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राजस्थान के श्रीगंगानगर और आसपास के किसानों के सामने रबी सीजन शुरू होने से पहले एक ऐसा सवाल खड़ा है, जिसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है—इस बार सिंचाई का पानी कितना मिलेगा? मॉनसून और जल उपलब्धता को लेकर बनी चिंता के बीच 2026 के लिए यह सवाल और महत्वपूर्ण हो गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने भी 2026 के दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के लिए देशभर में सामान्य से कम बारिश की संभावना जताई थी और उत्तर-पश्चिम भारत में भी सामान्य से नीचे बारिश का जोखिम बताया था। कृषि से जुड़ी ऐसी ही नई जानकारी के लिए किसान भाइयों Bihar Agro को विजिट करें।

ऐसे माहौल में Rabi Season Irrigation Crisis Rajasthan Farmers 2026 सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि खेती की योजना बदलने का संकेत है। खासकर उन खेतों में जहां नहर, ट्यूबवेल या पानी का दूसरा स्रोत सीमित है, वहां हर फसल को बराबर पानी देना मुश्किल हो सकता है। इसलिए कृषि विभाग की सलाह का मुख्य जोर फसल विविधीकरण पर है।
यानी पूरा खेत केवल गेहूं से भरने के बजाय थोड़ा हिस्सा सरसों, कुछ क्षेत्र चना या जौ के लिए रखा जाए और गेहूं में भी ऐसी किस्में चुनी जाएं जो सीमित सिंचाई में बेहतर ढंग से चल सकें।
Rabi Season Irrigation Crisis Rajasthan Farmers 2026: अब फसल का फैसला खेत देखकर होगा
कम पानी की स्थिति में सबसे पहली गलती यही हो सकती है कि किसान पड़ोसी के खेत में अच्छी चल रही किस्म देखकर वही बीज अपने खेत में भी लगा दे। हर खेत की कहानी अलग होती है। कहीं भारी मिट्टी है, कहीं रेतीली जमीन, कहीं सेम की समस्या और कहीं सिंचाई केवल एक-दो बार ही उपलब्ध होती है।
इसलिए Rabi Season Irrigation Crisis Rajasthan Farmers 2026 के बीच किस्म चुनते समय तीन चीजें पहले देखनी चाहिए—खेत की मिट्टी, बुवाई की तारीख और सिंचाई का भरोसेमंद स्रोत।

सरसों में जमीन के हिसाब से करें बीज का चुनाव
सरसों कम पानी वाले रबी विकल्पों में पहले से ही महत्वपूर्ण फसल है। लेकिन यहां भी एक ही किस्म हर जगह लगाने की जरूरत नहीं है।
समय पर बुवाई और भारी जमीन वाले खेतों के लिए RH-1975 और RH-1706 जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। RH-1975 को सिंचित और समय पर बोई जाने वाली परिस्थितियों के लिए उत्तर-पश्चिम भारत, जिसमें उत्तरी राजस्थान भी शामिल है, के लिए पहचान मिली है।
- जहां जमीन में सेम या लवणीय-क्षारीय समस्या रहती है, वहां CS-58 और CS-60 जैसे विकल्प खास ध्यान देने लायक हैं। भारत सरकार के Principal Scientific Adviser की टेक्नोलॉजी सूची में CS-58 को salt-tolerant mustard और CS-60 को saline/sodic soils के लिए उपयुक्त बताया गया है।
- रेतीली और टिब्बा भूमि वाले किसान RH-1424, RH-725 और RH-761 पर भी विचार कर सकते हैं। वहीं बुवाई में देरी हो जाए तो RGN-236 जैसा late-sown विकल्प उपयोगी हो सकता है। 2023-24 की rapeseed-mustard recommendations में श्रीगंगानगर सहित Zone-II के लिए rainfed परिस्थितियों में RH-725 और RH-761 तथा late-sown irrigated स्थिति में RGN-236 दर्ज हैं।
यही वजह है कि Rabi Season Irrigation Crisis Rajasthan-Farmers 2026 में सरसों को सिर्फ “कम पानी वाली फसल” समझने के बजाय मिट्टी के हिसाब से चुनना ज्यादा जरूरी है।

चने में सिंचाई की उपलब्धता सबसे बड़ा फैसला
चना उन खेतों के लिए खास विकल्प बन सकता है जहां गेहूं की पूरी सिंचाई कर पाना मुश्किल है। यहां बुवाई की स्थिति के अनुसार किस्म चुनना बेहतर रहेगा। समय पर बुवाई वाले सिंचित खेतों के लिए GNG-2171 यानी मीरा किस्म का विकल्प है। केंद्रीय दलहन निदेशालय की सूची में GNG-2171 को राजस्थान सहित उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र में सिंचित दशा के लिए दर्ज किया गया है।
देर से बुवाई की स्थिति में GNG-2261 यानी केशव का विकल्प सामने आता है। राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के अनुसार यह किस्म राजस्थान में late-sown irrigated condition के लिए जारी की गई थी और इसमें कई रोगों के प्रति अच्छी सहनशीलता देखी गई है।
दूसरी तरफ असिंचित खेतों में GNG-2461 यानी मूमल महत्वपूर्ण विकल्प हो सकती है। SKRAU की जानकारी के अनुसार मूमल को rainfed conditions में औसत करीब 2140 किलोग्राम/हेक्टेयर उपज मिली और इसमें विल्ट व dry root rot के प्रति अपेक्षाकृत बेहतर प्रतिरोध पाया गया।
इसलिए Rabi Season Irrigation Crisis Rajasthan Farmers 2026 के दौरान जिन किसानों के पास पानी का भरोसा कम है, वे चने की किस्म का चुनाव पहले से तय कर लें।
जौ में DWRB-223 क्यों बन रही है चर्चा का विषय?
