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किसान भाइयों, चने की फसल में चना के उकठा रोग (Wilt Disease Prevent) सबसे खतरनाक बीमारी मानी जाती है। चना के उकठा रोग से कैसे करे रोकथाम (Wilt Disease Prevent) यह जानना बहुत जरूरी है, क्योंकि यह रोग जड़ों से हमला करता है और पूरी फसल को सुखा देता है। अगर समय पर चना के उकठा रोग से कैसे करे रोकथाम नहीं किया गया तो पैदावार 50% तक घट सकती है।
इस लेख उद्देश्य किसानों को अच्छी पैदावार और ज्यादा मुनाफा देना है। अगर ये लेख आपको पसंद आया तो इस लेख को ज्यादा से ज्यादा किसान भाइयों को शेयर करें जिससे ज्यादा से ज्यादा किसान भाई लाभ ले सकें। खेती-बाड़ी से जुड़े जानकारी के लिए Bihar Agro की वेबसाइट देखें।
चना के उकठा रोग से कैसे करे रोकथाम (Prevention of Wilt Disease in Chickpea)
हम सभी जानते हैं कि चने की खेती रबी के मौसम में मुनाफे का सौदा हो सकती है, लेकिन एक दुश्मन ऐसा है जो पूरी मेहनत पर पानी फेर सकता है—वह है ‘उकठा रोग’ (Wilt Disease)। इसे कई जगहों पर ‘सूखा रोग‘ भी कहते हैं। जब खेत में चने के पौधे अचानक पीले पड़कर सूखने लगते हैं, तो किसान भाई परेशान हो जाते हैं और सोचने लगते हैं कि चना के उकठा रोग से कैसे करे रोकथाम (Wilt Disease Prevent)?
अगर आप खेती-किसानी से जुड़ी और भी आधुनिक जानकारी चाहते हैं, तो आप Bihar Agro पर भी विजिट कर सकते हैं। चलिए, जानते हैं कि वैज्ञानिक और देसी तरीकों से अपनी फसल को कैसे बचाएं।
उकठा रोग क्या है? (What is Wilt Disease in Chickpea)
यह एक फफूंद जनित रोग है जो Fusarium नामक फंगस से फैलता है। National Horticulture Board का कहना है कि मिट्टी में रहने वाले रोगजनक कई साल तक जीवित रहते हैं। इसलिए चना के उकठा रोग से कैसे करे रोकथाम (Wilt Disease Prevent) पहले से सोचना जरूरी है।
उकठा रोग के लक्षण और पहचान (Symptoms and Identification of Wilt Disease)
सबसे पहले यह जानना जरुरी है कि यह बीमारी दिखती कैसी है। अक्सर किसान भाइयों को लगता है कि पानी की कमी से पौधा सूख रहा है। लेकिन ICAR – भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान (IIPR) के वैज्ञानिकों का कहना है कि यह एक फफूंद (Fungus) Fusarium oxysporum के कारण होता है। रोगग्रस्त पौधे अचानक सूखते हैं। सही समय पर पहचान = सही चना के उकठा रोग से कैसे करे रोकथाम।
इसकी पहचान ऐसे करें:
- पौधे अचानक मुरझाने लगते हैं।
- पत्तियां पीली पड़कर नीचे झुक जाती हैं।
- अगर आप पौधे को उखाड़कर उसकी जड़ को बीच से चीरेंगे, तो आपको काले या भूरे रंग की धारियां दिखाई देंगी।
| लक्षण (Symptoms) | पहचान (Identification) |
|---|---|
| पत्तियाँ पीली | ऊपर से नीचे सूखना |
| पौधा मुरझाना | पानी देने पर भी ठीक नहीं |
| जड़ काली | अंदर भूरा रंग |
अगर ये लक्षण दिखें, तो समझ लीजिये अब आपको चना के उकठा रोग से कैसे करे रोकथाम के लिए तुरंत कदम उठाने होंगे।
सही समय पर बुवाई और खेत की तैयारी (Sowing Time and Field Preparation)
