान मंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN): यह योजना सीधे किसानों के खाते में सालाना ₹6,000 की वित्तीय सहायता देती है, जिसका उपयोग किसान खेती के छोटे-मोटे ख़र्चों के लिए कर सकते हैं।

सबसे ज़रूरी है किसान क्रेडिट कार्ड (Kisan Credit Card – KCC)। केसीसी के ज़रिए किसान बहुत कम ब्याज दर पर (लगभग 4% प्रति वर्ष) खेती के लिए लोन (Loan) ले सकते हैं। इस पैसे का उपयोग आलू के बीज, खाद, कीटनाशक खरीदने या बुवाई के ख़र्चों को पूरा करने के लिए किया जा सकता है। इससे किसान को तुरंत पैसा उधार लेने या अपनी बचत को ख़र्च करने की ज़रूरत नहीं पड़ती। किसान को हमेशा अपने क्षेत्र के कृषि विभाग या बागवानी विभाग से संपर्क करके नवीनतम योजनाओं और सब्सिडी के बारे में जानकारी लेते रहना चाहिए।

निष्कर्ष: किसान भाइयों, उम्मीद है कि अरहर के बीज (Pigeon Pea Seeds) पर आधारित यह जानकारी आपके काम आएगी। खेती में बदलाव और सही तकनीक ही तरक्की का रास्ता है।

FAQ: अरहर के बीज (Pigeon Pea Seeds) पर अक्सर पूछे जाने वाले सवाल।

एकड़ के लिए कितने अरहर के बीज (Pigeon Pea Seeds) चाहिए?

सामान्यतः 1 एकड़ खेत के लिए 5 से 7 किलोग्राम अरहर के बीज (Pigeon Pea Seeds) पर्याप्त होते हैं।

सबसे ज्यादा पैदावार देने वाले अरहर के बीज (Pigeon Pea Seeds) कौन से हैं?

‘आईसीपीएच 2740’ और ‘पूसा 16’ वर्तमान में सबसे अधिक पैदावार देने वाली उन्नत किस्में मानी जाती हैं।

अरहर के बीज (Pigeon Pea Seeds) को कितने दिन में सिंचाई की जरूरत होती है?

बारिश न होने पर पहली सिंचाई फूल आने से पहले और दूसरी फलियां बनते समय करनी चाहिए।

अरहर की फसल कितने दिनों में तैयार होती है?

चुनी गई किस्म के आधार पर यह 120 दिन (जल्दी पकने वाली) से लेकर 200 दिन तक ले सकती है।

घर पर मशरूम कैसे उगाएं: पूरी जानकारी (How to Grow Mushroom at Home): Complete Guide घर पर मशरूम कैसे उगाएं, मशरूम की खेती कैसे करें, how to grow mushroom at home in hindi, mushroom farming at home, mushroom cultivation cost, button mushroom farming, bihar agro mushroom, low cost business ideas,

घर पर मशरूम कैसे उगाएं: पूरी जानकारी (How to Grow Mushroom at Home): Complete Guide

घर पर मशरूम कैसे उगाएं (How to Grow Mushroom at Home)मशरूम के प्रकार और सही चुनाव (Types of Mushrooms and…

मशरूम की खेती से 3 गुना कमाई का मौका (Mushroom Farming for High Profit) मशरूम की खेती, mushroom farming, oyster mushroom, button mushroom, mushroom profit, indoor farming,

मशरूम की खेती से 3 गुना कमाई का मौका (Mushroom Farming for High Profit)

मशरूम की खेती क्या है और क्यों फायदेमंद है? (What is Mushroom Farming & Why Profitable)मशरूम की मुख्य किस्में (Main…

गेहूं की कटाई (Wheat Harvesting) का सही समय और जरूरी सावधानियां गेहूं के कटाई में बरते सावधानियाँ, Wheat Harvesting Precautions, गेहूं कटाई सलाह,

गेहूं की कटाई (Wheat Harvesting) का सही समय और जरूरी सावधानियां

गेहूं के कटाई का सही समय कैसे पहचानें? (How to Identify Right Time for Wheat Harvesting?)कटाई के दौरान सुरक्षा और…

7 फरवरी से शुरू होगा गेहूं खरीद के लिए किसानों का रजिस्ट्रेशन, MSP 2585 रुपये घोषित। Wheat MSP Registration Process, गेहूं खरीदी के लिए MSP पंजीयन प्रक्रिया शुरू,Wheat MSP 2026,

7 फरवरी से शुरू होगा गेहूं खरीद के लिए किसानों का रजिस्ट्रेशन, MSP 2585 रुपये घोषित।

गेहूं खरीदी के लिए MSP पंजीयन प्रक्रिया शुरू (Wheat MSP Registration Process Begins)गेहूं के समर्थन मूल्य (Wheat MSP) में की…

गेहूँ में पीला रतुआ रोग (Yellow Rust Disease in Wheat): असरदार उपाय, पहचान और बचाव गेहूँ में पीला रतुआ रोग, Yellow Rust Disease in Wheat,

गेहूँ में पीला रतुआ रोग (Yellow Rust Disease in Wheat): असरदार उपाय, पहचान और बचाव

गेहूँ में पीला रतुआ रोग क्या है? (What is Yellow Rust Disease in Wheat)रोग फैलने के मुख्य कारण (Main Causes…

Leave a comment