जौ की खेती: रबी फसल में जौ को अक्सर गेहूं के मुकाबले कम आंकी जाती है, लेकिन पानी की कमी वाले साल में यह सोच बदल सकती है। खास तौर पर छिलका रहित जौ की DWRB-223 किस्म पर ध्यान दिया जा रहा है।
ICAR-IIWBR के 2024 वार्षिक प्रतिवेदन में DWRB-223 को उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र में समय पर बोई जाने वाली सिंचित स्थिति के लिए दर्ज किया गया है। इसमें 138 दिन में परिपक्वता, 6% बीटा-ग्लूकान और 11.7% प्रोटीन का उल्लेख है। 2026 में प्रकाशित शोध सार में इसकी औसत उपज लगभग 42.96 क्विंटल/हेक्टेयर और स्ट्राइप रस्ट के प्रति प्रतिरोध का उल्लेख है।
DWRB-223 की खास बात यह भी है कि छिलका रहित अनाज खाद्य उत्पादों में सीधे उपयोग के लिए सुविधाजनक होता है। हालिया ICAR शोध में इसे barley grits और health-food applications के लिए उपयोगी बताया गया है। यानी Rabi Season Irrigation Crisis Rajasthan Farmers 2026 में जौ केवल पानी बचाने वाली सोच नहीं, बल्कि वैकल्पिक बाजार और पोषण के नजरिए से भी देखा जा सकता है।
गेहूं छोड़ना जरूरी नहीं, सही किस्म चुनना जरूरी है
कई किसान गेहूं से पूरी तरह हटना नहीं चाहते और इसकी वजह भी साफ है—बाजार, घरेलू उपयोग और स्थानीय खरीद व्यवस्था। ऐसे किसानों के लिए रणनीति यह हो सकती है कि पूरे खेत में एक ही गेहूं किस्म लगाने के बजाय सीमित सिंचाई के अनुसार किस्म चुनी जाए।
WH-1402 को ICAR की 2024-25 वार्षिक रिपोर्ट में राजस्थान के बड़े हिस्से सहित उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र के लिए समय पर बोई जाने वाली restricted-irrigation condition में उपयुक्त बताया गया है। इसमें लगभग 50.25 क्विंटल/हेक्टेयर औसत उपज और 147 दिन की maturity दर्ज है।
WH-1402 के बारे में कृषि स्रोतों में दो सिंचाइयों में फसल प्रबंधन की सिफारिश भी दी गई है, जिसमें पहली सिंचाई शुरुआती जड़ विकास और दूसरी बालियां निकलने के आसपास की जाती है।
दूसरी तरफ DBW-296 यानी करण ऐश्वर्या को ICAR ने restricted-irrigation, timely-sown condition के लिए दर्ज किया है। इसकी औसत उपज 56.1 क्विंटल/हेक्टेयर, maturity करीब 150 दिन और heat तथा drought tolerance का उल्लेख है। रिपोर्ट में कम सिंचाई, यहां तक कि zero-irrigation परिस्थिति में भी बेहतर yield performance का उल्लेख मिलता है।
यही विकल्प Rabi Season Irrigation Crisis Rajasthan Farmers 2026 के समय उन किसानों के लिए उपयोगी हो सकते हैं जो गेहूं की खेती बनाए रखना चाहते हैं, लेकिन पानी की हर बूंद का हिसाब भी रखना चाहते हैं।
Rabi Season Irrigation Crisis Rajasthan-Farmers 2026 में खेत का नक्शा ऐसे बनाएं
मान लीजिए किसी किसान के पास 10 बीघा खेत है और पानी सीमित है। ऐसे में हर जगह गेहूं लगाने के बजाय एक हिस्सा सरसों, एक हिस्सा चना और बाकी हिस्सा सीमित सिंचाई वाली गेहूं किस्म में रखा जा सकता है। जिन खेतों में पानी सबसे कम उपलब्ध है, वहां फसल का चुनाव अलग रखा जा सकता है।
इस तरह राजस्थान के किसानों के लिए रबी सीज़न में सिंचाई का संकट 2026 के बीच पूरा जोखिम एक ही फसल पर नहीं रहेगा। अगर किसी समय नहर का पानी देर से मिले, तो कम पानी में चलने वाली फसल ज्यादा सुरक्षित रह सकती है।