खेती में “इलाज से बेहतर बचाव” होता है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय (Ministry of Agriculture & Farmers Welfare) की गाइडलाइन्स बताती हैं कि बुवाई का समय बहुत महत्वपूर्ण है। अगर आप अगेती बुवाई करते हैं और तापमान ज्यादा है, तो उकठा रोग का हमला ज्यादा होता है।
चना के उकठा रोग से कैसे करे रोकथाम के लिए ये करें:
- गहरी जुताई: गर्मियों में खेत की गहरी जुताई करें ताकि सूर्य की तेज धूप से मिट्टी में मौजूद फफूंद मर जाए।
- फसल चक्र (Crop Rotation): जिस खेत में पिछले साल उकठा लगा हो, वहां 3 साल तक चना न बोएं। ज्वार या बाजरा जैसी फसलें लें।
- बुवाई का समय: कोशिश करें कि बुवाई अक्टूबर के आखिरी सप्ताह या नवंबर के पहले पखवाड़े में करें जब तापमान थोड़ा कम हो जाए।
बीज उपचार है सबसे जरुरी (Seed Treatment is Most Important)

ज्यादातर किसान भाई बीज को बिना उपचारित किए बो देते हैं, जो सबसे बड़ी गलती है। चना के उकठा रोग से रोकथाम का सबसे सस्ता और टिकाऊ तरीका बीज उपचार ही है।
National Centre for Integrated Pest Management (NCIPM) की सलाह के अनुसार आप नीचे दी गई सारणी का पालन कर सकते हैं:
| उपचार का तरीका | दवाई का नाम | मात्रा (प्रति किलो बीज) |
| जैविक उपचार (Bio-agent) | ट्राइकोडर्मा विरिडी (Trichoderma Viride) | 5 से 10 ग्राम |
| रासायनिक उपचार | कार्बेन्डाजिम (Carbendazim) | 2 ग्राम |
| मिश्रित उपचार | थिरम + कार्बेन्डाजिम (2:1) | 3 ग्राम |
ध्यान रखें, पहले फफूंदनाशक (Fungicide) से उपचार करें, फिर राइजोबियम कल्चर (Rhizobium) का प्रयोग करें। इससे चना के उकठा रोग से कैसे करे रोकथाम में 80% तक मदद मिलती है। Krishi Vigyan Kendra (KVK) सलाह देता है कि बुवाई से पहले उपचार जरूरी है। चना के उकठा रोग से कैसे करे रोकथाम का यही असली तरीका है।
रोग प्रतिरोधी किस्मों का चयन (Selection of Disease Resistant Varieties)
अगर आप बार-बार उकठा रोग से परेशान हैं, तो आपको बीज बदलने की जरूरत है। हमारे देश के कृषि वैज्ञानिकों ने ऐसी किस्में तैयार की हैं जो इस बीमारी से लड़ सकती हैं। चना के उकठा रोग से कैसे करे रोकथाम के लिए सही बीज का चुनाव आधी जीत है।
कुछ प्रमुख उकठा निरोधी किस्में (Government Approved):
- JG-16: यह काफी लोकप्रिय है।
- JAKI-9218: यह सूखा और उकठा दोनों के लिए अच्छी है।
- दिग्विजय (Digvijay): अच्छी पैदावार और रोग प्रतिरोधक क्षमता।
- पूसा-362 (Pusa-362): उत्तर भारत के लिए उपयुक्त।
जब आप सरकारी बीज भंडार से बीज लें, तो प्रतिरोधी किस्म ही मांगें।
खेत प्रबंधन उपाय (Field Management Practices)
- जल निकास सही रखें
- 3 साल फसल चक्र अपनाएँ
- रोगग्रस्त पौधे उखाड़कर जलाएँ
कृषि विभाग बताता है कि जलभराव से रोग बढ़ता है। यह उपाय सीधे चना के उकठा रोग से कैसे करे रोकथाम में मदद करते हैं।
खड़ी फसल में रोकथाम के उपाय (Control Measures in Standing Crop)
कई बार बुवाई के बाद रोग के लक्षण दिखते हैं। ऐसे में किसान भाई पूछते हैं कि अब खड़ी फसल में चना के उकठा रोग से कैसे करे रोकथाम?