बुवाई से पहले चार बातों का हिसाब जरूर कर लें
किसान भाइयों के लिए इस साल बीज खरीदने से पहले सिर्फ “उपज कितनी है” मत पूछिए। यह भी पूछिए कि किस्म आपके इलाके के लिए recommend है या नहीं, कितनी सिंचाई में अच्छा प्रदर्शन करती है, आपकी बुवाई की तारीख से मेल खाती है या नहीं और जमीन की समस्या के लिए ठीक है या नहीं।
राजस्थान के किसानों के लिए रबी सीज़न में सिंचाई का संकट 2026 में यही चार सवाल खेती का खर्च और जोखिम दोनों कम करने में मदद कर सकते हैं।
सबसे जरूरी बात: कम पानी का मतलब कम कमाई जरूरी नहीं
पानी सीमित हो तो खेती बंद करने की जरूरत नहीं है। जरूरत रणनीति बदलने की है। सरसों, चना, जौ और सीमित सिंचाई वाली गेहूं किस्मों का संतुलित इस्तेमाल खेत के हिसाब से किया जा सकता है।
Rabi Season Irrigation Crisis Rajasthan Farmers 2026 किसानों को यही संकेत देता है कि रबी की सफलता सिर्फ ज्यादा पानी पर निर्भर नहीं है। सही किस्म, सही समय, सही खेत और सही सिंचाई योजना मिल जाए तो कम संसाधनों में भी बेहतर नतीजे हासिल किए जा सकते हैं।
किसान यह भी ध्यान रखें कि बीज की अंतिम पसंद स्थानीय कृषि विभाग, कृषि विश्वविद्यालय, KVK और प्रमाणित बीज स्रोत से उपलब्ध सिफारिश के अनुसार ही तय करें, क्योंकि एक ही किस्म का प्रदर्शन हर मिट्टी और हर खेत में समान नहीं होता।
FAQ: Rabi Season Irrigation Crisis Rajasthan Farmers 2026
राजस्थान में कम पानी में रबी में कौन-सी फसल बेहतर विकल्प हो सकती है?
सरसों, चना और जौ को सीमित सिंचाई वाले क्षेत्रों में विकल्प के रूप में शामिल किया जा सकता है। गेहूं में भी restricted-irrigation varieties का चयन किया जा सकता है।
श्रीगंगानगर में सरसों की कौन-सी किस्में देखी जा सकती हैं?
खेत की स्थिति के अनुसार RH-725, RH-761, RH-1706, RH-1975 और RGN-236 जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। मिट्टी और बुवाई की तारीख के अनुसार चयन बदल सकता है।
असिंचित खेत के लिए चने की कौन-सी किस्म बताई गई है?
GNG-2461 यानी मूमल को राजस्थान में rainfed conditions के लिए विकसित और अनुशंसित विकल्पों में शामिल किया गया है।
DWRB-223 जौ की खासियत क्या है?
यह छिलका रहित जौ है। ICAR-IIWBR के अनुसार इसमें 6% beta-glucan और 11.7% protein दर्ज है, जबकि शोध प्रकाशन में इसकी औसत उपज करीब 42.96 क्विंटल/हेक्टेयर बताई गई है।
कम सिंचाई में WH-1402 कैसी है?
ICAR के अनुसार WH-1402 को समय पर बोई जाने वाली restricted-irrigation condition के लिए उपयुक्त माना गया है और इसकी maturity लगभग 147 दिन है।
DBW-296 को किस स्थिति में लगाया जा सकता है?
DBW-296 को restricted-irrigation, timely-sown condition के लिए दर्ज किया गया है और इसमें heat तथा drought tolerance भी बताई गई है।
क्या पानी कम होने पर गेहूं की खेती पूरी तरह छोड़ देनी चाहिए?
जरूरी नहीं। खेत में उपलब्ध सिंचाई के अनुसार गेहूं की उपयुक्त किस्म चुनकर और कुछ क्षेत्र को सरसों, चना या जौ में बदलकर जोखिम कम किया जा सकता है।
पानी सीमित तो खेती की रणनीति बदलिए, राजस्थान के किसानों के लिए रबी में ये किस्में बन सकती हैं सहारा
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