हालांकि खड़ी फसल में इसे पूरी तरह रोकना मुश्किल होता है, लेकिन इसे फैलने से बचाया जा सकता है:
- ड्रेंचिंग (Drenching): जहां पौधे सूख रहे हों, वहां कार्बेन्डाजिम (1 ग्राम प्रति लीटर पानी) का घोल बनाकर पौधों की जड़ों के पास डालें।
- सिंचाई प्रबंधन: खेत में पानी जमा न होने दें। भारी सिंचाई से बचें, क्योंकि नमी बढ़ने पर फफूंद तेजी से फैलती है।
सरकारी संस्था Directorate of Pulses Development का कहना है कि उकठा प्रभावित पौधों को उखाड़कर खेत से दूर जला देना चाहिए ताकि बीमारी स्वस्थ पौधों में न फैले। यह चना के उकठा रोग से कैसे करे रोकथाम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
जैविक खेती और ट्राइकोडर्मा का जादू (Organic Farming and Magic of Trichoderma)

आजकल जैविक खेती का चलन बढ़ा है। अगर आप रसायनों से बचना चाहते हैं और सोच रहे हैं कि जैविक तरीके से चना के उकठा रोग से कैसे करे रोकथाम, तो ‘ट्राइकोडर्मा’ (Trichoderma) आपका सबसे अच्छा दोस्त है। NHB रिपोर्ट के अनुसार जैविक फफूंदनाशी सुरक्षित विकल्प हैं। यह प्राकृतिक तरीका है चना के उकठा रोग से रोकथाम का।
- कैसे इस्तेमाल करें: 2.5 किलो ट्राइकोडर्मा पाउडर को 60-70 किलो सड़ी हुई गोबर की खाद में मिलाकर छाया में रख दें। इसे गीली टाट से ढक दें। 8-10 दिन बाद जब इसमें सफेदी आ जाए, तो बुवाई से पहले इसे एक एकड़ खेत में मिला दें।
- यह मिट्टी में मौजूद हानिकारक फफूंद को खा जाता है और चना के उकठा रोग से कैसे करे रोकथाम में लम्बे समय तक मदद करता है।
- नीम खली का प्रयोग
- गोबर खाद उपयोग
रासायनिक नियंत्रण (Chemical Control)
Image Prompt: Farmer spraying fungicide with protective gear in chickpea field
| दवा | मात्रा | छिड़काव समय |
|---|---|---|
| कार्बेन्डाजिम 50WP | 1 ग्राम/लीटर | रोग दिखते ही |
| मेन्कोजेब | 2 ग्राम/लीटर | 10 दिन बाद दोहराएँ |
कृषि वैज्ञानिकों का सुझाव है कि दवा बदल-बदल कर प्रयोग करें।
निष्कर्ष (Conclusion)
अंत में, किसान भाइयों, चना के उकठा रोग से कैसे करे रोकथाम के लिए आपको एक समन्वित प्रयास (Integrated Approach) अपनाना होगा। गर्मी की जुताई, बीज उपचार (ट्राइकोडर्मा या कार्बेन्डाजिम से), और सही किस्म का चुनाव ही आपकी फसल को बचा सकता है। अगर आप इन तरीकों को अपनाएंगे, तो निश्चित ही आपकी पैदावार बंपर होगी।
FAQs: चना के उकठा रोग (Wilt Disease Prevent): पर अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
चने में उकठा रोग की सबसे अच्छी दवा कौन सी है?
बीज उपचार के लिए ट्राइकोडर्मा विरिडी (जैविक) और कार्बेन्डाजिम (रासायनिक) सबसे कारगर दवाएं हैं जो चना के उकठा रोग से कैसे करे रोकथाम में मदद करती हैं।
क्या खड़ी फसल में उकठा रोग ठीक हो सकता है?
खड़ी फसल में पूरी तरह ठीक करना मुश्किल है, लेकिन कार्बेन्डाजिम की ड्रेंचिंग (जड़ों में घोल डालना) करके इसे फैलने से रोका जा सकता है।
चना सूखने का मुख्य कारण क्या है?
चने के सूखने का मुख्य कारण ‘फ्यूजेरियम ऑक्सिस्पोरम’ (Fusarium oxysporum) नामक फफूंद है, जो जड़ों को ब्लॉक कर देती है।
उकठा रोग किस तापमान पर सबसे ज्यादा फैलता है?
25 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान और ज्यादा नमी होने पर यह रोग तेजी से फैलता है।
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